RAS पंकज ओझा को कार्मिक विभाग ने थमाई चार्जशीट, सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट को लेकर हुई कार्रवाई
पंकज ओझा की विवादित पोस्ट में सरकार और राजनीतिक नेताओं पर टिप्पणियां करने के आरोप लगे हैं। इसके साथ धार्मिक, जातिगत और सांप्रदायिक विषयों पर आपत्तिजनक सामग्री साझा के भी आरोप हैं। हालांकि ओझा ने विवाद के बाद सोशल मीडिया से सभी पोस्ट को हटा लिया है।
16 से 27 अक्टूबर के बीच की पोस्ट पर सवाल
कार्मिक विभाग की कार्रवाई का आधार 16 से 27 अक्टूबर 2025 के बीच फेसबुक पर की गई 14 पोस्ट को बनाया गया है। आरोप है कि इन पोस्ट में सरकार और राजनीतिक नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इसके अलावा राजनीतिक, धार्मिक, जातिगत और सांप्रदायिक मुद्दों पर भी विवादित पोस्ट की गई। विभाग ने इन पोस्ट को सरकारी सेवा में रहते हुए अधिकारी के आचरण से जुड़ा मामला माना है।
सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन
कार्मिक विभाग के अनुसार, पंकज ओझा की कथित पोस्ट राजस्थान सिविल सेवा आचरण नियम, 1971 के नियम 3, 4 और 11 के उल्लंघन के अंतर्गत आती है। इन नियमों के तहत सरकारी कर्मचारियों के आचरण और सेवा संबंधी जिम्मेदारियों का पालन अपेक्षित है।
इसी आधार पर राजस्थान सिविल सेवा नियम, 1958 के नियम 16 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। विभागीय प्रक्रिया में चार्जशीट के जरिए अधिकारी को आरोपों की जानकारी दी जाती है। इसके बाद अधिकारी अपना लिखित जवाब प्रस्तुत कर सकता है। जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जनवरी में भी मांगा गया था जवाब
विभागीय जानकारी के मुताबिक, पंकज ओझा से 19 जनवरी 2026 को भी स्पष्टीकरण मांगा गया था। आरोप है कि उन्होंने तय समय में जवाब नहीं दिया। अब चार्जशीट जारी होने के बाद उन्हें 15 दिन के भीतर अपना लिखित पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है। इसका मतलब है कि अधिकारी का जवाब नहीं आने पर विभाग उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।
बचाव में सरकारी रिकॉर्ड देखने की अनुमति
पंकज ओझा को अपने बचाव में संबंधित सरकारी रिकॉर्ड देखने की अनुमति भी दी गई है। इससे वे आरोपों से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन कर अपना पक्ष तैयार कर सकते हैं। आदेश में राजनीतिक या अन्य प्रभाव के जरिए कार्रवाई को प्रभावित करने की कोशिश करने पर अलग से कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
यह मामला अब विभागीय जांच के अगले चरण में पहुंचेगा। अधिकारी का लिखित जवाब आने के बाद आरोपों और उनके बचाव का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विभाग आगे क्या कार्रवाही करता है।
पहले भी उठ चुके हैं पंकज ओझा की भूमिका पर सवाल
ये पहली बार नहीं है जब पंकज ओझा (Pankaj Ojha) का नाम विवादों में आया है। इससे पहले भी अप्रैल 2025 में एक वायरल ऑडियो को लेकर ओझा पर मिलावटखोरों को संरक्षण देने और खाद्य विभाग की कार्रवाई से जुड़ी कथित सेटिंग के आरोप गए थे।
इसके अलावा, सितंबर 2025 में IPS पंकज चौधरी की शिकायत के बाद तत्कालीन मुख्य सचिव सुधांश पंत की तरफ से मामले का संज्ञान लिए जाने और स्वास्थ्य विभाग से रिकॉर्ड तलब किए जाने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट में पंकज ओझा पर मिलावट माफिया से कथित मिलीभगत के आरोपों का जिक्र किया गया था।
मई 2024 में जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (VKI Area) में खाद्य विभाग ने एक गोदाम पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में घटिया घी जब्त किया था। कार्रवाई में पंकज ओझा का भी नाम सामने आया था।