राजस्थान के टोल प्लाजा पर वजन की जांच में बड़ा खुलासा, 79 धर्मकांटे बिना सत्यापन मिले, वाहन चालकों से वसूली पर सवाल
राजस्थान के टोल प्लाजा पर भारी वाहन चालकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश में वजन मापने वाले 380 धर्मकांटों की जांच हुई तो 79 बिना वैध सत्यापन के चलते मिले। जांचे गए हर पांच में से लगभग एक कांटे का जरूरी सत्यापन नहीं हुआ था।
इन कांटों से ट्रकों और दूसरे व्यावसायिक वाहनों का वजन मापा जा रहा था। इनमें टोल प्लाजा पर लगे कांटे भी शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन मशीनों के वजन की शुद्धता की वैध पुष्टि ही नहीं थी, उनसे दर्ज वजन के आधार पर वाहन चालकों से कितना अतिरिक्त शुल्क वसूला गया होगा?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र सरकार ने इसी साल अप्रैल में ओवरलोड वाहनों से शुल्क वसूलने के नियम बदले थे। इन नियमों में वजन मापने की प्रमाणित व्यवस्था को महत्व दिया गया है।
दो दिन में 380 कांटों की जांच, 79 मिले बिना सत्यापन
राजस्थान के उपभोक्ता मामले विभाग के विधिक माप विज्ञान प्रकोष्ठ ने विशेष अभियान चलाया। इस दौरान 380 धर्मकांटों की जांच की गई। इनमें 79 धर्मकांटे बिना वैध सत्यापन के संचालित मिले। विभाग ने कार्रवाई करते हुए इन कांटों को जब्त किया और प्रदेशभर में कुल 10 लाख 95 हजार रुपए का जुर्माना लगाया।
जांच के आंकड़ों के अनुसार करीब 20.8 प्रतिशत धर्मकांटे नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि धर्मकांटे केवल टोल प्लाजा तक सीमित नहीं हैं। ट्रांसपोर्ट कारोबार, मालभाड़े और सामान की खरीद-बिक्री में भी वजन का उपयोग होता है।
यदि किसी कांटे की माप सही नहीं है तो उसका असर केवल ट्रक चालक पर नहीं, बल्कि माल भेजने वाले व्यापारी और सामान खरीदने वाले व्यक्ति तक पहुंच सकता है।
भांडारेज टोल प्लाजा पर 16 कांटे जब्त
इस अभियान में सबसे बड़ी कार्रवाई दौसा जिले के भांडारेज टोल प्लाजा पर हुई। जयपुर-आगरा हाईवे स्थित इस टोल प्लाजा पर बिना वैध सत्यापन के संचालित 16 धर्मकांटे जब्त किए गए।
इसके अलावा जालोर में भारतमाला एक्सप्रेस-वे के सांगाणा टोल प्लाजा, अलवर के NH-248A स्थित बहला टोल प्लाजा और चूरू के रतनगढ़ क्षेत्र में NH-11 स्थित टिडियासर टोल प्लाजा पर भी धर्मकांटों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इन स्थानों पर बड़ी संख्या में भारी वाहन गुजरते हैं। ऐसे में बिना वैध सत्यापन वाले कांटों का उपयोग कब से हो रहा था और इनसे कितने वाहनों का वजन मापा गया, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है।
अप्रैल में बदले थे नियम, ओवरलोडिंग पर चार गुना तक शुल्क
केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 13 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों में बदलाव की अधिसूचना जारी की थी। नए नियम 15 अप्रैल से लागू हुए। इनके अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों पर तय सीमा से अधिक वजन लेकर चलने वाले वाहनों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था बनाई गई है।
समझें, ओवरलोडिंग पर कितना शुल्क लग सकता है
- तय अधिकतम वजन से 10 प्रतिशत तक अधिक भार होने पर ओवरलोड शुल्क नहीं।
- 10 प्रतिशत से अधिक और 40 प्रतिशत तक अतिरिक्त भार होने पर आधार टोल दर का दो गुना शुल्क।
- 40 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त भार होने पर आधार टोल दर का चार गुना शुल्क।
टोल प्लाजा की निगरानी पर भी उठे सवाल
टोल प्लाजा पर धर्मकांटे लगाना और उनका संचालन करना अलग बात है, लेकिन इनका वैध सत्यापन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। इसलिए सवाल केवल कांटे संचालित करने वाली एजेंसी से नहीं, बल्कि टोल संचालन की निगरानी करने वाले अधिकारियों से भी है।
भांडारेज जैसे टोल प्लाजा पर एक साथ 16 कांटे बिना वैध सत्यापन के मिले तो यह जानना जरूरी है कि उनकी आखिरी जांच कब हुई थी। क्या टोल संचालन एजेंसी ने समय पर सत्यापन कराया था? क्या संबंधित विभाग के पास इन कांटों का रिकॉर्ड था? सत्यापन की अवधि खत्म होने के बाद भी मशीनें कैसे संचालित होती रहीं?
गलत वजन का असर मालभाड़े और सामान की कीमत पर भी
ट्रांसपोर्ट कारोबार में वजन का सीधा संबंध खर्च से है। किसी वाहन पर अतिरिक्त टोल शुल्क लगता है तो उसका आर्थिक बोझ वाहन मालिक या ट्रांसपोर्ट कंपनी पर पड़ता है।
कारोबार में यह खर्च मालभाड़े में जुड़ सकता है। मालभाड़ा बढ़ने पर सामान की कुल लागत भी प्रभावित हो सकती है। गलत वजन की संभावना को गंभीरता से लेना जरूरी है क्योंकि इससे ट्रांसपोर्ट कारोबार में भुगतान संबंधी विवाद पैदा हो सकते हैं।
विभाग ने क्या कहा?
विधिक माप विज्ञान विभाग के डिप्टी कंट्रोलर आलोक जारवाल के अनुसार, जयपुर-आगरा हाईवे के भांडारेज टोल प्लाजा पर 16 धर्मकांटे बिना वैध सत्यापन के संचालित पाए गए। विभाग का कहना है कि बिना वैध सत्यापन वाले कांटे की माप की शुद्धता सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती।
यदि किसी वाहन का वजन वास्तविक वजन से अधिक दर्ज हो जाए तो उससे अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने की आशंका रहती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि धर्मकांटों का नियमानुसार सत्यापन जरूरी है। बिना वैध सत्यापन के मशीनों का उपयोग करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।