आबरा का डाबरा गिली-गिली छू, 50 गार्डों के पहरे से नन्हा गोडावण चंपत
News In Short
- गुजरात के कच्छ में जैसलमेर से लाए गए अंडे से जन्मा गोडावण चूजा रहस्यमयी ढंग से गायब।
- 50 गार्ड और वॉच टावरों की 24 घंटे निगरानी के बावजूद 18 अप्रैल से नहीं दिखा चूजा।
- वन विभाग को अंदेशा, सुरक्षा घेरा तोड़कर सियार या जंगली बिल्ली ने चूजे को शिकार बनाया।
- गुजरात में गोडावण की आबादी बढ़ाने के लिए जैसलमेर से अंडा भेजकर करवाई गई थी हैचिंग।
- वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स ने इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच चूजे के लापता होने पर जांच की मांग की।
News In Detail
Jaisalmer: वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भारत की अब तक की सबसे बड़ी और साहसिक कोशिशों में से एक सेरोगेसी प्रोजेक्ट को गहरा धक्का लगा है। जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क से गुजरात के नलिया (कच्छ) भेजे गए अंडे से जन्मा गोडावण का नन्हा चूजा रहस्यमयी तरीके से लापता हो गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस चूजे की सुरक्षा के लिए 50 से अधिक विशेष गार्ड्स तैनात थे, लेकिन फिर भी इसे बचाया नहीं जा सका।
जैसलमेर से कच्छ का सफर
गुजरात के कच्छ में गोडावण की आबादी खत्म होने की कगार पर है। वहां केवल तीन मादा गोडावण बची हैं, जिससे प्राकृतिक प्रजनन पूरी तरह रुक चुका था। इस संकट को देखते हुए भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और राजस्थान वन विभाग ने एक अनूठा प्रयोग किया।
वैज्ञानिकों ने जैसलमेर के सम स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर से एक फर्टाइल अंडा चुना। 21 मार्च 2026 को इस अंडे को एक विशेष पोर्टेबल इनक्यूबेटर में रखकर करीब 770 किलोमीटर दूर गुजरात के नलिया ले जाया गया। यह सफर 19 घंटे तक बिना रुके तय किया गया ताकि अंडे का तापमान बना रहे। वहां, इस अंडे को एक जंगली मादा गोडावण के घोंसले में सफलतापूर्वक रख दिया गया। 26 मार्च को जब इस अंडे से चूजा बाहर निकला, तो इसे संरक्षण की दुनिया में एक जीत के रूप में देखा गया।
सुरक्षा का अभेद्य चक्र और उसकी नाकामी
गुजरात सरकार और वन विभाग ने इस नन्हे मेहमान को बचाने के लिए सुरक्षा का एक ऐसा चक्र तैयार किया था, जैसा शायद ही किसी अन्य पक्षी के लिए किया गया हो। करीब 50 से अधिक गार्ड्स को तीन शिफ्टों में तैनात किया गया था। घोंसले की ओर जाने वाली सभी सड़कों को पूरी तरह सील कर दिया गया था ताकि इंसानी दखल न हो। वॉच टावरों से दूरबीन के जरिए 24 घंटे नजर रखी जा रही थी।
इतनी मुस्तैदी के बावजूद, 18 अप्रैल 2026 के बाद से यह चूजा अपनी सेरोगेट मां (GPS टैग वाली मादा गोडावण) के साथ नहीं देखा गया। पिछले 11 दिनों से लगातार तलाशी अभियान जारी है, लेकिन अब तक चूजे का कोई सुराग नहीं मिला है।
शिकारी जानवरों का अंदेशा
वन विभाग के सूत्रों और विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा घेरे में कहीं न कहीं कुछ ब्लाइंड स्पॉट (खाली जगह) रह गए थे। अंदेशा जताया जा रहा है कि रात के अंधेरे में कोई आवारा कुत्ता, सियार या जंगली बिल्ली सुरक्षा घेरा तोड़कर अंदर घुस आया होगा और 26 दिन के इस चूजे को अपना निवाला बना लिया होगा। चूंकि गोडावण के बच्चे शुरू के कुछ हफ्तों में उड़ नहीं सकते और पूरी तरह जमीन पर ही रहते हैं, इसलिए वे शिकारियों के लिए आसान लक्ष्य होते हैं।
गोडावण संरक्षण
गोडावण राजस्थान का राज्य पक्षी है और वर्तमान में दुनिया भर में इनकी संख्या 150 से भी कम रह गई है। यह पक्षी IUCN की क्रिटिकली एंडेंजर्ड (अति संकटापन्न) श्रेणी में आता है। इनके अस्तित्व पर मुख्य खतरे निम्नलिखित हैं:
हाईटेंशन लाइनें: बिजली के तारों से टकराकर इनकी सबसे ज्यादा मौतें होती हैं।
प्राकृतिक शिकार: जंगली कुत्ते और शिकारी जानवर इनके अंडों और बच्चों को नुकसान पहुंचाते हैं।
आवास का कम होना: चारागाहों की कमी और खेती के बढ़ते विस्तार से इनका घर छिन रहा है।
गुजरात का यह प्रयोग सफल होता तो यह गोडावण की आबादी बढ़ाने के लिए एक नई उम्मीद की किरण होती, लेकिन इस घटना ने विशेषज्ञों को फिर से अपनी सुरक्षा रणनीतियों पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। फिलहाल, अधिकारी इसकी आधिकारिक पुष्टि करने से कतरा रहे हैं, लेकिन 11 दिन का लंबा समय इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि चूजा अब इस दुनिया में नहीं है।
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