मेडिकल प्रैक्टिस के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, तीन डॉक्टर गिरफ्तार
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान एसओजी ने विदेश से MBBS करके आए तीन डॉक्टरों को किया गिरफ्तार।
- तीनों ने कुल 74 लाख रुपए देकर फर्जी FMGE सर्टिफिकेट खरीदे।
- फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर इंटर्नशिप की और RMC में रजिस्ट्रेशन कराया।
- जांच में 100 से ज्यादा ऐसे डॉक्टर चिह्नित किए गए हैं।
- RMC के कर्मचारी और अधिकारी भी इसमें शामिल पाए गए।
राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने विदेश (कजाकिस्तान) से MBBS करने वाले तीन डॉक्टरों को शनिवार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि तीनों डॉक्टरों ने कुल 74 लाख रुपए देकर फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया।
इस सर्टिफिकेट के आधार पर उन्होंने मेडिकल कॉलेजों से इंटर्नशिप की और राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में अपना टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन करवा लिया।
तीनों डॉक्टर कौन हैं?
एसओजी ने डॉ. दीपक यादव (28) निवासी चौमूं, डॉ. राजू गुर्जर (28) निवासी डीग और डॉ. नरेश गुर्जर (30) निवासी अलवर को गिरफ्तार किया है। फिलहाल एसओजी की टीम आरोपियों से पूछताछ में जुटी है।
इन तीनों ने कजाकिस्तान से MBBS की पढ़ाई पूरी की थी। एसओजी के अनुसार, इनके अलावा भी कई डॉक्टर इस नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।
एग्जाम में फेल हुए तो खरीदा सर्टिफिकेट
ADG (एसओजी) विशाल बंसल के अनुसार, तीनों डॉक्टरों ने FMG स्क्रीनिंग एग्जाम कई बार दिया लेकिन पास नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने फर्जी रास्ता अपनाया।
डॉ. दीपक यादव 2022 में भारत लौटा था। कजाकिस्तान में साथ पढ़ने वाले विजय सैनी के जरिए वह मास्टरमाइंड भानाराम के साले से मिला और 24 लाख रुपए में फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया। इसके बाद सरकारी मेडिकल कॉलेज दौसा से इंटर्नशिप की।
डॉ. नरेश गुर्जर 2021 में लौटा था। उसने कजाकिस्तान में साथ पढ़ने वाले इंद्रराज सैनी (दौसा) की मदद से 23 लाख रुपए में फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया। सरकारी मेडिकल कॉलेज अलवर से इंटर्नशिप की। बाद में नरेश ने अपने कई साथियों के फर्जी सर्टिफिकेट भी बनवाए।
डॉ. राजू गुर्जर भी 2021 में लौटा था। नरेश गुर्जर के जरिए इंद्रराज सैनी से संपर्क किया और 27 लाख रुपए में सर्टिफिकेट बनवाया। सरकारी मेडिकल कॉलेज हनुमानगढ़ से इंटर्नशिप की।
मास्टरमाइंड लेता था 20 से 30 लाख
आईजी (एसओजी) अजयपाल लांबा ने बताया कि इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड भानाराम माली था। वह प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपए लेकर फर्जी FMGE सर्टिफिकेट बनवाता था और RMC में रजिस्ट्रेशन भी कराता था।
मामले में अब तक विदेश से मेडिकल ग्रेजुएट 17 डॉक्टर, RMC के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, UDC अखिलेश माथुर, LDC फरहान हसन, भानाराम माली और एक दलाल को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
100 से ज्यादा डॉक्टर निशाने पर
जांच में सामने आया कि फर्जी FMGE सर्टिफिकेट के जरिए राजस्थान के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप हो रही थी। इसमें RMC के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत थी।
SOG ने अब तक ऐसे 100 से ज्यादा डॉक्टरों को चिह्नित किया है जिन्होंने फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर RMC में टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन करा लिया था।
FMGE क्यों है जरूरी?
फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE - Foreign Medical Graduate Examination) एक अनिवार्य स्क्रीनिंग परीक्षा है। जो भी भारतीय छात्र विदेश से MBBS या समकक्ष डिग्री लेकर आते हैं, उन्हें भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए यह परीक्षा पास करना जरूरी है।
बिना इस सर्टिफिकेट के राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC - National Medical Commission) या किसी भी राज्य की मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन नहीं होता। यानी बिना FMGE पास किए कोई भी विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट कानूनी तौर पर मरीजों का इलाज नहीं कर सकता।
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