राजस्थान ने ठुकराई पंजाब की वाटर रॉयल्टी डिमांड, भगवंत मान ने कोर्ट में जाने की दी धमकी

Jinesh Jain | Mar 20, 2026, 17:17 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान ने पानी के बदले पंजाब की वाटर रॉयल्टी डिमांड को ठुकरा दिया है। राजस्थान ने इसे तथ्यों से परे बताया है। दूसरी ओर पंजाब के सीएम भगवंत मान ने इस मामले को कोर्ट में ले जाने की धमकी दी है।

News In Short

  • राजस्थान ने ठुकराई पानी के बदले पंजाब की वॉटर रॉयल्टी डिमांड।
  • राजस्थान ने तर्क दिया कि यह डिमांड तथ्यों से बिल्कुल परे हैं।
  • जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत बोले, आजादी के बाद तो तीन नए समझौते हो गए।
  • मंत्री ने कहा कि पानी राष्ट्रीय संपत्ति, यह व्यापार की कोई वस्तु नहीं।
  • दूसरी ओर पंजाब सीएम ने इस मामले को कोर्ट में ले जाने की फिर धमकी दी।

News In Detail

​Jaipur: राजस्थान और पंजाब के बीच पानी को लेकर टकराव बढ़ गया है। राजस्थान ने पंजाब की उस माग को खारिज कर दिया है, जिसमें पानी के बदले 1.44 लाख करोड़ रुपये की वाटर रॉयल्टी की डिमांड की गई थी। राजस्थान ने पंजाब की इस मांग को पूरी तरह असंवैधानिक, गैर-कानूनी और तथ्यों से परे करार दिया है।



​पंजाब ने पानी के बदले मांगी 1.44 लाख करोड़ की वाटर रॉयल्टी, राजस्थान की चिंता बढ़ी



विवाद मे पुराने समझौते को बनाया आधार

पंजाब ने एक दिन पहले कहा था कि सितंबर 1920 में बीकानेर रियासत, बहावलपुर (अब पाकिस्तान) और तत्कालीन ब्रिटिश सरकार के बीच पानी समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत राजस्थान को प्रति एकड़ पानी के बदले रॉयल्टी देनी थी।


पंजाब के सीएम भगवंत मान का आरोप है कि राजस्थान ने 1960 तक तो भुगतान किया, लेकिन उसके बाद छह दशकों से पैसा देना बंद कर दिया है। उनके हिसाब से 1960 से 2026 तक की यह बकाया वाटर रॉयल्टी 1.44 लाख करोड़ रुपये बैठती है।



​राजस्थान ने कहा, समझौते में रॉयल्टी का जिक्र नहीं

​पजाब की इस वाटर रॉयल्टी डिमांड पर राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिह रावत ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने दो टूक कहा कि 1920 का समझौता ब्रिटिश सरकार और रियासतों के बीच था। इसमे चार्ज ब्रिटिश सरकार को दिया जाना था, न कि पंजाब प्रांत को।



मंत्री रावत ने कहा कि आजादी के बाद 1955, 1959 और 1981 में रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के पानी के बंटवारे पर तीन बार नए समझौते हुए। इन आधुनिक समझौतों में कहीं भी रॉयल्टी या किसी कमर्शियल चार्ज का कोई प्रावधान नहीं है।



राजस्थान का तर्क-पानी व्यापार की वस्तु नहीं

राजस्थान सरकार का तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 262 के तहत अंतरराज्यीय नदियों के जल का नियंत्रण और वितरण संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। नदी का पानी राष्ट्रीय संसाधन है। इसे व्यापारिक वस्तु के रूप में नहीं देखा जा सकता।


राजस्थान को वर्तमान में बीकानेर कैनाल, भाखड़ा मेन लाइन और सरहिंद फीडर से पानी मिलता है। इसका नियमन केंद्र सरकार की संस्था भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड करती है। ऐसे में पंजाब का रॉयल्टी मांगना कानूनी रूप से निराधार है।



​भगवंत मान बोले-फिर पानी लेना बंद करे राजस्थान

उधर, राजस्थान के इनकार के बाद पंजाब के सीएम भगवंत मान ने इस मामले को अदालत में ले जाने का ऐलान किया है। मान ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि पहले तो वे ऐतराज ही करेंगे। चोरी करने के बाद कोई चोर खुद नहीं कहता कि उसने चोरी की है। जैसे ट्रांसफॉर्मर से तेल चुराने वाला पकड़े जाने पर पुरानी चोरियां भी कबूल लेता है, वैसे ही राजस्थान को भी कोर्ट में जवाब देना होगा।



​मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट कहा कि यदि राजस्थान पैसा नहीं दे सकता तो उसे पंजाब का पानी लेना बंद कर देना चाहिए। वर्ष 1960 के बाद भी राजस्थान 18,000 क्यूसेक पानी ले रहा है, लेकिन पंजाब के हक का पैसा नहीं चुका रहा।



​किसानों के हक पर अड़ी राजस्थान सरकार

दूसरी ओर, राजस्थान के मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि वह अपने राज्य के किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। राजस्थान को 1955 में 8.00 एमएएफ और 1981 में 8.60 एमएएफ पानी आवंटित किया गया था। यह राजस्थान का वैध अधिकार है। सरकार किसी भी ऐसी गैर-संवैधानिक मांग को स्वीकार नहीं करेगी जो स्थापित विधिक सिद्धांतों के खिलाफ हो।



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