SIR से सियासी भूचाल, गहलोत,पायलट और भजनलाल के क्षेत्रों में सबसे अधिक कटे वोटर
News in short
- राजस्थान में एसआईआर के आंकड़ों ने सियासी दलों की धड़कने बढ़ाई।
- प्रदेश में 100 से अधिक सीटें, जहां जीत के अंतर से 5 गुना तक वोट कटे।
- प्रदेश में मतदाता सूची से कुल 31.36 लाख वोटरों के नाम हटाए गए।
- सीएम भजनलाल और पूर्व सीएम अशोक गहलोत के क्षेत्रों में बड़ा फेरबदल।
- कम अंतर वाली 35 विधानसभा सीटों पर अधिक वोट कटने से खतरे की घंटी।
News in detail
जयपुर। राजस्थान में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद आए आंकड़ों ने सियासी दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। प्रदेश की 100 से अधिक ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां 2023 के विधानसभा चुनाव के जीत के अंतर से दो से पांच गुना तक मतदाताओं के नाम कटे हैं। सर्वाधिक वोटरों के नाम सीएम भजनलाल शर्मा, पूर्व सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के क्षेत्रों में घटे हैं। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आने वाले चुनावों के समीकरणों में उलटफेर कर सकते हैं।
31 लाख से अधिक नाम कटे
पूरे प्रदेश में मतदाता सूची से कुल 31.36 लाख (5.74 प्रतिशत) मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार नाम हटने के सबसे प्रमुख कारणों में वोटरों का स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना (61.15%), मृत्यु (27.91%) और दोहरी प्रविष्टि (10.94%) शामिल हैं।
नाम काटने के मामले में राजस्थान के तीन प्रमुख जिले सबसे आगे रहे हैं:
जयपुर: 5.36 लाख नाम हटाए गए।
जोधपुर: 2 लाख से अधिक नाम हटाए गए।
उदयपुर: 1.58 लाख नाम हटाए गए।
गहलोत,सचिन और भजनलाल के क्षेत्रों में बड़ा फेरबदल
सबसे चौंकाने वाले आंकड़े मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विधानसभा क्षेत्रों से आए हैं। गहलोत के निर्वाचन क्षेत्र सरदारपुरा (जोधपुर) में सबसे अधिक 19.98 प्रतिशत मतदाताओं के नाम कटे हैं। यहां 51,071 नाम हटाए गए हैं, जबकि 2023 में इस सीट पर जीत का अंतर महज 26,396 था। यानी जीत के अंतर से दोगुने वोट कट चुके हैं। इसी तरह कांग्रेस नेता सचिन पायलट के निर्वाचन क्षेत्रटोंकमें कुल23,712 नाममतदाता सूची से हटाए गए हैं।इसी तरह मुख्यमंत्री भजनलाल के निर्वाचन क्षेत्र सांगानेर 61,674 नाम कम हुए हैं। देखा जाए तो यहां 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत का अंतर 48,081 था।
कम अंतर वाली 35 सीटों पर 'खतरे की घंटी'
एसआईआर रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की लगभग 35 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां 2023 में जीत का अंतर 3000 वोटों से भी कम था। इन संवेदनशील सीटों पर औसत 22,000 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। जीत के मार्जिन और कटे हुए वोटों का यह भारी अंतर किसी भी बड़े चुनावी उलटफेर के लिए पर्याप्त है।
सीटवार विश्लेषण का एक नमूना:
विधानसभा सीट | नाम कटे | 2023 जीत का अंतर |
हवामहल | 39,000 | 974 |
किशनपोल | 29,000 | 7,056 |
आमेर | 19,000 | 9,092 |
जोधपुर शहर | 39,459 | 13,525 |
विशेष रूप से हवामहल जैसी सीट पर, जहां जीत का अंतर 1000 से भी कम था, वहां 39 हजार नामों का कटना अगले चुनाव के पूरे गणित को बदल कर रख सकता है।
वोट बढ़ने वाली सीटों पर भाजपा का दबदबा
जहां एक ओर नाम काटने की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर नए नाम जोड़ने के मामले में भी रोचक तथ्य सामने आए हैं। सबसे अधिक नाम जोड़ने वाली टॉप 5 सीटों में से 4 सीटों-झोटवाड़ा, सांगानेर, विद्याधर नगर और फलोदी पर वर्तमान में भाजपा के प्रत्याशी काबिज हैं। निर्वाचन विभाग के सूत्रों का कहना है कि शहरीकरण और नए आवासीय क्षेत्रों के विस्तार को इन सीटों पर मतदाता बढ़ने का मुख्य कारण माना जा रहा है।
क्या होगा राजनीतिक असर
2023 के विधानसभा चुनावों में अधिकतर सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कुल वोट प्रतिशत का अंतर बहुत मामूली था। भाजपा को 41.69% और कांग्रेस को 39.55% वोट मिले थे। एसआईआर में जब 31 लाख से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं और कई सीटों पर यह संख्या जीत के अंतर से 500% तक अधिक है तो आंकड़े अगले चुनाव में नेताओं के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।
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