डिग्री हाथ में, नौकरी का इंतजार: क्या राजस्थान का नया यूथ बजट दूर कर पाएगा 33% शिक्षित बेरोजगारों का संकट?
राजस्थान में हर तीन में से करीब एक ग्रेजुएट युवा बेरोजगार है। ग्रेजुएट युवतियों में बेरोजगारी दर 44 फीसदी तक पहुंच गई है। दूसरी तरफ राज्य सरकार वित्त वर्ष 2027-28 में युवाओं के लिए पहली बार अलग यूथ बजट पेश करने की तैयारी कर रही है। सरकार इसे जेन-जी युवाओं के लिए बड़ी पहल के तौर पर पेश कर रही है।
लेकिन प्रदेश में पहले से बेरोजगारी भत्ता, स्वरोजगार के लिए लोन और स्किल ट्रेनिंग की कई योजनाएं चल रही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि नए बजट से युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे या पुरानी योजनाओं को ही अलग बजट में दिखाया जाएगा?
यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि 2028 में राजस्थान विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के हवाले से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 5 करोड़ 17 लाख 32 हजार 266 मतदाता हैं। इनमें करीब 2.40 करोड़ मतदाता 18 से 35 साल के हैं। यानी कुल मतदाताओं में इस आयु वर्ग की हिस्सेदारी करीब 44 फीसदी है। ग्रामीण क्षेत्रों में 45.59 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 40.06 फीसदी मतदाता इसी आयु वर्ग के हैं।
युवाओं की इतनी बड़ी हिस्सेदारी के बीच सरकार की नई पहल को 2028 के चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि सरकार का कहना है कि यूथ बजट का मकसद युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर देना है।
पढ़े-लिखे युवाओं के सामने रोजगार का संकट
राजस्थान हैंडबुक ऑफ यूथ अपॉर्चुनिटी रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में ग्रेजुएट और उससे अधिक पढ़े 33 फीसदी युवा बेरोजगार हैं। ग्रेजुएट युवतियों में बेरोजगारी दर 44 फीसदी है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के केवल 23 फीसदी कामकाजी युवाओं के पास नियमित वेतन वाली नौकरी है, जबकि 47 फीसदी कामकाजी युवा खेती से जुड़े हैं।
ये आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में चुनौती केवल रोजगार उपलब्ध कराने की नहीं, बल्कि पढ़ाई के मुताबिक नियमित और बेहतर वेतन वाली नौकरियां बढ़ाने की भी है।
ऐसे में सरकार को यह बताना होगा कि नए यूथ बजट में ग्रेजुएट बेरोजगारी घटाने के लिए क्या लक्ष्य तय किए जाएंगे। क्या बजट में केवल ट्रेनिंग और स्वरोजगार पर जोर रहेगा या नियमित नौकरी दिलाने की भी ठोस व्यवस्था होगी?
बेरोजगारी भत्ते पर 3,644 करोड़ से ज्यादा खर्च, नौकरी कितनों को मिली?
राजस्थान में मुख्यमंत्री युवा संबल योजना पहले से चल रही है। इसके तहत पात्र बेरोजगार पुरुषों को हर महीने 4 हजार रुपए और महिलाओं, ट्रांसजेंडर व दिव्यांग लाभार्थियों को 4,500 रुपए भत्ता देने का प्रावधान है। यह सहायता अधिकतम दो साल या पात्रता समाप्त होने तक दी जाती है।
राजस्थान सरकार की आर्थिक समीक्षा 2025-26 के मुताबिक फरवरी 2019 से दिसंबर 2025 तक इस योजना में करीब 8.54 लाख लाभार्थियों को 3,644 करोड़ रुपए से अधिक का भत्ता दिया गया।
सरकार ने बेरोजगार युवाओं को आर्थिक मदद तो दी, लेकिन इसका अगला नतीजा क्या रहा? भत्ता पाने वाले कितने युवाओं को बाद में नौकरी मिली? कितनों ने स्किल ट्रेनिंग और इंटर्नशिप पूरी की? क्या सरकार के पास इसका वर्षवार रिकॉर्ड है?
