टूर्नामेंट से पहले ही बन गए चैम्पियन, फर्जी सर्टिफिकेट से ली नौकरी
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान खेल कोटे में फर्जीवाड़े का खुलासा, AIU सर्टिफिकेट पर उठे सवाल।
- नौकरी पाने के लिए टूर्नामेंट से पहले ही मेडल दिखाने का आरोप।
- कई निजी विश्वविद्यालय जांच के दायरे में, जयपुर के संस्थान भी शामिल।
- शिक्षक भर्ती और कनिष्ठ लेखाकार भर्ती में मिले संदिग्ध खेल प्रमाण पत्र।
- बिना एडमिशन टूर्नामेंट खेलने और फर्जी दस्तावेजों से चयन का मामला सामने आया।
राजस्थान में खिलाड़ियों को नौकरियों में 2% कोटा मिलता है। इसी कोटे का फायदा उठाने के लिए एआईयू खेलों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। टूर्नामेंट से पहले ही मेडल दिखाकर नौकरी के आवेदन कराए गए। बाद में बिना एडमिशन के टूर्नामेंट खेलने के सर्टिफिकेट जारी हुए। जयपुर सहित कई निजी विश्वविद्यालय इस मामले में जांच के दायरे में हैं।
राजस्थान में खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरियों में 2% आरक्षण का कोटा तय है। इसी कोटे से नौकरी पाने के लिए एआईयू (AIU – Association of Indian Universities) खेलों में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किए जाने का मामला सामने आया है।
पड़ताल में यह खुलासा हुआ कि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही मेडल दिखाकर नौकरी के लिए आवेदन करा दिए गए। इसके बाद यूनिवर्सिटी में बिना एडमिशन लिए ही टूर्नामेंट खेलने के प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। इस फर्जीवाड़े में जयपुर सहित कई निजी विश्वविद्यालय रडार पर हैं।
शिक्षक भर्ती में मिले संदिग्ध मामले
प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय अध्यापक भर्ती 2022 में खेल कोटे के तहत आए आवेदनों में से 6 अभ्यर्थी ऐसे मिले, जिन्होंने खुद को एआईयू खेलों में मेडल धारक बताया। जबकि जिस टूर्नामेंट का जिक्र किया गया, वह 2023 में जयपुर के जगन्नाथ विश्वविद्यालय में हुआ था।
अंतिम चयन सूची में सौरव, तेजपाल, नारायण, विक्रम कुमार, शिवकुमार और नवीन के नाम शामिल थे। इन सभी ने रस्साकशी में मेडल जीतने का दावा किया था।
इसके अलावा इसी भर्ती में चयनित 6 अन्य अभ्यर्थी सॉफ्ट बेसबॉल के मेडल धारक बताए गए। विभाग ने जब कांगड़ा की अर्नी यूनिवर्सिटी से इसकी तस्दीक करनी चाही, तो उनका एकेडमिक रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं कराया गया।
विभाग ने माना संदिग्ध
विभाग ने इस पूरे मामले को संदिग्ध माना है। नियमों के अनुसार एआईयू खेलों में केवल नियमित छात्र ही हिस्सा ले सकता है, लेकिन इस शर्त की अनदेखी की गई प्रतीत होती है।
थोक में बांटे गए मेडल
वर्ष 2023 में जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में हुए टूर्नामेंट में रस्साकशी के पुरुष वर्ग में अकेले 270 मेडल दिए गए। वहीं 2022 में सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी में हुए टूर्नामेंट में मिनी गोल्फ में 209 मेडल बांटे गए, जबकि कुल खिलाड़ियों की संख्या केवल 348 थी।
कई मामलों में मिलीं गड़बड़ियां
