श्रीअन्न योजना की अनदेखी: सरकारी बैठकों और आयोजनों में नहीं किया जा रहा श्रीअन्न का उपयोग

Purshottam Kumar Joshi | Jan 20, 2026, 18:22 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में श्रीअन्न के प्रचार के लिए जारी आदेशों की पालना नहीं हो रही है। सरकारी बैठकों में बाजरे से बने उत्पाद परोसने का आदेश धरा रह गया है। बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर जिलों में अमल में नहीं लाया जा रहा आदेश।

News In Short

  1. राजस्थान में श्रीअन्न (मिलेट्स) के प्रचार के आदेशों का पालन नहीं हो रहा।
  2. सरकारी बैठकों में कचौरी-समोसा की जगह बाजरे से बने उत्पाद परोसे जाने थे।
  3. बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर में बाजरे की पैदावार, लेकिन आदेशों का पालन नहीं।
  4. डाक बंगले और सर्किट हाउस में भी बाजरे से बने व्यंजन नहीं परोसे जा रहे।
  5. राज्य सरकार ने श्रीअन्न के प्रचार के लिए प्रमोशन एजेंसी की स्थापना की घोषणा की थी।

News In Detail

राजस्थान में श्रीअन्न (मिलेट्स) के उपयोग को लेकर अधिकारी लापरवाह बने हुए है। सरकारी डाक बंगले और सर्किट हाउस में बाजरे से बने व्यंजन शामिल नहीं किए जा रहे हैं। जबकि केंद्र और राज्य सरकार ने श्रीअन्र को बढ़ावा देने के लिए आदेश जारी किए हुए है। इसके तहत सरकारी बैठकों में बाजरे से बने उत्पादों को परोसना था, विशेषकर बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर जैसे जिलों में जहां बाजरा की सबसे ज्यादा पैदावार होती है, वहां भी यह आदेश अमल में नहीं लाया जा रहा।



श्रीअन्न के आदेश की अवेहलना

राजस्थान सरकार द्वारा श्रीअन्न (मिलेट्स) के प्रोत्साहन के लिए एक साल पहले जारी किए गए आदेश का पालन नहीं हो रहा है। इसके तहत सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में अब कचौरी, समोसा और आलू चिप्स की बजाय बाजरे से बने उत्पाद परोसे जाने थे। हालांकि यह आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है और अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया है।



बाजरे का प्रोत्साहन क्यों नहीं हो रहा

राजस्थान के बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर जैसे जिलों में जहां बाजरा की सबसे ज्यादा पैदावार होती है, वहां भी श्री अन्न के प्रचार-प्रसार के लिए जारी आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। न तो सरकारी बैठकों में बाजरे से बने उत्पाद परोसे जा रहे हैं और न ही सर्किट हाउस और डाक बंगलों में इनकी व्यवस्था की जा रही है। इसके चलते बाजरे के प्रोत्साहन के लिए की गई पहल फीकी पड़ गई है।



श्रीअन्न के प्रचार की योजना

दिसंबर 2024 में राजस्थान सरकार ने श्रीअन्न के प्रचार के लिए एक प्रमोशन एजेंसी स्थापित करने की घोषणा की थी, ताकि बाजरे और अन्य मिलेट्स के उत्पादों का प्रचार किया जा सके। इसके तहत, सरकारी कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और प्रशिक्षण बैठकों में मिलेट्स से बने उत्पाद जैसे बिस्किट, रस्क, चूरमा, हलवा और खिचड़ी का परोसा जाना था। लेकिन, आदेश के बावजूद, इन उत्पादों को सरकारी बैठकों में नहीं परोसा जा रहा है।



नया कदम, पुरानी नीतियों का पालन क्यों नहीं

सरकार ने सरकारी डाक बंगला और सर्किट हाउस में भी खाने के ऑर्डर में बाजरे के व्यंजन जोड़ने की योजना बनाई थी। यह भी आदेश दिया गया था कि इन जगहों पर बाजरे से बने व्यंजन जरूर शामिल किए जाएं। लेकिन अभी तक इन जगहों पर भी इस आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे श्री अन्न के प्रोत्साहन की योजना का असर काफी सीमित रह गया है।



श्रीअन्न के लाभ

श्रीअन्न यानी मिलेट्स स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद लाभकारी होते हैं। यह पोषण से भरपूर होते हैं और इनके सेवन से कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। खासकर बाजरा को एक सुपरफूड के रूप में प्रचारित किया जा सकता है। यह भारतीय कृषि की अहम फसल भी है। हालांकि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का सही तरीके से पालन नहीं होने के कारण, इन लाभों का पूरा फायदा किसानों और आम जनता को नहीं मिल पा रहा है।



मुख्य बिंदु:

  • राजस्थान सरकार ने दिसंबर 2024 में श्री अन्न के प्रचार के लिए एक प्रमोशन एजेंसी स्थापित करने की घोषणा की थी और सरकारी कार्यक्रमों में मिलेट्स से बने उत्पादों को शामिल करने का आदेश जारी किया था।
  • आदेश के बावजूद, सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में बाजरे से बने उत्पादों को परोसा नहीं जा रहा है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं।
  • श्रीअन्न (मिलेट्स) पोषण से भरपूर होते हैं और स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। यह भारत में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण फसल है, जो उनके आय को बढ़ाने में मदद कर सकती है।

भारत सरकार द्वारा 'श्रीअन्न' (Shree Anna) की पहल मुख्य रूप से बजट 2023-24 में घोषित की गई थी, जिसका उद्देश्य मोटे अनाजों (Millets) को बढ़ावा देना है। यहाँ इसकी विस्तृत जानकारी दी गई है:



श्री अन्न योजना का शुभारंभ

वित्त मंत्री द्वारा केंद्रीय बजट 1 फरवरी 2023 में इसे औपचारिक रूप से 'श्रीअन्न' नाम दिया गया। भारत के प्रस्ताव पर ही संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को 'अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष' घोषित किया था।



योजना का उद्देश्य

वैश्विक हब बनाना: भारत को मोटे अनाज के उत्पादन और निर्यात के लिए 'ग्लोबल हब' के रूप में स्थापित करना।



पोषण सुरक्षा: एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याओं से लड़ने के लिए नागरिकों की थाली में पोषक तत्वों से भरपूर बाजरा, ज्वार और रागी जैसे अनाजों को वापस लाना।



किसानों की आय: मोटे अनाज कम पानी और विषम जलवायु में भी उग सकते हैं, जिससे छोटे किसानों की लागत कम होती है और आय बढ़ती है।



अनुसंधान को बढ़ावा: भारतीय श्रीअन्न अनुसंधान संस्थान हैदराबाद (IIMR) को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में बढ़ावा देना ताकि नई तकनीकों का विकास हो सके।



श्रीअन्न योजना को लेकर नियम और शर्तें

कृषि सहायता: किसानों को उन्नत बीज और खेती के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है।


क्षेत्रीय चयन: कई राज्यों (जैसे ओडिशा) में ब्लॉक स्तर पर कम से कम 1000 हेक्टेयर क्षेत्र को इसके तहत कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।


लाभार्थी: इसमें मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों (WSHGs) और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को प्राथमिकता दी जाती है।


प्रोत्साहन: मोटे अनाज की खेती करने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार लिंक के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा दी जाती है।



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