नए यूथ बजट में बेरोजगारी भत्ते के साथ युवाओं को नौकरी से जोड़ने की व्यवस्था कितनी मजबूत होगी, यह भी देखना होगा।
कारोबार के लिए 2 करोड़ तक लोन की योजना, फिर नया क्या मिलेगा?
प्रदेश में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना पहले से चल रही हैं।
मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में पात्र युवाओं को कारोबार शुरू करने के लिए ब्याज मुक्त लोन देने का प्रावधान है। वहीं, विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना के तहत नया कारोबार शुरू करने या पुराने कारोबार का विस्तार करने के लिए 2 करोड़ रुपए तक लोन और पात्रता के अनुसार ब्याज पर 8 फीसदी तक छूट दी जाती है।
राजस्थान सरकार की आर्थिक समीक्षा के मुताबिक सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना में 2,075 आवेदन मिले। इनमें 125 मामलों में लोन स्वीकृत हुआ, जबकि 73 आवेदकों को कुल 27.34 करोड़ रुपए का लोन वितरित किया गया।
इन आंकड़ों के बीच सवाल है कि कितने युवाओं ने वास्तव में कारोबार शुरू किया और कितनों का कारोबार अब भी चल रहा है? नए यूथ बजट में स्वरोजगार के लिए अतिरिक्त पैसा मिलेगा या मौजूदा लोन योजनाओं को ही उसमें शामिल किया जाएगा?
स्किल ट्रेनिंग में हजारों युवा, लेकिन प्लेसमेंट का पूरा हिसाब कहां?
राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम के जरिए रोजगार आधारित जन कौशल विकास कार्यक्रम, सक्षम और समर्थ जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं।
आर्थिक समीक्षा 2025-26 के मुताबिक दिसंबर 2025 तक रोजगार आधारित जन कौशल विकास कार्यक्रम में 16,150, सक्षम योजना में 6,282 और समर्थ योजना में 6,039 लोगों को ट्रेनिंग दी गई।
इसके अलावा मुख्यमंत्री युवा कौशल योजना के जरिए कॉलेज विद्यार्थियों को रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग देने का प्रावधान है।
लेकिन ट्रेनिंग लेने वाले कितने युवाओं को नौकरी मिली? कितनों ने नौकरी जॉइन की और कितने छह महीने बाद भी रोजगार में बने रहे? यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करे तो योजनाओं की वास्तविक सफलता का पता चल सकेगा।
भर्ती में गड़बड़ी और देरी रोकने के लिए डिजिटल ट्रैकर की तैयारी
यूथ प्लान में सरकारी भर्तियों की निगरानी के लिए डिजिटल ट्रैकर तैयार करने का प्रस्ताव है। इसके तहत राजस्थान लोक सेवा आयोग और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की भर्ती प्रक्रियाओं की जानकारी एक जगह उपलब्ध कराने की योजना है।
इसमें खाली पद, भर्ती विज्ञापन, परीक्षा, रिजल्ट और नियुक्ति की तारीख तक का रिकॉर्ड रखने की तैयारी है। इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में देरी और गड़बड़ियों को कम करना बताया जा रहा है।
इसके साथ ही सरकारी विभागों में खाली पदों की जानकारी के आधार पर हर साल एक भर्ती कैलेंडर जारी करने का प्रस्ताव है, ताकि युवाओं को पहले से पता चल सके कि किस विभाग में कितनी भर्तियां होने की संभावना है।
लेकिन असली सवाल यह है कि भर्ती की तारीखों का रिकॉर्ड रखने के साथ समय पर नियुक्ति की जवाबदेही किसकी होगी? अगर परीक्षा या रिजल्ट में देरी होती है तो क्या ट्रैकर पर उसका कारण भी बताया जाएगा?
