आरजीएचएस में दवा नहीं मिली तो विधायक ने पैसे देकर खरीदी, बोलीं- हमारा यह हाल तो बाकी का क्या
News In Short
- आरजीएचएस में दवा की आपूर्ति बंद, विधायक ने अपनी जेब से दवा खरीदी।
- विधायक ऋतु बनावत ने कहा, अगर हमारे साथ ऐसा तो जनता का क्या होगा?
- दवा कंपनियों के करोड़ों रुपये बकाया, अस्पतालों में कैशलेस दवा वितरण प्रभावित।
- आरजीएचएस योजना के लाभार्थियों पर कैशलेस उपचार का आया संकट।
- सरकार ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन अभी मरीजों की परेशानी बढ़ी।
News In Detail
राजस्थान की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना आरजीएचएस (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला तब गरमा गया, जब इस योजना के तहत दवा नहीं मिलने पर खुद विधायक रितु बनावत को अपनी जेब से दवा खरीदनी पड़ी। बयाना से निर्दलीय विधायक बनावत ने यह अनुभव सार्वजनिक किया तो सवाल उठने लगे कि जब जनप्रतिनिधियों की यह दशा है तो आम कर्मचारी और पेंशनर्स का क्या होगा?
विधायक को देना पड़ा दवा का पैसा
ऋतुबनावत अपने बेटे और अपनी आंखों के इलाज के लिए आरजीएचएस से जुड़े एक अस्पताल पहुंचीं थीं। वहां उन्हें उम्मीद थी कि योजना के तहत कैशलेस दवा मिल जाएगी, लेकिन मेडिकल स्टोर पर उन्हें निराशा हाथ लगी। मेडिकल स्टोर ने दवा देने से इनकार कर दिया और उन्हें मजबूरन अपनी जेब से पैसे देकर दवाइयां खरीदनी पड़ीं।
विधायक ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, जब हमारा यह हाल है तो आम कर्मचारी और पेंशनर की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह टिप्पणी सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तेजी से वायरल हो गई।
बकाया भुगतान ने लगाईं व्यवस्था पर लगाम
दरअसल, पिछले कई दिनों से आरजीएचएस योजना को लेकर लगातार शिकायतें आ रही हैं। अस्पतालों और फार्मेसी संचालकों ने सरकार पर बकाया भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया है। पिछले 8-9 महीनों से दवा आपूर्तिकर्ताओं के करोड़ों रुपये फंसे हैं। ऐसे में प्राइवेट अस्पतालों ने 25 मार्च से ओपीडी में कैशलेस दवा वितरण अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
50 लाख लाभार्थियों पर संकट
राजस्थान एलायंस ऑफ हॉस्पिटल एसोसिएशंस (RAHA) के मुताबिक, दवा कंपनियों ने भुगतान नहीं मिलने के कारण अस्पतालों को उधार पर दवाएं देना बंद कर दिया है। इससे अस्पतालों के लिए कैशलेस सुविधा जारी रखना मुश्किल हो गया है। इसका सीधा असर लगभग 50 लाख लोगों पर पड़ सकता है, जिनमें सरकारी कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके परिवार शामिल हैं, जो नियमित इलाज और दवाओं के लिए इस योजना पर निर्भर हैं।
पूर्व चिकित्सा मंत्री ने भी पैसे देकर कराई एमआरआई जांच
पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इस योजना को कमजोर कर रही है और पर्याप्त बजट नहीं दे रही। उन्हें भी एक दिन पहले एसएमएस अस्पताल के बाहर पैसे देकर एमआरआई जांच करवानी पड़ी। वहीं कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने भी प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
जल्द समाधान का आश्वासन
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मामले की जानकारी लेने और जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। लेकिन, फिलहाल आरजीएचएस योजना में कैशलेस दवा व्यवस्था प्रभावित होने से मरीजों की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है।
यह योजना सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स के लिए शुरू की गई। बाद में इस योजना में विधायकों और पूर्व विधायकों को जोड़ा गया। इस योजना के लाभार्थियों को सरकारी अस्पताल और चुनिंदा प्राइवेट अस्पतालों में कैशलेस इलाजकी सुविधा मिलती है।
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