सलूंबर में साइलेंट किलर बनी अनजान बीमारी, 5 दिन में 5 बच्चों की मौत, घर-घर में मरीज
News In Short
- सलूंबर जिले में रहस्यमयी बीमारी से 5 दिन में 5 बच्चों की मौत, गांव में सन्नाटा।
- बच्चों में बुखार, उल्टी और शरीर अकड़ने के लक्षण, बीमारी से डर का माहौल।
- सलूंबर और उदयपुर अस्पतालों में 8 बच्चे भर्ती, 275 लोग लक्षणों से ग्रस्त।
- शुरूआती लक्षण इन्सेफलाइटिस (दिमागी बुखार) की ओर कर रहे हैं इशारा।
- क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, PHC की आवश्यकता पर जोर।
News In Detail
Salumbar: राजस्थान के नए आदिवासी जिले सलूंबर में इन दिनों बच्चों की मौत के कारण मातम पसरा है। लसाड़िया इलाके के लालपुरा और घाटा गांव में एक ऐसी रहस्यमयी बीमारी ने दस्तक दी है, जो बच्चों को संभलने का मौका तक नहीं दे रही। महज 5 दिन के भीतर 5 मासूमों की मौत ने पूरे चिकित्सा महकमे की नींद उड़ा दी है। दहशत का आलम यह है कि लोग अब अपने बच्चों को घरों से बाहर निकालने में भी कतरा रहे हैं।
बुखार, उल्टी और फिर शरीर का अकड़ना
बीमारी का पैटर्न बेहद डरावना है। परिजनों के अनुसार बच्चों को पहले तेज बुखार आता है, फिर उल्टियां शुरू होती हैं और देखते ही देखते उनका शरीर अकड़ जाता है। लालपुरा के मानाराम ने अपने दो लाडले बेटों, दीपक (4) और लक्ष्मण (3) को अपनी आँखों के सामने दम तोड़ते देखा। दीपक मोबाइल देख रहा था कि अचानक उसका जबड़ा भिंच गया और अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसकी सांसे थम गईं। तीन दिन बाद उसके छोटे भाई की भी उसी तरह मौत हो गई।
घरों में मातम, अस्पताल में भीड़
गांव के हालात हृदयविदारक हैं घाटा गांव में 2 साल की काजल और 4 साल के राहुल ने भी इसी तरह दम तोड़ा। राहुल के पिता का आरोप है कि उदयपुर अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें जांच रिपोर्ट तक नहीं दी। इसी तरह सीमा (4) की मौत के बाद उसके भाई-बहन भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। फिलहाल सलूंबर और उदयपुर के अस्पतालों में 8 बच्चे भर्ती हैं।
प्रशासन ने आनन-फानन में 3,690 कर्मियों की सहायता से 52 हजार घरों का सर्वे कराया। सर्वे के बाद अब तक 275 लोगों में समान लक्षण मिले हैं, जिनमें से 25 की हालत गंभीर बताई जा रही है।
क्या यह दिमागी बुखार?
उदयपुर के एमबी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन के अनुसार बच्चों के लक्षण इन्सेफलाइटिस (दिमागी बुखार) की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि, असल कारण का पता जयपुर से आई विशेषज्ञों की टीम और ब्लड सैंपल्स की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। संक्रमण की आशंका को देखते हुए पशुपालन विभाग ने भी बाड़ों में कीटनाशक छिड़काव शुरू कर दिया है।
30 किलोमीटर में सिर्फ एक अस्पताल
इस त्रासदी ने इलाके की लचर स्वास्थ्य सुविधाओं की भी पोल खोल दी है। लसाड़िया-धरियावद मार्ग के 32 किलोमीटर के दायरे में महज एक उप-स्वास्थ्य केंद्र है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यदि गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) होता, तो शायद कुछ मासूमों की जान बचाई जा सकती थी।
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