राजस्थान के दो शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार, जानिए दोनों की उपलब्धि
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान के 2 शिक्षकों को नेशनल टीचर्स अवॉर्ड।
- शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी सम्मानित।
- दिव्येंदु सेन और डॉ. वर्तिका गुलाटी होंगे सम्मानित।
- पेड़ों पर QR कोड, गूगल मीट से पढ़ाना, नई पहचान।
- झालावाड़ के 7 बच्चों की याद में अंतरिक्ष में अमर होगा नाम।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शिक्षक दिवस के अवसर पर राजस्थान के दो शिक्षकों को नेशनल टीचर्स अवॉर्ड से सम्मानित करेंगीं। यह सम्मान उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल इनोवेशन और अनोखे प्रयोगों के लिए दिया जाएगा।
झालावाड़ के दिव्येंदु सेन ने बच्चों के साथ 12 क्षुद्र ग्रह खोजे। जयपुर की डॉ. वर्तिका गुलाटी ने डिजिटल माध्यमों से पढ़ाने के नए तरीके अपनाए। दोनों को शिक्षा में डिजिटल इनोवेशन के लिए यह पुरस्कार दिया गया।
दिव्येंदु सेन: जिन्होंने अंतरिक्ष तक पहुंचाया
दिव्येंदु सेन ने बच्चों को एस्ट्रोनॉमी से जुड़ा सॉफ्टवेयर चलाना सिखाया। उन्होंने बच्चों के साथ मिलकर 12 नए क्षुद्र ग्रहों (खगोलीय पिंड) की खोज की। इनमें से 4 ने सूर्य की परिक्रमा कर ली है।
अब वे इन्हें नाम देने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने पिपलोदी स्कूल हादसे में मारे गए 7 बच्चों की याद में एक क्षुद्र ग्रह का नाम प्रमिश्का रखने का फैसला किया है।
पेड़ों पर QR कोड, एक क्लिक में मिलेगी जानकारी
दिव्येंदु सेन ने अपने स्कूल में ट्री टॉक की शुरुआत की। स्कूल परिसर के 500 पेड़ों पर QR कोड लगाए गए हैं। इन कोडों को स्कैन करते ही पेड़ का वैज्ञानिक नाम, औषधीय महत्व और पारिस्थितिक उपयोग की जानकारी सुनाई देती है। इसमें बच्चों से लेकर कलेक्टर और एसडीएम तक ने हाड़ौती और मालवी बोलियों में आवाज दी है।
डॉ. वर्तिका गुलाटी: डिजिटल शिक्षा की प्रणेता
डॉ. वर्तिका गुलाटी ने बच्चों को पढ़ाने के लिए कई नए तरीके अपनाए। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने बच्चों को गूगल मीट पर पढ़ाया।
उन्होंने गूगल फॉर्म का उपयोग करके लगातार उनका आकलन और मूल्यांकन किया। विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए उन्होंने ऑडियो बुक, कॉमिक बुक और वीडियो कंटेंट बनाया।
दोनों टीचरों के अन्य प्रयास
दिव्येंदु सेन को 2021 में राज्यस्तरीय पुरस्कार मिल चुका है। उन्होंने गूगल सर्टिफाइड एजुकेटर की परीक्षा पहले ही प्रयास में पास की है। उन्हें हाड़ौती गौरव शिक्षक पुरस्कार, रिलायंस फाउंडेशन का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार और पर्यावरण पद्म पुरस्कार भी मिल चुका है।
डॉ. वर्तिका ने दीक्षा, पीएम ई-विद्या, चैनल सामग्री, एबीएल किट, प्ले-वे विधि, विज्ञान मेला, मैथ्स लैब, यूट्यूब, पॉडकास्ट और रेडियो (आकाशवाणी) जैसे माध्यमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शिक्षा में नवाचार की मिसाल
दोनों शिक्षकों ने साबित किया है कि पढ़ाने के तरीके में नवाचार से बच्चों की सीखने की रुचि बढ़ाई जा सकती है। उनके प्रयासों ने न सिर्फ बच्चों का जीवन बदला है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र को एक नई दिशा दिखाई है। राष्ट्रीय पुरस्कार इन प्रयासों की सार्थकता को दर्शाता है।
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