राणा लेगेसी शोरूम के मालिक को किया भगोड़ा घोषित, चेक बाउंस से जुड़ा है मामला
News In Short
- अदालत ने राणा लेगेसी शोरूम के मालिक पुष्पेन्द्र कुमार राणा को भगोड़ा घोषित किया।
- मामला 10 साल पुराना है और 20 लाख रुपए के बाउंस चेक से जुड़ा है।
- अदालत ने आरोपी के खिलाफ स्थाई गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
- शिकायत अंजना शाह द्वारा व्यवसायिक लोन के तहत 2016 में दी गई राशि से जुड़ी थी।
- आरोपी ने लीगल नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया और अदालत में लगातार हाजिरी नहीं दी।
News In Detail
राजस्थान की राजधानी जयपुर की विशेष अदालत ने राणा लेगेसी शोरूम के मालिक पुष्पेन्द्र कुमार राणा को भगोड़ा घोषित कर दिया है। मामला करीब 10 साल पुराना है और इसमें 20 लाख रुपए के बाउंस चेक का विवाद शामिल है।
अदालत ने कहा कि आरोपी को बार-बार वारंट जारी किए जा रहे हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो पा रहा। ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी जानबूझकर वारंट से बच रहा है और भविष्य में उसे पकड़ना मुश्किल होगा।
आरोपी को किया भगोड़ा घोषित
विशेष अदालत ने वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पुष्पेन्द्र कुमार राणा को भगोड़ा घोषित किया। इसके साथ ही आरोपी के खिलाफ स्थाई गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया है। अदालत ने यह कदम आरोपी की लगातार गैरहाजिरी और कानूनी आदेशों की अनदेखी के कारण उठाया।
20 लाख का व्यवसायिक लोन
वकील अर्चित बोहरा और अभिषेक मिश्रा के अनुसार, मामला अंजना शाह द्वारा दायर परिवाद से जुड़ा है। परिवाद में बताया गया कि 17 अप्रैल 2016 को उन्होंने राणा लेगेसी को व्यवसायिक लोन के रूप में 20 लाख रुपए ब्याज के साथ उधार दिए थे।
मूल रूप से लोन की वापसी 2019 में होनी थी। लेकिन 26 फरवरी 2026 को राणा ने 20 लाख रुपए का चेक दिया। जब परिवादी ने बैंक में चेक जमा किया तो यह बाउंस हो गया। इसके बाद परिवादी ने लीगल नोटिस भेजा, लेकिन राणा का कोई जवाब नहीं आया। अंततः अदालत में परिवाद दायर किया गया।
कानूनी प्रक्रिया और चुनौती
अदालत के आदेशों के मुताबिक, आरोपी के भगोड़ा घोषित होने के बाद अब स्थाई वारंट जारी किया गया है। इससे कानून के तहत उसे पकड़ना और संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू होगी। विशेष अदालत ने कहा कि वारंट की लगातार अनदेखी और आरोपी की गैरहाजिरी को देखते हुए यह कदम आवश्यक था।
भविष्य की कार्रवाई
अब अदालत और कानूनी एजेंसियां आरोपी को पकड़ने और मामले का निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएँगी। यह मामला बैंकिंग और वित्तीय अनुशासन के लिए उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे व्यवसायिक ऋण और चेक बाउंस की घटनाओं में कानूनी कार्रवाई होती है।
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