रणथंभौर में टाइगर T-2402 की मौत, टेरिटरी संघर्ष बना कारण

Jageshwar prasad | Apr 28, 2026, 18:06 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के रणथंभौर नेशनल पार्क की फलौदी रेंज में टेरिटरी संघर्ष के दौरान टाइगर T-2402 की मौत हो गई। साढ़े तीन साल का यह बाघ मशहूर बाघिन T-99 की संतान था।

News In Short

  • टेरिटरी की जंग में साढ़े तीन साल के युवा बाघ T-2402 की मौत।
  • 500 फीट ऊंची पहाड़ी पर मिला बाघ T-2402 का क्षत-विक्षत शव।
  • टेरिटरी के संघर्ष में T-108 और T-2310 से भिड़ंत होने की आशंका।
  • पहाड़ी से शव उतारने में वन विभाग को करनी पड़ी भरी मशक्कत।
  • बाघों की बढ़ती संख्या से रणथंभौर में टेरिटरी का संकट गहराया।

News In Detail

Sawai Madhopur: राजस्थान के प्रसिद्ध रणथंभौर नेशनल पार्क वरणथंभौर टाइगर रिजर्व की फलौदी रेंज मंगलवार को एक घटना हुई। यहां अपनी टेरिटरी (Territory) कायम करने की कोशिश कर रहे साढ़े तीन साल के युवा टाइगर T-2402 की आपसी संघर्ष में मौत हो गई। T-2402 मशहूर बाघिन T-99 की संतान था और जंगल में अपनी पहचान बनाने के शुरुआती दौर में था।



पहाड़ी पर मिला क्षत-विक्षत शव

वन विभाग को T-2402 का शव फलौदी रेंज के हिंदवाड़ इलाके में एक पहाड़ी पर मिला। दुर्गम रास्ता और करीब 500 फीट की ऊंचाई होने के कारण विभाग की टीम को शव नीचे उतारने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। शव की स्थिति को देखकर यह स्पष्ट था कि संघर्ष काफी भीषण रहा होगा।



किन बाघों से हुआ मुकाबला?

वन विभाग के फील्ड डायरेक्टर शारदा प्रताप सिंह और डीसीएफ मानस सिंह के अनुसार, जिस इलाके में T-2402 रहता था, उसी क्षेत्र में दो अन्य ताकतवर बाघों—T-108 और T-2310 का भी मूवमेंट रहता है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन्हीं दोनों में से किसी एक बाघ के साथ T-2402 की भिड़ंत हुई होगी।



युवा बाघ जब अपनी मां से अलग होकर खुद की टेरिटरी बनाने की कोशिश करते हैं, तो पुराने स्थापित बाघों से उनका संघर्ष होना स्वाभाविक है। इसी क्षेत्रीय लड़ाई में युवा T-2402 अपनी जान गंवा बैठा।



बढ़ती आबादी और सीमित क्षेत्र की चुनौती

वन अधिकारियों का कहना है कि रणथंभौर में बाघों की संख्या बढ़ना संरक्षण की सफलता तो है, लेकिन उनके लिए जंगल का इलाका अब छोटा पड़ने लगा है। यही वजह है कि युवा बाघों के बीच अपनी टेरिटरी को लेकर प्रतिस्पर्धा और जानलेवा संघर्ष बढ़ रहे हैं।



अंतिम विदाई

T-2402 के शव का पोस्टमार्टम नाका राजबाग वन चौकी पर वरिष्ठ अधिकारियों और कोतवाली पुलिस की मौजूदगी में किया गया। पोस्टमार्टम के बाद पूरे सम्मान के साथ बाघ के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। हालांकि मौत की असल वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही पुख्ता होगी, लेकिन प्रथम दृष्टया इसे इंट्रा-स्पेसिफिक फाइट (बाघों की आपसी लड़ाई) ही माना जा रहा है।



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