राजस्थान में मानसून की विदाई तेज, जैसलमेर में पारा 40.5 डिग्री; 25 सितंबर को बारिश के आसार
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में मानसून की विदाई तेज, जैसलमेर-नागौर-सीकर से गुजर रही वापसी रेखा।
- जैसलमेर में पारा 40.5 डिग्री, कई जिलों में बढ़ने लगी गर्मी।
- 22 सितंबर को कोटा और उदयपुर में हल्की बारिश के आसार।
- 25 सितंबर को उत्तरी राजस्थान में तेज हवाओं के साथ बारिश संभव।
- मानसून की विदाई के बीच महीने के अंत में फिर बदल सकता है मौसम।
जयपुर। राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का सिलसिला तेज हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून वापसी की रेखा अब जैसलमेर, नागौर और सीकर से गुजर रही है। अगले 2 से 3 दिनों में राज्य के कुछ और हिस्सों से मानसून की विदाई के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।
मानसून की वापसी के बीच प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है। हालांकि, 22 सितंबर को कोटा और उदयपुर संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और बीकानेर संभाग में अगले 4 से 5 दिनों तक बारिश की गतिविधियां सीमित रहने की संभावना है।
इस बीच, जैसलमेर में प्रदेश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बारिश कम होने के साथ पश्चिमी और उत्तरी राजस्थान के कई इलाकों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
जैसलमेर, नागौर और सीकर से गुजर रही मानसून वापसी रेखा
मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की रेखा जैसलमेर, नागौर और सीकर से होते हुए आगे बढ़ रही है। यह रेखा रोहतक, पटियाला और गुरदासपुर तक पहुंच गई है।
अगले 2 से 3 दिनों में राजस्थान के कुछ और हिस्सों के साथ पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़-दिल्ली, सौराष्ट्र-कच्छ और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल रहने का अनुमान है।
मानसून की वापसी के साथ राजस्थान में बारिश का दायरा लगातार सीमित हो सकता है। हालांकि, स्थानीय मौसम परिस्थितियों के कारण कुछ जिलों में हल्की बारिश और तेज हवाएं जारी रह सकती हैं।
22 सितंबर को कोटा और उदयपुर में हल्की बारिश
22 सितंबर को कोटा और उदयपुर संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक भारी बारिश की कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की है।
कोटा और उदयपुर संभाग में 25 और 26 सितंबर को भी कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। हालांकि, बारिश का प्रभाव सीमित रहने और सभी जिलों में वर्षा नहीं होने का अनुमान है।
जयपुर में अधिकतम तापमान 35 से 37 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। कोटा में अधिकतम तापमान करीब 37 डिग्री, जबकि उदयपुर में यह लगभग 33 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
23 और 24 सितंबर को ज्यादातर इलाकों में मौसम शुष्क
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 23 और 24 सितंबर को राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रह सकता है। पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और बीकानेर संभाग में अगले 4 से 5 दिनों तक बारिश की गतिविधियां कम रहने की संभावना है।
पूर्वी राजस्थान में भी इस दौरान मौसम सामान्य और शुष्क रह सकता है। बारिश का असर कम होने से कई जिलों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर बादल बनने और हल्की बारिश की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वानुमान में परिस्थितियों के आधार पर बदलाव संभव है।
25 सितंबर को उत्तरी जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश संभव
25 सितंबर को श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, उत्तरी बीकानेर और चूरू जिलों में कमजोर पश्चिमी विक्षोभ का आंशिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसके कारण कुछ स्थानों पर मेघगर्जन, तेज हवाएं और हल्की बारिश की संभावना है।
जोधपुर और भरतपुर संभाग में भी स्थानीय स्तर पर तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। हालांकि, इसका प्रभाव व्यापक रहने की संभावना नहीं है।
मौसम खराब होने की स्थिति में लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।
महीने के अंत में फिर बदल सकता है मौसम
26 और 27 सितंबर को राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम सामान्य और शुष्क रहने का अनुमान है। वहीं, 29 और 30 सितंबर के आसपास कुछ इलाकों में छिटपुट बारिश हो सकती है।
पहाड़ी क्षेत्रों में संभावित पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव उत्तर-पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में स्थानीय मौसम बदलाव के रूप में दिखाई दे सकता है। हालांकि, अभी इसके प्रभाव और प्रभावित जिलों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
इसके अलावा, बंगाल की खाड़ी में 24 से 25 सितंबर के आसपास संभावित निम्न दबाव क्षेत्र बनने का अनुमान है। इसका मुख्य प्रभाव उत्तर प्रदेश, बिहार, नेपाल और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में रहने की संभावना है। राजस्थान पर इसके सीधे और व्यापक प्रभाव के फिलहाल स्पष्ट संकेत नहीं हैं।
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