पड़ताल में कई अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां मिलीं। सुभाष नाम के अभ्यर्थी ने रस्साकशी में मेडल जीता था। सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय में पीजीडीएसएम (PGDSM – Post Graduate Diploma in Sports Management) में सितंबर 2022 में दाखिला दिखाया गया। लेकिन पहले और दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा एक साथ दिसंबर 2024 में कराई गई, वह भी पहले सेमेस्टर का परिणाम आने से पहले।
मनोज तर्ड नाम के अभ्यर्थी ने क्वान-की-डो खेल में हिस्सा लेने का दावा किया। वे 2022-23 में पीजीडीएसएम के छात्र बताए गए। प्रतियोगिता फरवरी 2023 में चंडीगढ़ में हुई थी, लेकिन सहभागिता प्रमाण पत्र 2024 में मिला। रसीद पर पिता का नाम था, लेकिन वर्ष अंकित नहीं था।
सोमराज नाम के अभ्यर्थी का रस्साकशी में दाखिला 2 जनवरी 2023 का दिखाया गया, जबकि वे 14 जनवरी से ही टूर्नामेंट में खेलने लगे। खेल सहभागिता प्रमाण पत्र भी विश्वविद्यालय ने पांच महीने बाद जारी किया।
उमेश कुमार नाम के अभ्यर्थी को सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय ने 2022-23 का छात्र बताया। उनका दाखिला 12 जनवरी 2023 का था और मार्च में ही वे मिनी गोल्फ के एआईयू टूर्नामेंट में खेल गए।
प्रियांशु नाम के अभ्यर्थी ने ड्रॉप-रोबाल खेल में भागीदारी दिखाई। अगस्त 2024 में उनका परिणाम प्रतीक्षित बताया गया था, जबकि मार्कशीट में परीक्षा दिसंबर 2024 की दर्ज थी। उनका खेल प्रमाण पत्र अप्रैल 2023 का था, जबकि सहभागिता पत्र सितंबर 2024 का जारी हुआ।
अन्य भर्ती में भी मिले गड़बड़ी के मामले
कनिष्ठ लेखाकार एवं तहसील राजस्व लेखाकार संयुक्त भर्ती 2023 में भी खेल कोटे से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 13 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। नियमों के अनुसार एआईयू टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए नियमित छात्र होना अनिवार्य है।
इनमें से कई मामलों में फीस रसीद पर पिता का नाम और सेमेस्टर तक दर्ज नहीं मिला। कुछ अभ्यर्थियों के माइग्रेशन सर्टिफिकेट भी उपलब्ध नहीं थे। सुभाष, मनोज तर्ड, सुनीता, सुनील, उमेश, सुरेश गोदारा, सुरेश जांगू, राकेश, शंकर गुर्जर, प्रियांशु, सोमराज, ट्विंकल और दिनेश के दस्तावेजों का रिकॉर्ड गड़बड़ पाया गया है।
FAQ
- खेल कोटा फर्जीवाड़े का मामला क्या है?
राजस्थान में खिलाड़ियों को नौकरियों में 2% कोटा मिलता है। इसी कोटे का फायदा उठाने के लिए एआईयू खेलों में फर्जी मेडल और प्रमाण पत्रों के जरिए नौकरी हासिल की गई। पड़ताल में कई अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली है। - खेल कोटा फर्जीवाड़े में कौनसी भर्तियां प्रभावित हुई हैं?
प्राथमिक-उच्च प्राथमिक विद्यालय अध्यापक भर्ती 2022 और कनिष्ठ लेखाकार एवं तहसील राजस्व लेखाकार संयुक्त भर्ती 2023 दोनों में खेल कोटे से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं। दूसरी भर्ती में 13 अभ्यर्थियों का चयन संदेह के घेरे में है। - विश्वविद्यालयों का खेल कोटा फर्जीवाड़े पर क्या कहना है?
सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय के खेल प्रभारी अरुण माथुर ने सभी एडमिशन को सही बताया है। उनका कहना है कि रसीद मैन्युअल तरीके से कटती है, जिसमें गलती हो सकती है। विश्वविद्यालय जांच में सहयोग कर रहा है।
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