1520 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षकों का कार्यकाल 3 माह बढ़ा, शिक्षा परिषद ने जारी किए आदेश

Ashish Bhardwaj | Mar 31, 2026, 16:07 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में व्यावयासिक शिक्षकों का कार्यकाल फिर बढ़ा दिया गया है। अब इन शिक्षकों की सेवाएं जून तक जारी रहेंगी। अनुबंध नहीं बढ़ने से 5155 व्यावसायिक शिक्षकों के बेरोजगार होने का खतरा बढ़ गया था।

News In Short

  • 5155 व्यावसायिक शिक्षकों की सेवाएं अब जून तक।
  • स्कूल शिक्षा परिषद ने सेवा विस्तार के जारी किए आदेश।
  • अनुबंध नहीं बढ़ने से बढ़ रहा था बेरोजगार होने का खतरा।
  • 1520 स्कूलों के व्यावसायिक शिक्षकों को मिलेगा फायदा।
  • प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा का मॉडल विफल ही रहा।
  • व्यावसायिक शिक्षकों को 11 महीने से नहीं मिला वेतन।

News In Detail

​Jaipur: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा योजना के सुचारु संचालन को लेकर अहम निर्णय लिया गया है। स्कूल शिक्षा परिषद ने व्यावसयिक शिक्षकों का अनुबंध तीन महीन के लिए बढ़ा दिया है। प्रदेश में करीब 5155 व्यावसायिक शिक्षकों का अनुबंध 31 मार्च को खत्म हो रहा था, लेकिन आदेश जारी नहीं होने से उनकी नौकरी पर तलवार लटकी हुई थी



​जून 2026 तक जारी रहेगी सेवाएं

परिषद की ओर से जारी आदेश के अनुसार सत्र 2022-23 से कार्यरत व्यावसायिक शिक्षक का अनुबंध 3 माह के लिए बढ़ा दिया गया है। प्रदेश के 1520 विद्यालयों में नियुक्त इन शिक्षकों का कार्यकाल अब 30 जून 2026 तक रहेगा। यह विस्तार उन 10 प्रमुख संस्थाओं के लिए लागू होगा, जो सरकार से अनुबंधित हैं।



योजना नहीं दिख रही सफल

राज्य सरकार ने स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा इसलिए शुरू की थी, जिससे 12वीं पास करने के बाद छात्र आत्मनिर्भर बन सकें। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और नीतिगत स्पष्टता के अभाव में यह योजना सफल होती नहीं दिख रही है। विडंबना यह रही है कि प्रदेश के 4019 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित है, लेकिन इनमें से 2499 स्कूलों में आज एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है। जिन 1520 स्कूलों में 5155 शिक्षक कार्यरत हैं, उनके सेवा विस्तार पर अब तक संशय बना हुआ है।



​3-3 महीने का अनुबंध और 11 महीने से वेतन का इंतजार

व्यावसायिक शिक्षकों का कहना है कि उनका अनुबंध केवल 3-3 महीने के लिए बढ़ाया जा रहा है। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने पिछला अनुबंध 1 जनवरी 2025 से 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया था। तनाव केवल नौकरी जाने का ही नहीं है, बल्कि आर्थिक तंगी का भी है। इन शिक्षकों को पिछले 11 महीनों से वेतन नहीं मिला है। ​स्कूल शिक्षा परिषद की आयुक्त अनुपमा जोरवाल ने 3 दिन के भीतर भुगतान के आदेश दिए थे, लेकिन धरातल पर इसका कोई असर नहीं दिखा।





​निविदा निरस्त, पर शिक्षकों को नहीं मिली राहत

पिछले साल भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते जिन निजी फर्मों के टेंडर निरस्त किए गए थे, विभाग के अधिकारियों ने उन पर मेहरबानी दिखाई। उनके जरिए लगे शिक्षकों को स्कूल पहुंचने के निर्देश दे दिए गए। लेकिन, जो शिक्षक पहले से ईमानदारी से काम कर रहे हैं, उनके कार्यकाल को बढ़ाने में अधिकारी बेरुखी दिखा रहे हैं।



हरियाणा और असम मॉडल की तर्ज पर बने नीति

​व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति का कहना है कि तदर्थ नियुक्तियों से काम नहीं चलेगा। सरकार को शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि राजस्थान में भी हरियाणा और असम मॉडल को लागू किया जाए, जहां शिक्षकों को 60 साल तक की सेवा सुरक्षा प्रदान की गई है।



​संस्थाओं के लिए भी दिशा-निर्देश

अनुबंध विस्तार के साथ ही शिक्षा परिषद ने प्रशिक्षण देने वाली 10 संस्थाओं के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें भी लागू की हैं। सभी संस्थाओं को मूल परफॉर्मेंस सिक्योरिटी दस्तावेज 5 अप्रैल 2026 तक परिषद कार्यालय में जमा कराने होंगे। जिन संस्थाओं की बैंक गारंटी समाप्त होने वाली है, उन्हें समय से पूर्व नवीनीकरण कराकर प्रस्तुत करना अनिवार्य है।



यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा नहीं किए जाते हैं, तो अनुबंध विस्तार को वापस ले लिया जाएगा। साथ ही दस्तावेज जमा न होने की स्थिति में संबंधित दिनों का मानदेय (Salary) पुनर्भरण देय नहीं होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संस्था की होगी।



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