14 साल से स्थायी कोच भर्ती नहीं, SMS स्टेडियम में बाहरी कोचों की एंट्री बंद; 6 महीने से बच्चों को दे रहे थे ट्रेनिंग
समझें क्या है पूरा मामला
- एसएमएस स्टेडियम में बाहरी कोच के कोचिंद देने पर रोक।
- बिना स्पोर्ट्स काउंसिल की अनुमति नहीं दे सकेंगे कोचिंग।
- अब प्रशिक्षण केंद्रों पर सिर्फ काउंसिल के कोच ही देंगे ट्रेनिंग।
- कोच और खेल अधिकारी के 225 से ज्यादा पद खाली हैं।
- 14 साल से नहीं हुई स्थायी कोच की भर्ती।
जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) स्टेडियम में बाहरी कोचों के खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने के मामले में कार्रवाई हुई है। राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल (Rajasthan Sports Council) ने एसएमएस स्टेडियम समेत प्रदेश के सभी रीजनल ट्रेनिंग सेंटर पर बाहरी कोच के ट्रेनिंग देने पर रोक लगा दी। सोमवार को खेल अधिकारी करण सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी किया। इसके मुताबिक, अब काउंसिल की अनुमति के बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति इन केंद्रों पर खिलाड़ियों को ट्रेनिंग नहीं दे सकेगा।
खेल अधिकारी करण सिंह ने आदेश में क्या लिखा?
खेल अधिकारी करण सिंह ने सोमवार को यह आदेश निकाला। आदेश में साफ लिखा है कि अब से कोई भी बाहरी व्यक्ति रीजनल ट्रेनिंग सेंटर पर बिना काउंसिल की अनुमति के कोचिंग नहीं दे सकता। आदेश में यह भी लिखा है कि बाहरी लोग आकर कोचिंग दे रहे हैं और बच्चों से पैसे भी ले रहे। अब कोचिंग सिर्फ और सिर्फ काउंसिल के कोच ही देंगे। बच्चों के पैरेंट्स को भी साथ जाने की इजाजत नहीं होगी। सवाल यह है कि यह कोचिंग इतने समय तक कैसे चलती रही?
रीजनल ट्रेनिंग सेंटर में बाहरी कोच पैसे लेकर कोचिंग दे रहे थे
बाहरी कोच करीब 6 महीने से लगातार राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल के कोच के साथ सवाई मान सिंह स्टेडियम और दूसरे प्रशिक्षण केंद्रों पर सुबह-शाम कोचिंग दे रहे थे। पिछले कुछ दिनों से कोचिंग नहीं दे रहे थे। यह साफ नहीं है कि इसकी वजह क्या थी।
सवाल है कि एसएमएस स्टेडियम में बाहर का व्यक्ति रोज आकर कोचिंग देता रहा और बच्चों से पैसे लेता रहा, तो स्पोर्ट्स काउंसिल के अधिकारियों को अब क्यों ध्यान आया। यह नहीं बताया बाहरी कोच कौन थे, कितने थे और बच्चों से कितनी फीस ली जाती थी।
राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल में 225 कोच पद खाली
राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल में खेल अधिकारी और प्रशिक्षक के 225 से ज्यादा पद खाली हैं। स्पोर्ट्स मैनेजर के 10 और असिस्टेंट स्पोर्ट्स मैनेजर के 40 पद भी खाली हैं। कोचों की आखिरी भर्ती 2012 में हुई थी। यानी राजस्थान 14 साल से कोच भर्ती नहीं हुई है। इन 14 सालों में एक भी स्थायी कोच भर्ती नहीं हुआ।
एक साल के लिए कॉन्ट्रैक्ट कोच भर्ती किए गए थे
2025 में एक साल के लिए 500 कॉन्ट्रैक्ट कोच भर्ती किए गए थे। मार्च में इनका समय पूरा हो गया। छह महीने बीतने के बाद भी कॉन्ट्रैक्ट कोच दोबारा भर्ती नहीं हुए। आचार संहिता लगने से पहले 700 कॉन्ट्रैक्ट कोचों की भर्ती के लिए करीब 15 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया है। 700 कॉन्ट्रैक्ट कोच 15 करोड़ टेंडर की अवधि, चयन प्रक्रिया या कब तक कोच मिलेंगे, यहां आचार संहिता का मतलब पंचायत चुनाव की आचार संहिता माना जा रहा है।
खाली पदों और बाहरी कोचों का क्या रिश्ता है?
सीधा आरोप नहीं है कि पद खाली होने की वजह से बाहरी कोच आए। लेकिन दोनों बातें साथ रखी गई हैं। एक तरफ 225 से ज्यादा पद खाली हैं और कॉन्ट्रैक्ट कोच भी नहीं हैं। दूसरी तरफ बाहरी कोचों के जरिए बच्चों को ट्रेनिंग मिल रही थी। अब नजर इस पर रहेगी कि बाहरी कोचों पर रोक के बाद काउंसिल के कोच बच्चों की ट्रेनिंग कैसे संभालते हैं। यह भी देखना होगा कि 700 कॉन्ट्रैक्ट कोचों का टेंडर आगे बढ़ता है या नहीं।
यह खबर क्यों जरूरी है
एसएमएस स्टेडियम (Sawai Man Singh Stadium) और रीजनल ट्रेनिंग सेंटर में सैकड़ों बच्चे खेल सीखने आते हैं। बाहरी लोग अगर काउंसिल की अनुमति के बिना पैसे लेकर कोचिंग दें, तो बच्चों की सुरक्षा और ट्रेनिंग की गुणवत्ता का सवाल उठता है। साथ ही पैरेंट्स की आवाजाही पर रोक का असर परिवारों पर भी पड़ेगा। 14 साल से कोच भर्ती न होना और खाली पद बताते हैं कि कोच की कमी कितनी बड़ी है। खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए यह मुद्दा अहम है। आदेश के बाद काउंसिल की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि बच्चों को पर्याप्त प्रशिक्षक मिलें।