ट्री प्रोटेक्शन एक्ट पर रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार से पूछा- कब आएगा कानून?
समझें क्या है पूरा मामला
- ट्री प्रोटेक्शन एक्ट पर बोले शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी।
- कहा- सरकार किसका इंतजार कर रही, एक साल बीत गया।
- लोहावट मामले में कहा- यह कानून-व्यवस्था के लिए चिंताजनक।
- ओबीसी आरक्षण पर कहा- उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।
- UGC विरोध पर कहा - आवाज दबाना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं।
रविंद्र सिंह भाटी ने ट्री प्रोटेक्शन एक्ट को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। बीकानेर में हुए बड़े आंदोलन के बाद सरकार ने यह कानून लाने का आश्वासन दिया था। लेकिन एक साल बाद भी यह कानून नहीं बन पाया।
भाटी ने इसके साथ कानून-व्यवस्था, ओबीसी प्रतिनिधित्व और छात्र संघ चुनाव पर भी खुलकर बात की।
ट्री प्रोटेक्शन एक्ट पर उठाए सवाल
भाटी ने कहा कि बीकानेर में 36 कौम के लोगों और बिश्नोई समाज के बड़े आंदोलन के बाद सरकार ने विधानसभा में जल्द कानून लाने की बात कही थी। लेकिन करीब एक साल बीतने के बाद भी यह कानून नहीं बन पाया है।
उन्होंने कहा कि इस दौरान बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं। भाटी ने सरकार से पूछा कि वह इस कानून को लागू करने के लिए आखिर किसका इंतजार कर रही है।
उनका कहना था कि राजस्थान के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने के लिए यह कानून बेहद जरूरी है। भाटी ने मांग रखी कि इसे अमृता देवी के नाम पर बनाया जाए, ताकि उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को याद रहे।
कानून-व्यवस्था पर जताई चिंता
कानून-व्यवस्था के सवाल पर भाटी ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में पहले लोहावट जैसी घटनाएं देखने को नहीं मिलती थीं। लेकिन अब लगातार हो रही घटनाएं चिंता का विषय बन गई हैं।
उन्होंने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में लोग न्याय की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। भाटी के अनुसार जब ग्रामीणों को न्याय के लिए भूख हड़ताल करनी पड़े, तो यह कानून व्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति है।
उन्होंने कहा कि वे पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। जरूरत पड़ने पर वे न्याय की इस लड़ाई में पूरा साथ देंगे।
राजनीतिक भविष्य पर दिया जवाब
भाजपा और कांग्रेस नेताओं के साथ मंच साझा करने और राजनीतिक भविष्य को लेकर पूछे सवाल पर भाटी ने कहा कि वे जनता के साथ हैं। उन्होंने बताया कि दोनों बड़ी पार्टियों ने पहले उनका साथ नहीं दिया था।
उनका कहना था कि जनता के आशीर्वाद से ही वे यहां तक पहुंचे हैं। भविष्य में किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि यह फैसला जनता की इच्छा से ही होगा।
ओबीसी प्रतिनिधित्व पर रखी बात
ओबीसी आरक्षण को लेकर भाटी ने कहा कि फिलहाल सिर्फ आशंकाएं जताई जा रही हैं। असली सवाल यह है कि क्या सभी ओबीसी कम्युनिटीज को उचित प्रतिनिधित्व मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि कई ओबीसी समुदायों का विधानसभा में प्रतिनिधित्व ही नहीं है। पंचायत स्तर पर भी कई समुदायों से गिने-चुने लोग ही प्रधान जैसे पदों तक पहुंच पाते हैं।
भाटी ने कहा कि सरकार को ऐसे समुदायों के प्रतिनिधित्व के लिए कदम उठाने चाहिए। उनके अनुसार पक्ष-विपक्ष दोनों को मिलकर इन समुदायों की आवाज उठानी चाहिए।
यूजीसी विरोध और छात्र संघ चुनाव पर रुख
यूजीसी (UGC – University Grants Commission) को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन और लाठीचार्ज के सवाल पर भाटी ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है।
उनका कहना था कि आवाज को लाठी के जोर पर दबाना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। सरकार को प्रदर्शनकारियों की बात सुननी चाहिए और उसके बाद फैसला लेना चाहिए।
भाटी ने छात्र संघ चुनाव से जुड़े आंदोलनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
छात्र संघ चुनाव को लेकर भाटी ने साफ कहा कि यह चुनाव जरूर होने चाहिए। उनके अनुसार यह चुनाव युवाओं को राजनीति में आने का अवसर देते हैं। एक तरफ युवाओं से राजनीति में आने की बात होती है, दूसरी तरफ यह रास्ता ही बंद किया जा रहा है।
भाटी ने कहा कि वे छात्र नेताओं के साथ हैं और जहां भी जरूरत होगी, वहां छात्र शक्ति के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।
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