ओपन स्कूल में फर्जी मार्कशीट का मामला उजागर, संविदाकर्मी ने कर दिया बड़ा फर्जीवाड़ा

Ashish Bhardwaj | Apr 23, 2026, 12:44 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल (आरएसओएस) में अंको की हेराफेरी कर फर्जी अंकतालिका तैयार करने का बड़ा खेल उजागर हुआ है। इसमें संविदा पर कार्यरत कर्मचारी ने बड़े पैमाने पर पैसे लेकर अपने स्तर पर संशोधन कर दिए।

News In Short

  • राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल में फर्जी अंकतालिकाओं का हुआ खुलासा।
  • परीक्षार्थियों की 1107 अंकतालिकाओं में संविदाकर्मी ने कर दी हेराफेरा।
  • फेल छात्रों को कर दिया पास, बिना परीक्षा दिए छात्रों की भी बना फर्जी अंकतालिका।
  • आरोपी को सुपर एडमिन के अधिकार मिलने के बावजूद नहीं हुआ पुलिस वेरिफिकेशन।
  • इस मामले को साइबर क्राइम और ऑनलाइन फ्रॉड के तहत रखा गया।

News In Detail

राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल (आरएसओएस) में अंकतालिकाओं में फर्जीवाड़ा करने का बड़ा मामला सामने आया है। इसमें अंकतालिकाओं में हेरफेर कर फर्जी अंकतालिकाएं तैयार की गईं। यह मामला आरएसओएस के अंदर की जांच रिपोर्ट से खुलासा हुआ है। इसके अनुसार पांच साल (2021-2025) में 1107 अंकतालिकाओं में अंकों की हेराफेरा की गई। इस फर्जीवाड़े में सिर्फ अंको का ही संशोधन नहीं हुआ, बल्कि नाम और जन्मतिथि तक बदल दी गई। यह पूरा फर्जीवाड़ा एक संविदा पर कार्यरत कर्मचारी के द्वारा किया गया।



जांच में हुआ खुलासा

जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि इस फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी राकेश कुमार शर्मा था। उसे डीओआईटी (Department of Information Technology) ने सुपर एडमिन के अधिकार दे रखे थे। ये अधिकार किसी अन्य कर्मचारी के पास नहीं थे। रिपोर्ट के मुताबिक राकेश कुमार शर्मा ने न केवल फेल छात्रों को पास किया, बल्कि उन छात्रों के नाम भी अंकतालिकाओं में दर्ज किए, जिन्होंने न तो आवेदन किया था और न ही परीक्षा दी थी।



आरोपी का नहीं हुआ पुलिस वेरिफिकेशन

इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी के पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई थी। इसके बावजूद उसे इतने अहम अधिकार दिए गए थे। जिससे वह आसानी से फर्जी अंकतालिकाएं बना सकता था।



किस विभाग में कितने संशोधन किए गए?

जांच में सामने आया कि गोपनीय अनुभाग ने 928 अंकतालिकाओं में संशोधन किए, जबकि एसएसएस (SSS) अनुभाग ने 3642 मामलों में नाम, माता-पिता के नाम, और जन्मतिथि में बदलाव किया। हालांकि, इन संशोधनों का पूरा रिकॉर्ड जांच समिति को उपलब्ध नहीं कराया गया।



साइबर क्राइम और ऑनलाइन फ्रॉड में केस दर्ज

पूरे प्रकरण को साइबर क्राइम और ऑनलाइन फ्रॉड के अंतर्गत रखा गया है। एसओजी (Special Operations Group) से जांच कराने की सिफारिश भी की गई है, ताकि इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों और वित्तीय लेन-देन का पता लगाया जा सके।



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