राजस्थान में बस टैक्स पर विवाद: 2022 के आदेश में अतिरिक्त कर नहीं, अब रोज 600 रुपए वसूली का आरोप
जयपुर। राजस्थान में प्राइवेट बसों के स्पेशल परमिट और टैक्स को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बस ऑपरेटर्स का आरोप है कि पूरे महीने का टैक्स जमा करने के बावजूद उनसे प्रतिदिन 600 रुपए अतिरिक्त टैक्स लिया जा रहा है। इसके साथ 38 रुपए सरचार्ज भी वसूला जा रहा है।
प्राइवेट बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने इस वसूली पर कई सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन का दावा है कि 21 अप्रैल 2022 के परिवहन विभाग के आदेश में निर्धारित संभाग के भीतर स्पेशल परमिट लेने पर अतिरिक्त टैक्स नहीं लेने की बात कही गई थी।
ऑपरेटर्स का आरोप है कि नई वसूली के लिए न तो कोई अधिसूचना सामने आई है और न ही उन्हें वित्त विभाग और राज्य सरकार की मंजूरी से जुड़ा कोई आदेश मिला है।
मासिक टैक्स के बाद 600 रुपए रोज लेने का आरोप
प्राइवेट बस ऑपरेटर एसोसिएशन स्टेज कैरिज जयपुर के अध्यक्ष कैलाश चंद शर्मा ने द सूत्र को बताया कि बस ऑपरेटर्स पहले से मासिक टैक्स जमा करते हैं। उनके मुताबिक 210 रुपए प्रति सीट के हिसाब से मासिक टैक्स लिया जाता है। इसके साथ 6.25 प्रतिशत सरचार्ज भी देना होता है।
एसोसिएशन का दावा है कि अब स्पेशल परमिट यानी टीपी लेते समय प्रतिदिन 600 रुपए अतिरिक्त टैक्स लिया जा रहा है। इस पर 38 रुपए सरचार्ज भी जुड़ रहा है।ऑपरेटर्स का सवाल है कि पूरे महीने का टैक्स पहले जमा है तो उसी अवधि में स्पेशल परमिट पर दोबारा टैक्स क्यों लिया जा रहा है।
2022 के आदेश में क्या लिखा है
एसोसिएशन ने अपने दावे के समर्थन में 21 अप्रैल 2022 का परिवहन विभाग का आदेश भी द सूत्र को उपलब्ध कराया है। यह आदेश तत्कालीन परिवहन आयुक्त की ओर से जारी किया गया था। इसमें संभागीय कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट और स्पेशल परमिट को लेकर निर्देश दिए गए थे।
आदेश के पॉइंट नंबर तीन के अनुसार, संभागीय परमिट वाला वाहन अपने निर्धारित संभाग में स्वीकृत या निर्धारित मार्ग पर चलता है और इसके लिए स्पेशल परमिट लेना पड़ता है तो अतिरिक्त कर देय नहीं होगा। अब ऑपरेटर्स इसी आदेश के आधार पर मौजूदा वसूली पर सवाल उठा रहे हैं।
नई वसूली के आदेश और मंजूरी पर सवाल
एसोसिएशन का आरोप है कि अतिरिक्त टैक्स की व्यवस्था ऑनलाइन पोर्टल पर लागू कर दी गई। इसके लिए कोई नई अधिसूचना उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। कैलाश चंद शर्मा का दावा है कि इसके लिए वित्त विभाग से स्वीकृति नहीं ली गई। उन्होंने राज्य सरकार की मंजूरी पर भी सवाल उठाए हैं।
एसोसिएशन की मांग है कि विभाग उस आदेश की कॉपी सार्वजनिक करे, जिसके आधार पर यह वसूली हो रही है।
3 अगस्त को परिवहन आयुक्त को दी शिकायत
एसोसिएशन ने 3 अगस्त 2026 को परिवहन आयुक्त को इस मामले में लिखित शिकायत दी थी। इसमें कहा गया था कि संभागीय परमिट वाली बसों का पूरे महीने का टैक्स पहले ही जमा होता है।
इसके बाद भी स्पेशल परमिट लेते समय अतिरिक्त टैक्स लिया जा रहा है। कैलाश चंद शर्मा का दावा है कि शिकायत किए करीब दो महीने हो गए हैं। इसके बावजूद एसोसिएशन को स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।
परमिट उल्लंघन में 10 हजार जुर्माना, टैक्स पर दूसरा विवाद
बस ऑपरेटर्स ने परमिट उल्लंघन के मामलों में होने वाली टैक्स वसूली पर भी सवाल उठाए हैं। कैलाश चंद शर्मा के मुताबिक परमिट की शर्तों का उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जाता है। बिना परमिट बस चलाने पर भी 10 हजार रुपए जुर्माना और अतिरिक्त टैक्स लिया जाता है।
उनका कहना है कि नियम के अनुसार जुर्माना लगाने पर ऑपरेटर्स को आपत्ति नहीं है। विवाद अतिरिक्त टैक्स की अवधि को लेकर है। एसोसिएशन का आरोप है कि ऐसे कुछ मामलों में एक महीने के बजाय दो से तीन महीने तक का टैक्स वसूल लिया जाता है।
आम लोगों की जेब तक कैसे पहुंच सकता है मामला
यह विवाद केवल बस ऑपरेटर्स तक सीमित नहीं है। प्राइवेट कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों का इस्तेमाल शादी, धार्मिक यात्रा, सामाजिक कार्यक्रम और ग्रुप टूर में होता है।ऑपरेटर्स का कहना है कि परमिट और टैक्स का खर्च बढ़ने से बस चलाने की लागत भी बढ़ेगी। ऐसे में इसका असर आगे चलकर बस बुकिंग के किराए पर पड़ सकता है।
परिवहन विभाग से मांगा पक्ष, जवाब का इंतजार
द सूत्र ने पूरे मामले में परिवहन विभाग के परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया है। उन्हें फोन करने के साथ व्हाट्सऐप पर भी मामले की जानकारी भेजकर विभाग का पक्ष मांगा गया। खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से जवाब नहीं मिला।