विधायक जी का फरमान: ट्रांसफर के लिए नो-फोन, नो-व्हाट्सएप

Ashish Bhardwaj | Jun 20, 2026, 18:13 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में ट्रांसफर से बैन हटते ही एक भाजपा विधायक का रोचक मामला सामने आया है। विधायक ने बाकायदा डिजिटल नोटिस जारी कर कहा है कि उन्हें ट्रांसफर के लिए फोन नहीं किया जाए।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • राजस्थान में ट्रांसफर से बैन हटते ही विधायकों के यहां जमने लगी भीड़।
  • रामगढ़ विधायक ने इस भीड़ से बचने के लिए जारी किया अनोखा फरमान।
  • विधायक की अपील, ट्रांसफर के लिए उन्हें कोई फोन नहीं किया जाए।
  • फरमान के अनुसार ट्रांसफर आवेदन सिर्फ विधायक कार्यालय में ही होंगे जमा।
  • यह भी कहा गया कि ट्रांसफर आवेदन व्हाट्सएप पर मान्य नहीं होंगे।

राजस्थान में तबादलों से बैन हटते ही प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सरकारी विभागों में अपनी मनपसंद जगह पोस्टिंग पाने के लिए कर्मचारियों ने दौड़-भाग शुरू कर दी है। इसके लिए वे क्षेत्रीय विधायक से सिफारिश कराने की जुगाड़ में लग गए हैं।



इसी बीच अलवर जिले के रामगढ़ से भाजपा विधायक सुखवंत सिंह का एक अनोखा फरमान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। विधायक ने साफ शब्दों में कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों से कहा है कि ट्रांसफर के सिलसिले में उन्हें कोई फोन या व्हाट्सएप मैसेज न करें।



​19 जून से हटा बैन, 5 जुलाई तक होंगे तबादले

राजस्थान सरकार ने 19 जून 2026 से ट्रांसफर पर लगी रोक हटा दी है। इस फैसले के बाद प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से अपने गृह जिले या मनपसंद स्थान पर जाने का इंतजार कर रहे थे। सरकार के आदेश के मुताबिक यह ट्रांसफर प्रक्रिया 5 जुलाई 2026 तक चलेगी। समयसीमा बेहद कम होने के कारण अब सिफारिशों का दौर चरम पर पहुंच गया है।



​विधायक के चक्कर काट रहे कर्मचारी

तबादलों से रोक हटते ही रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के इच्छुक सरकारी कर्मचारी अब सिफारिशों के लिए विधायक सुखवंत सिंह और उनके खास कार्यकर्ताओं के चक्कर काटने लगे हैं। सुबह से ही विधायक कार्यालय पर कर्मचारियों का जमावड़ा देखा गया।



​इस बढ़ती भीड़ और फोन की घंटियों से परेशान होकर विधायक सुखवंत सिंह ने कार्यकर्ताओं और आम जनता के लिए सोशल मीडिया (व्हाट्सएप) पर एक सार्वजनिक सूचना जारी कर दी है।





MLA का आदेश


​जानें क्या है विधायक का सख्त निर्देश

​विधायक की ओर से जारी इस डिजिटल नोटिस में साफ कहा गया है कि ट्रांसफर से संबंधित किसी भी जानकारी या पैरवी के लिए कोई भी व्यक्ति बार-बार फोन कॉल या व्हाट्सएप संपर्क न करे।



विधायक सुखवंत ने इस नोटिस में कहा कि ट्रांसफर के इच्छुक लोगों से आवेदन केवल हार्ड कॉपी में ही कार्यालय में स्वीकार किए जाएंगे। डिजिटल माध्यम (व्हाट्सएप या ईमेल) से भेजे गए आवेदन सीधे कूड़ेदान में जाएंगे।



इच्छुक कार्मिक 20 जून से 26 जून 2026 तक रामगढ़ कार्यालय में अपनी एप्लीकेशन जमा करवा सकते हैं। 26 जून के बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं होगा।



जिन कर्मचारियों ने पहले कभी ट्रांसफर के लिए अर्जी दी थी, उन्हें भी 26 जून तक दोबारा नई एप्लीकेशन जमा करानी होगी।



​थर्ड ग्रेड शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों को बड़ा झटका

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा झटका शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को लगा है। विधायक द्वारा जारी सूचना में यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया है कि ग्रेड थर्ड शिक्षक और स्वास्थ्य विभाग (मेडिकल स्टाफ) के समस्त कार्मिकों पर वर्तमान में स्थानांतरण संबंधी प्रतिबंध यथावत लागू है। इसलिए इन श्रेणियों के कर्मचारी कार्यालय आकर अपना समय नष्ट न करें और न ही कोई आवेदन प्रस्तुत करें।



​राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय

विधायक सुखवंत सिंह का यह 'नो-फोन, नो-व्हाट्सएप' फॉर्मूला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि विधायक ने ऐसा इसलिए किया है ताकि तबादलों के इस दौर में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या बिचौलियों के हस्तक्षेप को रोका जा सके और केवल जायज मामलों पर ही विचार किया जा सके। अब देखना यह है कि 5 जुलाई तक चलने वाले इस 'तबादला एक्सप्रेस' में रामगढ़ के कितने कर्मचारियों को मनचाही मंजिल मिल पाती है।



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