18 से 30 साल के युवाओं की बनेगी डिजिटल प्रोफाइल
सरकार 18 से 30 साल के युवाओं की अलग डिजिटल प्रोफाइल बनाने पर भी काम कर रही है। इसमें पढ़ाई, स्किल, अनुभव, नौकरी की तलाश, अप्रेंटिसशिप और सरकारी योजनाओं की जानकारी एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की योजना है।
सरकार का उद्देश्य युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार और ट्रेनिंग के अवसरों से जोड़ना है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई टेक्नोलॉजी से जुड़े कोर्स शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है।
हालांकि डिजिटल प्रोफाइल बनने के बाद युवाओं को नौकरी दिलाने की व्यवस्था कैसे काम करेगी, यह अभी स्पष्ट होना बाकी है। सरकार को यह भी बताना होगा कि युवाओं की निजी जानकारी कैसे सुरक्षित रखी जाएगी।
मुख्यमंत्री का दावा, ढाई साल में 1.90 लाख पदों पर नियुक्तियां
17 सितंबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में युवाओं से यूथ बजट को लेकर संवाद किया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार युवाओं को केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनाना चाहती है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक ढाई साल में 1.90 लाख पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं। इसके अलावा 1.20 लाख पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है और वर्ष 2026 के लिए 1.25 लाख पदों का भर्ती कैलेंडर जारी किया गया है।
सरकार के इन दावों के बीच यह जानना भी जरूरी है कि घोषित भर्तियों में कितनी पूरी हुईं, कितने अभ्यर्थियों ने जॉइन किया और कितने पद अब भी खाली हैं। नए यूथ बजट में इन आंकड़ों को सार्वजनिक करने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
2028 के चुनाव से पहले युवाओं पर फोकस
राजस्थान में करीब 2.40 करोड़ मतदाता 18 से 35 साल के आयु वर्ग में बताए गए हैं। यह संख्या प्रदेश की चुनावी राजनीति में युवाओं की अहमियत दिखाती है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा भी कह चुके हैं कि सरकार युवाओं को नौकरी मांगने के बजाय रोजगार देने वाला बनाना चाहती है। इसके लिए तकनीकी शिक्षा और स्वरोजगार पर फोकस किया जाएगा। युवाओं के सुझावों को बजट में शामिल करने की भी बात कही गई है।
हालांकि यूथ बजट को 2028 के चुनाव से जोड़कर देखा जाना राजनीतिक विश्लेषण है। सरकार ने इसे रोजगार और युवा विकास की पहल बताया है।
सबसे बड़ा सवाल: नया बजट या पुरानी योजनाओं की नई पैकेजिंग?
राजस्थान सरकार ने यूथ बजट तैयार करने के लिए विभागों से योजनाओं और उनके खर्च की जानकारी मांगी है। प्रस्तावित व्यवस्था में युवाओं पर अधिक खर्च वाली योजनाओं को अलग कैटेगरी में रखने की तैयारी है।
इससे सरकार पहली बार यह दिखा सकेगी कि अलग-अलग विभाग युवाओं पर कुल कितना पैसा खर्च कर रहे हैं। लेकिन पुराने खर्च को एक जगह दिखाना और रोजगार के लिए नया बजट देना दो अलग बातें हैं।
यही इस पूरे यूथ बजट का सबसे बड़ा सवाल है। सरकार को बताना होगा कि 2027-28 में युवाओं के लिए कितनी नई राशि रखी जाएगी और कितनी रकम पहले से चल रही योजनाओं की होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि नए बजट से कितनी नियमित नौकरियां, कितने नए कारोबार और कितने वास्तविक प्लेसमेंट का लक्ष्य रखा जाएगा।
प्रदेश में 33 फीसदी ग्रेजुएट युवा बेरोजगार होने के बीच अलग यूथ बजट की सफलता केवल घोषणाओं से तय नहीं होगी। इसका असली पैमाना यही होगा कि युवाओं के नाम पर खर्च होने वाले पैसे से कितने लोगों को रोजगार मिला और उनकी आय में कितना सुधार हुआ।