संकट के समय स्वदेशी तकनीक ही असली ताकत - राजनाथ सिंह, 32 देशों के सैन्य पर्यवेक्षक भी मौजूद
राजस्थान की धरती पर एक बार फिर दुनिया की कई वायुसेनाओं की ताकत दिख रही है। शनिवार, 10 अक्टूबर को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे। यहां वे भारतीय वायुसेना के बहुराष्ट्रीय अभ्यास तरंग शक्ति-2026 के प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल हुए। अभ्यास में भारत के साथ सात मित्र देशों की वायुसेनाएं हिस्सा ले रही हैं।
राजनाथ सिंह जोधपुर पहुंचे
राजनाथ सिंह जोधपुर दौरे पर अभ्यास के अहम कार्यक्रमों में शामिल हुए। उनका यह दौरा अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास के बीच हुआ है। तरंग शक्ति 2026 में अलग-अलग देशों के लड़ाकू एक साथ उड़ान भर रहे हैं।
इस Indian Air Force exercise का मकसद सिर्फ हवाई ताकत दिखाना नहीं है। इसका असली मकसद अलग-अलग वायुसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है। संयुक्त अभियान की क्षमता मजबूत करना भी इसका अहम लक्ष्य है।
8 देशों की वायुसेनाएं
इस अभ्यास में भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की वायुसेनाएं शामिल हैं। संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस और जर्मनी भी हिस्सा ले रहे हैं। श्रीलंका और बांग्लादेश की वायुसेनाएं भी अभ्यास का हिस्सा हैं। यानी कुल 8 देशों की वायुसेनाएं अपने हवाई संसाधनों के साथ जोधपुर में हैं।
32 देशों के पर्यवेक्षक
इसके अलावा 32 देशों के प्रतिनिधि पर्यवेक्षक के रूप में अभ्यास देख रहे हैं। यानी कुल 40 देश किसी न किसी रूप में इस अभ्यास से जुड़े हैं। आप सोचिए, एक ही एयरबेस पर दुनिया के इतने देशों की मौजूदगी कितनी बड़ी बात है।
F-35 और राफेल भी शामिल
अभ्यास में अलग-अलग तरह के सैन्य विमान अपनी क्षमता दिखा रहे हैं। इनमें अमेरिका का F-35 लड़ाकू विमान शामिल है। फ्रांस का राफेल भी अभ्यास में है। F-16 जैसे विमान भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
भारतीय वायुसेना भी अपने आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ अभ्यास में है। दूसरे हवाई संसाधन भी इसमें लगाए गए हैं। F-35 और राफेल जैसे विमानों का एक साथ उड़ना अपने आप में खास है।
हवाई युद्ध की रणनीति पर जोर
अभ्यास का मुख्य उद्देश्य मित्र देशों की वायुसेनाओं को साथ काम करने का अनुभव देना है। इसमें हवाई सुरक्षा और दुश्मन के विमानों के खिलाफ अभियान का अभ्यास हो रहा है। टोही मिशन (दुश्मन की जानकारी जुटाने वाली उड़ान) भी इसमें शामिल हैं। सैन्य परिवहन से जुड़े अभ्यास भी किए जा रहे हैं।
हवा में ईंधन भरने का अभ्यास
अभ्यास में हवा में ही विमानों में ईंधन भरने की गतिविधि भी शामिल है। इससे लड़ाकू विमान बिना उतरे लंबी दूरी तक उड़ान भर सकते हैं।
आधुनिक युद्ध में सिर्फ अत्याधुनिक विमान होना काफी नहीं है। अलग-अलग देशों के पायलट और ग्राउंड स्टाफ कितनी तेजी से साथ काम कर पाते हैं, यह भी अहम है। क्या जंग के समय अलग भाषा और अलग तकनीक वाली सेनाएं एक टीम बन पाएंगी? ऐसे अभ्यास इसी सवाल का जवाब तैयार करते हैं।
सारंग और सूर्यकिरण के करतब
तरंग शक्ति-2026 के दौरान भारतीय वायुसेना की सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम ने करतब दिखाए। सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने भी हवाई प्रदर्शन किया। 8 अक्टूबर को जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर दोनों टीमों के प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आई थीं। इन टीमों के पायलट सटीक तालमेल के साथ हवा में जटिल फॉर्मेशन बनाते हैं।
विदेशी मेहमानों के लिए खास मौका
इन प्रदर्शनों से भारतीय वायुसेना अपने पायलटों का कौशल और अनुशासन दिखाती है। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए यह भारतीय वायुसेना की कार्यशैली को करीब से देखने का मौका है।
राजस्थान बना रक्षा सहयोग का केंद्र
जोधपुर में हो रहे इस अभ्यास से राजस्थान अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग के अहम केंद्र के रूप में उभरा है। यहां अलग-अलग देशों के सैन्यकर्मी साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं। वे एक-दूसरे से अपने अनुभव भी साझा कर रहे हैं।
Tarang Shakti 2026 का समापन 12 अक्टूबर को होगा। तब तक संयुक्त प्रशिक्षण और हवाई संचालन से जुड़ी गतिविधियां जारी रहेंगी।