राजस्थान के 172 शिक्षकों पर छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप, 120 मामले जांच में अटके
राजस्थान के स्कूलों में बीते 4 साल में छात्राओं से छेड़छाड़ के 172 मामले सामने आए हैं। इनमें अश्लील चैटिंग, बैड टच और पॉक्सो (POCSO – Protection of Children from Sexual Offences Act) से जुड़े आरोप शामिल हैं। शिक्षा विभाग ने अब तक 104 शिक्षकों को सस्पेंड किया है। इसके बावजूद 120 से ज्यादा मामलों की जांच अभी भी लंबित है। कई जिलों में जांच कमेटियां सालों से रिपोर्ट का इंतजार कर रही हैं।
अलवर से शुरू हुआ मामला सामने आया
पिछले दिनों अलवर में एक शिक्षक द्वारा नाबालिग छात्रा को नहाते समय ताकने का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद स्कूल के प्रिंसिपल को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया। विभाग ने जांच शुरू करने के आदेश भी जारी किए।
इससे पहले हनुमानगढ़ में एक शिक्षक स्कूली छात्रा को रात में अश्लील मैसेज भेजता पाया गया था। राजसमंद में भी एक शिक्षक पर छात्रा को भगाकर ले जाने का आरोप लगा। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। लेकिन ज्यादातर मामलों में जांच 2 से 4 साल तक सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित रह जाती है।
4 साल के आंकड़े क्या कहते हैं
विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीते 4 साल में स्कूलों में छेड़छाड़, अश्लील चैटिंग, अभद्र व्यवहार, बैड टच और पॉक्सो से जुड़े कुल 172 मामले दर्ज हुए। इनमें से 120 से अधिक शिकायतों पर अब भी कार्रवाई पेंडिंग है।
विभाग ने अब तक 104 शिक्षकों को सस्पेंड किया है। तीन शिक्षकों को एपीओ (APO – Awaiting Posting Order) किया गया। पांच शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। 15 शिक्षकों की एक से तीन वेतन वृद्धि रोकी गई हैं।
जांच के दौरान दो शिक्षक रिटायर हो चुके हैं। एक शिक्षक की मृत्यु भी हो चुकी है। वहीं 10 मामलों में जांच के बाद शिक्षकों को दोषमुक्त पाया गया, क्योंकि आरोप झूठे निकले।
जोधपुर में भी सामने आया मामला
जोधपुर में भी एक शिक्षक पर छात्रा से छेड़छाड़ का आरोप लगा था। विभाग ने नियमों के तहत जांच अधिकारी भी नियुक्त किया। लेकिन करीब दो साल बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
इस तरह की देरी सवाल खड़े करती है कि क्या जांच प्रक्रिया वाकई गंभीरता से चल रही है। अभिभावकों और शिक्षा जगत के लोगों का कहना है कि समय पर कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित छात्राओं को न्याय मिलने में देरी होती है।
जांच में देरी क्यों हो रही है
विभाग ने संबंधित मामलों में 16 सीसीटीवी आधारित जांचें भी कराई हैं। इसके बावजूद ज्यादातर मामलों में जांच पूरी होने में सालों लग रहे हैं। जांच कमेटियां बनने के बाद भी रिपोर्ट समय पर नहीं आ पाती।
विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच अधिकारियों की कमी और प्रक्रियागत देरी इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है। इससे न सिर्फ पीड़ित छात्राओं को इंसाफ मिलने में देरी होती है, बल्कि दोषी शिक्षकों को भी लंबे समय तक कार्यरत रहने का मौका मिल जाता है।
FAQ
- राजस्थान में कितने शिक्षकों पर छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं?
बीते 4 साल में 172 शिक्षकों पर छेड़छाड़ और अश्लील व्यवहार के आरोप लगे हैं। इनमें से 104 को सस्पेंड किया जा चुका है। 120 से ज्यादा मामलों की जांच अब भी पेंडिंग है। - कितने शिक्षकों को नौकरी से निकाला गया?
विभाग ने अब तक 5 शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त किया है। तीन शिक्षकों को एपीओ किया गया है। 15 शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोकी गई है। - कितने मामलों में शिक्षक दोषमुक्त पाए गए?
जांच में 10 शिक्षकों को दोषमुक्त पाया गया, क्योंकि उनके खिलाफ आरोप झूठे साबित हुए। बाकी मामलों में जांच अभी जारी है।
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छात्राओं से छेड़छाड़ मामला