किसानों की खाद फैक्ट्रियों में पहुंची तो अधिकारियों पर भी कार्रवाई, राजस्थान में यूरिया-DAP की कालाबाजारी रोकने के सख्त निर्देश
राजस्थान में किसानों को मिलने वाली सब्सिडी की खाद अगर फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होती मिली तो अब केवल कारोबारी ही नहीं, कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले कृषि अधिकारी भी जवाबदेही के दायरे में आएंगे। रबी बुवाई के बीच यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और औद्योगिक उपयोग रोकने के लिए कृषि आयुक्तालय ने 4 नवंबर को प्रदेशभर में सख्त निर्देश जारी किए हैं। सबसे अहम बदलाव यह है कि यूरिया इस्तेमाल करने वाली औद्योगिक इकाइयों को हर महीने अपनी खरीद और उत्पादन का हिसाब विभाग को देना होगा।
एक बोरी यूरिया पर 2700 रुपए तक सब्सिडी
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार केंद्र सरकार किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराने के लिए यूरिया के प्रति बैग पर लगभग 2,700 रुपए और डीएपी के प्रति बैग पर लगभग 3,500 रुपए तक की सब्सिडी देती है। सरकार यह रकम इसलिए खर्च करती है ताकि किसानों को खेती के लिए जरूरी उर्वरक कम कीमत पर मिल सकें।
लेकिन अनुदानित खाद कृषि उपयोग के बजाय औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचती है तो सरकारी सहायता का उद्देश्य प्रभावित होता है। इसी आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने उर्वरक निर्माता कंपनियों, थोक और खुदरा विक्रेताओं के साथ औद्योगिक इकाइयों को भी नियमों की पालना के निर्देश दिए हैं।
प्लाईवुड और रेजिन फैक्ट्रियों को देना होगा खरीद का हिसाब
नए निर्देशों में औद्योगिक इकाइयों की निगरानी पर विशेष जोर दिया गया है। प्लाईवुड, रेजिन, पशु आहार और अन्य गैर-कृषि कार्यों में यूरिया इस्तेमाल करने वाली इकाइयों को हर महीने गैर-अनुदानित यूरिया की खरीद और संबंधित उत्पादन का विवरण कृषि विभाग को देना होगा। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि उद्योगों में इस्तेमाल हो रहा यूरिया अधिकृत गैर-अनुदानित स्रोत से खरीदा गया है या नहीं।
यहां बड़ा सवाल यह भी है कि विभाग औद्योगिक इकाइयों की ओर से दिए जाने वाले खरीद रिकॉर्ड का मिलान किस आधार पर करेगा। केवल कंपनियों से विवरण लेने के बजाय सप्लाई और स्टॉक की जांच भी जरूरी होगी।
खाद की कालाबाजारी पर सात साल तक की सजा का प्रावधान
कृषि आयुक्तालय ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों से संबंधित लागू नियंत्रण आदेशों के उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई हो सकती है।अधिनियम की धारा 7 के तहत उल्लंघन की प्रकृति के अनुसार कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। कुछ मामलों में सजा सात वर्ष तक हो सकती है। धारा 10 के तहत कंपनियों से जुड़े जिम्मेदार व्यक्तियों पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इसके अलावा अवैध परिवहन में इस्तेमाल वाहनों को लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार जब्त किया जा सकता है। हालांकि हर प्रकार की अनियमितता में एक जैसी सजा लागू नहीं होती। यह संबंधित नियंत्रण आदेश के उल्लंघन और मामले की कानूनी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
कार्रवाई नहीं करने वाले कृषि अधिकारियों की भी जिम्मेदारी
सरकार के निर्देशों में कृषि अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही का प्रावधान महत्वपूर्ण है। यदि किसी क्षेत्र में अनुदानित खाद की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, निर्धारित कीमत से अधिक वसूली या गैर-कृषि उपयोग की शिकायत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी होगी।
शिकायत या अनियमितता की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने पर संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। इससे उर्वरक विक्रेताओं और औद्योगिक इकाइयों की जांच के साथ विभागीय निगरानी व्यवस्था भी जवाबदेही के दायरे में आएगी।
कालाबाजारी की सूचना देने पर मिलेगा नकद इनाम
सरकार ने खाद की कालाबाजारी और अवैध परिवहन की सूचना जुटाने के लिए मुखबिर योजना का भी उल्लेख किया है। इसके तहत प्रमाणिक सूचना देने वाले व्यक्ति को निर्धारित नियमों के अनुसार नकद प्रोत्साहन दिया जा सकेगा। योजना का उद्देश्य खाद की जमाखोरी, अवैध परिवहन और किसानों के लिए निर्धारित उर्वरक को दूसरे कामों में इस्तेमाल करने की जानकारी विभाग तक पहुंचाना है।
रबी बुवाई के बीच क्यों अहम है यह फैसला?
राजस्थान में रबी सीजन के दौरान गेहूं, सरसों और दूसरी फसलों के लिए उर्वरकों की मांग बढ़ती है। ऐसे समय में किसानों को जरूरत के अनुसार यूरिया और डीएपी मिलना जरूरी है। यदि अनुदानित खाद की आपूर्ति कृषि क्षेत्र से हटकर गैर-कृषि उपयोग में जाती है तो वितरण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है।
इसीलिए कृषि विभाग ने खाद कंपनियों, विक्रेताओं, औद्योगिक इकाइयों और संबंधित अधिकारियों को निर्देशों की तत्काल पालना सुनिश्चित करने को कहा है। अब इन निर्देशों का वास्तविक असर इस बात से पता चलेगा कि विभाग कितनी औद्योगिक इकाइयों के रिकॉर्ड की जांच करता है, कितनी अनियमितताएं पकड़ में आती हैं और कितने मामलों में कार्रवाई होती है।
पड़ताल में मिला पुराना रिकॉर्ड
पुरानी कार्रवाई का रिकॉर्ड भी मिला है। अप्रैल 2026 में कृषि आयुक्त के नेतृत्व में जयपुर के कालाडेरा औद्योगिक क्षेत्र की प्लाईवुड इकाइयों पर यूरिया के संभावित दुरुपयोग को लेकर छापेमारी की गई थी। उस अभियान में प्रदेशभर के 437 उर्वरक विक्रेताओं को नोटिस दिए जाने की जानकारी भी प्रकाशित हुई थी।
इसके अलावा अक्टूबर में सरकार ने बताया था कि वर्ष 2026-27 के दौरान 11,770 उर्वरक विक्रेताओं का निरीक्षण किया गया, 1,238 फर्मों को नोटिस दिए गए, 128 फर्मों के प्राधिकरण प्रमाणपत्र निलंबित या निरस्त किए गए और 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई।