राजस्थान में 5500 की रसीद पर 15500 रुपए वसूली का आरोप, खाचरियावास बोले- भजनलाल सरकार में खुली लूट

Raghvendra Singh Rathore | Oct 20, 2026, 17:53 IST
5500 की रसीद पर 15500 वसूली का आरोप, खाचरियावास ने उठाए सवाल
राजस्थान में व्यावसायिक वाहनों में लगने वाली VLTD की कीमत को लेकर विवाद बढ़ गया है। पूर्व परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने द सूत्र से बातचीत में 5500 रुपए की रसीद पर 15500 रुपए वसूलने का आरोप लगाया। उन्होंने 800 से 1000 करोड़ की कथित अनियमितता की जांच मांगी। परिवहन आयुक्त से संपर्क किया गया, लेकिन जवाब नहीं मिला।

राजस्थान में व्यावसायिक वाहनों में लगने वाली व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) की कीमत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि जिस डिवाइस की रसीद 5500 रुपए की दी जा रही है, उसके लिए वाहन मालिकों से 15500 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। यानी एक डिवाइस पर 10 हजार रुपए अतिरिक्त लेने का आरोप है।



पूर्व परिवहन मंत्री और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने इसे अवैध वसूली बताते हुए भजनलाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में VLTD लगाने की व्यवस्था में 800 से 1000 करोड़ रुपए तक की अनियमितता हो सकती है।



द सूत्र से बातचीत में खाचरियावास ने एक बार फिर आरोप लगाया कि वाहन मालिकों को मजबूर कर उनसे अतिरिक्त पैसे लिए जा रहे हैं। हालांकि, कथित अवैध वसूली और अनियमितता की रकम की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।



खाचरियावास बोले- सरकार में सब ऐसे ही चल रहा है

पूर्व परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने द सूत्र से बातचीत में कहा कि व्यावसायिक वाहनों में लगने वाली लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस के नाम पर वाहन मालिकों से जबरन 10 हजार रुपए अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं।



उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी तरह अवैध वसूली है। प्रदेश की भजनलाल सरकार में लोगों से इसी तरह पैसे लिए जा रहे हैं।



खाचरियावास ने कहा कि जब डिवाइस की कीमत कम है तो वाहन मालिकों से हजारों रुपए अतिरिक्त क्यों लिए जा रहे हैं? उन्होंने सरकार से पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की।



उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था से वाहन मालिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, लेकिन सरकार उनकी परेशानी पर ध्यान नहीं दे रही है।



5500 की रसीद, बाकी 10 हजार रुपए किस बात के?

इस विवाद में सबसे बड़ा सवाल डिवाइस की वास्तविक कीमत और वाहन मालिकों से लिए जाने वाले शुल्क का है। खाचरियावास का आरोप है कि वाहन मालिकों को 5500 रुपए की रसीद दी जा रही है, जबकि उनसे 15500 रुपए तक लिए जा रहे हैं।



यदि ऐसा हो रहा है तो बाकी 10 हजार रुपए किस मद में वसूले जा रहे हैं? क्या इसमें डिवाइस लगाने, सिम कार्ड, डेटा सेवा और रखरखाव का शुल्क शामिल है या कोई दूसरी राशि ली जा रही है?



क्या सरकार ने VLTD की अधिकतम कीमत तय की है? यदि कोई अधिकृत वेंडर तय शुल्क से ज्यादा पैसे लेता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की क्या व्यवस्था है?



1000 करोड़ की कथित अनियमितता का आरोप

खाचरियावास ने दावा किया कि राजस्थान में 16 लाख से अधिक व्यावसायिक वाहन हैं। उन्होंने VLTD की कीमतों में कथित गड़बड़ी को लेकर 800 से 1000 करोड़ रुपए तक की अनियमितता होने का आरोप लगाया है।



हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रदेश में कितने वाहनों के लिए VLTD लगवाना अनिवार्य है और कितने वाहनों में नए डिवाइस लगाए गए हैं। यह भी सामने नहीं आया है कि कितने वाहन मालिकों से कथित तौर पर अतिरिक्त पैसे लिए गए।



ऐसे में 800 से 1000 करोड़ रुपए की अनियमितता का दावा फिलहाल राजनीतिक आरोप है। इसकी पुष्टि के लिए परिवहन विभाग के रिकॉर्ड, वेंडरों के बिल और वाहन मालिकों के भुगतान की जांच जरूरी है।



डिवाइस नहीं लगवाई तो फिटनेस में परेशानी

VLTD का उद्देश्य व्यावसायिक वाहनों की लोकेशन पर नजर रखना और आपात स्थिति में यात्रियों को मदद उपलब्ध कराना है। केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत संबंधित श्रेणी के सार्वजनिक परिवहन वाहनों में लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी बटन लगाने का प्रावधान है।



राजस्थान में भी परिवहन विभाग ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए आदेश जारी किए हैं। ऐसे में जिन वाहनों पर यह नियम लागू होता है, उनके मालिकों को डिवाइस लगवानी पड़ती है। नियमों का पालन नहीं होने पर वाहन की फिटनेस और दूसरी विभागीय प्रक्रियाओं में परेशानी आ सकती है।



इसी अनिवार्यता के बीच डिवाइस की कीमत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।



वेंडरों की निगरानी कौन करता है?

राजस्थान परिवहन विभाग की व्यवस्था के तहत अधिकृत वेंडर और डीलर वाहनों में VLTD लगाते हैं। अब सवाल यह है कि विभाग इन कंपनियों की कीमतों और वसूली की निगरानी किस तरह करता है।



क्या वाहन मालिक किसी भी अधिकृत कंपनी से डिवाइस लगवा सकता है? क्या वेंडरों को डिवाइस और दूसरे शुल्क की अलग-अलग रसीद देना जरूरी है? यदि किसी वाहन मालिक से ज्यादा पैसे लिए जाते हैं तो वह शिकायत कहां दर्ज कराएगा? क्या विभाग ऐसी शिकायतों पर वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई करता है?



परिवहन आयुक्त से संपर्क किया, नहीं मिला जवाब

VLTD की कीमत और कथित अवैध वसूली के आरोपों पर परिवहन विभाग का पक्ष जानने के लिए द सूत्र ने परिवहन आयुक्त से संपर्क करने की कोशिश की। हालांकि, खबर तैयार किए जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।



इस कारण अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि विभाग ने डिवाइस की कोई अधिकतम कीमत तय की है या नहीं। अतिरिक्त वसूली की शिकायतों पर विभाग ने क्या कार्रवाई की है, इसकी जानकारी भी नहीं मिल सकी।



वाहन मालिकों की जेब पर बोझ, सरकार से जवाब का इंतजार

VLTD लगाने का मकसद यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना है। लेकिन किसी जरूरी उपकरण की कीमत और उससे जुड़े शुल्क की जानकारी साफ नहीं होने पर वाहन मालिकों को परेशानी हो सकती है।



खासकर बस, टैक्सी और दूसरे व्यावसायिक वाहन चलाने वाले लोगों के लिए हजारों रुपए का अतिरिक्त खर्च बड़ा आर्थिक बोझ बन सकता है। अब परिवहन विभाग के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि वह डिवाइस की कीमत, अधिकृत वेंडरों की सूची और वाहन मालिकों से वसूले जाने वाले सभी शुल्क का हिसाब सार्वजनिक करेगा या नहीं।



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