राज्यसभा चुनाव 2026 : क्या राजस्थान में फीमेल कार्ड खेलेगी बीजेपी ?
आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजस्थान बीजेपी में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। बीजेपी नारी शक्ति अधिनियम को हर तरह भुनाने और विपक्ष को घेरने में जुटी है, लिहाजा सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी इस बार राजस्थान से किसी महिला उम्मीदवार (राज्यसभा उम्मीदवार)को राज्यसभा भेजेगी?
सवाल इसलिए भी क्योंकि अपनी स्थापना से लेकर अब तक बीजेपी ने सिर्फ एक बार राजस्थान के कोटे से महिला को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व दिया है और वह भी आउट साइडर नजमा हेपतुल्ला को। जबकि कांग्रेस अब तक आठ महिलाओं को राज्यसभा भिजवा चुकी है और एक बार फिर राजस्थान से कांग्रेस महिला उम्मीदवार, महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेहाना रियाज को राज्यसभा के लिए अपना उम्मीदवार बनाने पर विचार कर रही है ।
2024 में सोनिया गांधी चुनी गई थीं
दो साल पहले 2024 में कांग्रेस की और से पार्टी की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी राज्यसभा सदस्य चुनी गई थीं। बतौर महिला राजस्थान से पहली बार राज्यसभा सदस्य बनने का मौका शारदा भार्गव को मिला था । 1952 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुई शारदा भार्गव के पिता मुकुट बिहारी भार्गव भी लोकसभा सदस्य रह चुके हैं। भार्गव स्वतंत्रता संग्राम के वक्त से ही कांग्रेस से जुड़े थे।
शारदा भार्गव को पहली बार राज्यसभा के लिए चुने जाने का गौरव ही नहीं मिला। वह लगातार तीन बार (1952 - 1966) चुनी जाने वाली राज्यसभा सांसद भी रहीं। उसके बाद राष्ट्रीय स्तर की कवयित्री प्रभा ठाकुर दो बार (2002 और 2014) राज्यसभा के लिए चुनी गईं। 1970 में कांग्रेस ने एससी वर्ग से नारायणी देवी वर्मा (1970-1976) को पूरे छह साल के लिए राज्यसभा भिजवाया था। बगड़ावत लोकगाथा की लेखक, पद्मश्री लक्ष्मी कुमारी चुंडावत (1972-1978), पूर्व सीएम बरकतुल्लाह खान की पत्नी ऊषी खान (1976-1982) , एससी वर्ग से पूर्व सीएम जगन्नाथ पहाड़िया की पत्नी शांति पहाड़िया (1984-1990), जमना देवी बारूपाल (2000-2006) भी 2024 में सोनिया गांधी के निर्वाचन से पहले राज्यसभा में कांग्रेस की और से राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला सांसद रहीं।
बीजेपी एक बार ही महिला को बड़े सदन भेज पाई
गौरतलब है कि ये सभी महिलाएं राज्यसभा के पूरे कार्यकाल के लिए चुनी गई थीं, जबकि अटलबिहारी सरकार के वक्त कांग्रेस से भाजपा में आई राज्यसभा की उपसभापति रहीं नजमा हेपतुल्ला (2004-2010) बीजेपी की तरफ से राज्यसभा पहुंचीं। 1952 से अब तक राजस्थान से कुल 148 राज्यसभा सांसद चुने गए हैं, जिनमें बीजेपी सिर्फ एक बार ही महिला उम्मीदवार को बड़े सदन तक भेज पाई है।
अलका गुर्जर का नाम सबसे ऊपर
1980 से लेकर अब तक सिर्फ एक बार मिला यह प्रतिनिधित्व ही इस बार महिला दावेदारी का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। खासकर उस स्थिति में जब बीजेपी महिला आरक्षण के बहाने कांग्रेस समेत गैर भाजपाई दलों पर निशाना साध रही है। राज्यसभा के लिए दावेदारी में महिला कोटे से जो प्रमुख नाम सामने आते दिखाई पड़ रहे हैं, उनमें बीजेपी की राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर का नाम सबसे ऊपर है। अलका गुर्जर बांदीकुई से विधायक रह चुकी हैं, जबकि उनके पति पूर्व मंत्री नाथूसिंह गुर्जर सांसद और विधायक रहे हैं। गुर्जर समुदाय से ही एक और दावेदारी जयपुर की पूर्व मेयर सौम्या गुर्जर की संभव है। सौम्या को संघ की पसंद माना जाता है।
वसुंधरा खेमे से सुमन और पायल की दावेदारी
दावेदारों में वसुंधरा खेमे की और से महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सुमन शर्मा और सिरोही की पूर्व जिला प्रमुख पायल परसरामपुरिया के नाम शामिल हैं। बीजेपी ने बीते सालों में अलग अलग प्रदेशों से महिला मोर्चा से जुड़ी नेत्रियों को राज्यसभा भेजा है। महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वनथी श्रीनिवासन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दर्शन जरदोश, राष्ट्रीय सचिव संगीता यादव (यूपी) के अलावा महिला मोर्चा से बड़े सदन में पहुंचने वाली ये राज्यसभा सदस्य हैं- छत्तीसगढ़ महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष लक्ष्मी वर्मा (2026),मध्यप्रदेश महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष माया नारोलिया (2024 ) और मध्यप्रदेश से ही मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा वाल्मीकि (2022 )।
इस बार भाजपा बदलेगी परिपाटी?
इसी तरह उत्तरप्रदेश की महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए गीता शाक्य को 2024 में राज्यसभा भेजा गया। वहीं धर्मशीला गुप्ता को बिहार महिला मोर्चा अध्यक्ष रहते हुए 2026 में राज्यसभा भेजा गया। 2024 में महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मेघा कुलकर्णी महाराष्ट्र से राज्यसभा भेजी गईं। मार्च 2022 में राज्यसभा भेजी गई नागालैंड में भाजपा महिला मोर्चा की राज्य अध्यक्ष एस. फांग्नोन कोन्यक नागालैंड से राज्यसभा सदस्य के रूप में चुनी जाने वाली पहली महिला और संसद के किसी भी सदन या राज्य विधानसभा के लिए चुनी जाने वाली राज्य की दूसरी महिला बनीं। साथ ही महिला मोर्चा के दायित्व संभालते हुए बीजेपी ने कविता पाटीदार, रमीलाबेन बारा और कल्पना सैनी को राज्यसभा भिजवाया है । इससे लगता है कि महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से पिछड़े राजस्थान को इस बार बीजेपी आधी दुनिया के लिए राज्यसभा का दरवाजा खोल सकती है।
राखी की राह में दीया कुमारी रोड़ा
हर राज्य से महिला मोर्चा को मिल रहे प्रतिनिधित्व को देखते हुए राजस्थान महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़ का नाम भी नेतृत्व की तरफ से आगे आ जाए तो अचरज नहीं। हर बूथ ,महिला मजबूत अभियान शुरू कर पांच लाख महिलाओं को बूथ पर तैनाती के अभियान में लगी राखी राठौड़ को हाल ही नारी शक्ति वंदन अधिनियम के वक्त हिंदी,अंग्रेजी के सभी राष्ट्रीय चैनल्स में बतौर पैनलिस्ट डिबेट का हिस्सा बनाने से भी संभावना है कि तर्क और तथ्यों से प्रतिद्वंद्वियों पर भारी बाइलिंगुअल राखी को पार्टी भविष्य और बड़ी भूमिका के लिए तैयार कर रही है। राखी की संभावनाओं के द्वार इसलिए भी खुलते हैं क्योंकि राजस्थान में राजपूत समुदाय कथित उपेक्षा से उद्वेलित है। हालांकि डिप्टी सीएम दिया कुमारी की चली तो राखी की जगह चौंकाने वाला नाम भिंडर राजपरिवार की दीपेंद्र कंवर भी संभव है। दीपेंद्र कंवर पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के साथ साथ राजसमंद की सांसद, मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की सदस्य महिमा कुमारी की भी पसंदीदा मानी जाती हैं। हालांकि ,पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया भिंडर के धुर विरोधी हैं ।
ऐसे में राज्यसभा के लिए प्रवेश के द्वार किसके लिए खुलेंगे, यह तो भविष्य ही बताएगा। फिलहाल संभावना यही है कि यह मौका किसी सौभाग्यवती को मिले।
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