आदिवासी स्कूलों की बदहाली पर CJP का अभियान, उदयपुर संभाग से होगी शुरुआत
समझें क्या है पूरा मामला
- दीवार पर आजादी का संदेश, स्कूल में पढ़ाई का इंतजार
- 70 बच्चों पर एक शिक्षक, जर्जर भवन में शिक्षा
- आदिवासी स्कूलों की हालत सामने लाएगा नया अभियान
- स्कूल ठीक करो कैंपेन अब आदिवासी इलाकों तक
- सरकारी दावों के बीच स्कूलों की जमीनी तस्वीर
राजस्थान के आदिवासी इलाकों में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर एक नया अभियान शुरू करने का ऐलान किया गया है। CJP के नेशनल कन्वीनर आशुतोष रांका ने जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 'आदिवासी स्कूल ठीक करो कैंपेन' की जानकारी दी। अभियान के तहत आदिवासी बहुल क्षेत्रों के स्कूलों का दौरा कर उनकी जमीनी स्थिति का डॉक्यूमेंटेशन किया जाएगा।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब उदयपुर जिले के खेरवाड़ा क्षेत्र स्थित डेमत के राजकीय प्राथमिक आदिवासी स्कूल की बदहाल स्थिति का मामला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल में एक महीने से पढ़ाई नहीं होने का दावा किया गया है। भवन जर्जर है, करीब 70 बच्चों के लिए एक शिक्षक है और दो कक्षाओं की हालत खराब बताई जा रही है।
हालांकि, स्कूल में पढ़ाई बंद रहने की अवधि, भवन की वास्तविक सुरक्षा स्थिति और शिक्षकों की तैनाती की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड से करना जरूरी है।
डेमत स्कूल की हालत पर उठे सवाल
उदयपुर के खेरवाड़ा क्षेत्र में स्थित डेमत के राजकीय प्राथमिक आदिवासी स्कूल की इमारत को लेकर चिंता जताई गई है। सामने आई जानकारी में बताया गया है कि स्कूल की दीवार पर 15 अगस्त का स्वतंत्रता दिवस संदेश अब भी लिखा हुआ है, जबकि एक महीने से पढ़ाई नहीं होने का दावा है।
स्कूल में करीब 70 बच्चों के लिए एक शिक्षक होने की बात सामने आई है। दो कक्षाओं की स्थिति जर्जर बताई गई है। इसके अलावा आंगनबाड़ी कमरे के भी कमजोर होने और कभी भी गिरने का खतरा होने का दावा किया गया है।
स्कूल के शौचालय की स्थिति भी खराब बताई गई है। यदि ये दावे सही पाए जाते हैं, तो बच्चों की सुरक्षा, नियमित पढ़ाई और मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर तत्काल निरीक्षण की जरूरत होगी।
CJP ने आदिवासी स्कूलों के लिए क्या ऐलान किया?
CJP के नेशनल कन्वीनर आशुतोष रांका ने बताया कि संगठन 'स्कूल ठीक करो कैंपेन' के दूसरे चरण में आदिवासी स्कूलों पर फोकस करेगा। अभियान की शुरुआत उदयपुर संभाग से करने की बात कही गई है।
रांका के अनुसार, टीम उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, झालावाड़, सिरोही और बारां-अंता सहित आदिवासी आबादी वाले क्षेत्रों में स्कूलों का दौरा करेगी। वहां स्कूलों की स्थिति का दस्तावेजीकरण किया जाएगा।
उन्होंने आगे इस अभियान को गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर राज्यों तक ले जाने की योजना बताई।
अब तक कितने स्कूलों का ऑडिट करने का दावा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रांका ने दावा किया कि CJP ने करीब एक महीने पहले 'स्कूल ठीक करो कैंपेन' शुरू किया था। उनके अनुसार, देशभर में 15 हजार से ज्यादा स्कूलों का ऑडिट किया जा चुका है, जबकि राजस्थान में 500 से ज्यादा स्कूलों की ऑडिटिंग हुई है।
इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें संगठन के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अभियान का अगला चरण आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों पर केंद्रित होगा, जहां शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसी सुविधाओं की स्थिति भी सामने लाने की बात कही गई है।
स्कूल भवनों की सुरक्षा पर जोर
रांका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में झालावाड़ में जुलाई 2025 में स्कूल भवन गिरने की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्कूलों में हादसा होने का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए और बच्चों के लिए सुरक्षित इमारतें पहले से उपलब्ध होनी चाहिए।
इस संदर्भ में डेमत स्कूल की जर्जर इमारत का मामला भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, डेमत भवन की संरचनात्मक स्थिति और संभावित खतरे का वास्तविक आकलन संबंधित विभाग या विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
ग्रामीणों के साथ काम करने की बात
CJP ने अभियान में स्थानीय लोगों के सहयोग की उम्मीद जताई है। रांका के अनुसार, संगठन गांव वालों के साथ मिलकर स्कूल और कॉलेज से जुड़े मुद्दे उठाएगा।
इस पहल के तहत स्कूलों की स्थिति को सामने लाने और मूलभूत सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाने की बात कही गई है।
शिक्षा विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल
डेमत स्कूल की स्थिति से जुड़े दावों की पुष्टि होने पर कुछ सवालों के जवाब जरूरी होंगे:
क्या स्कूल में नियमित पढ़ाई हो रही है?
भवन की सुरक्षा जांच कब हुई?
70 बच्चों के लिए कितने शिक्षक स्वीकृत हैं?
जर्जर कमरों और शौचालय की मरम्मत कब होगी?
आंगनबाड़ी कमरे की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं?
इन सवालों पर शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन का पक्ष लेना जरूरी है।
आदिवासी बच्चों की शिक्षा पर ध्यान जरूरी
आदिवासी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में सुरक्षित भवन, पर्याप्त शिक्षक और जरूरी सुविधाएं बच्चों की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। डेमत स्कूल के मामले में सामने आए दावों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
वहीं, CJP के अभियान के जरिए आदिवासी स्कूलों की जमीनी स्थिति का डॉक्यूमेंटेशन करने की योजना सामने आई है। अब देखना होगा कि अभियान के दौरान सामने आने वाली समस्याओं पर संबंधित विभाग और प्रशासन क्या कार्रवाई करते हैं।
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