आरजीएचएस और MAA योजना: दोनों पर 3-3 हजार करोड़ खर्च, फिर भी परिवारों की संख्या में जमीन-आसमान का फर्क
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान सरकार आरजीएचएस और MAA, दोनों में इलाज की सुविधा देती है।
- दोनों योजनाओं का सालाना बजट 3-3 हजार करोड़ रुपए है।
- दोनों में मिलाकर हर साल करीब 2 करोड़ क्लेम हो रहे हैं।
- आरजीएचएस से 13.63 लाख और MAA से 1.43 करोड़ परिवार जुड़े हैं।
- MAA में प्रति परिवार करीब 2100 रुपए खर्च हो रहे हैं।
आरजीएचएस और MAA योजना पर राजस्थान सरकार हर साल 3-3 हजार करोड़ रुपए खर्च करती है। दोनों योजनाओं में मिलाकर करीब 2 करोड़ क्लेम हर साल हो रहे हैं। लेकिन दोनों से जुड़े परिवारों की संख्या में जमीन-आसमान का अंतर है।
आरजीएचएस (RGHS – राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) से 13.63 लाख परिवार जुड़े हैं। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAA) से 1.43 करोड़ परिवार जुड़े हैं।
RGHS vs MAA scheme: किसमें क्या सुविधा मिलती है?
दोनों योजनाओं में क्या फर्क है? सबसे बड़ा फर्क इलाज की सुविधा का है। MAA में मरीजों को कैशलेस उपचार मिलता है। आरजीएचएस में सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों को अस्पताल में ओपीडी और आईपीडी की सुविधा मिलती है। उन्हें प्राइवेट मेडिकल स्टोर्स से दवा लेने की सुविधा भी मिलती है। ओपीडी (OPD) यानी अस्पताल में बिना भर्ती हुए दिखाना। आईपीडी (IPD) यानी भर्ती होकर इलाज कराना। आरजीएचएस में ओपीडी, आईपीडी से लेकर दवाइयां तक शामिल हैं। MAA योजना में आईपीडी है।
RGHS बनाम MAA योजना अंतर: पात्रता और प्रीमियम
आरजीएचएस योजना सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए है। MAA में अन्य परिवार जुड़े हुए हैं। दोनों योजनाओं में प्रीमियम भी अलग-अलग हैं। इसलिए सीधी तुलना करते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
आरजीएचएस 13.63 लाख परिवार बनाम MAA योजना 1.43 करोड़ परिवार
अब परिवारों की संख्या देखिए। आरजीएचएस 13.63 लाख परिवार से जुड़ा है। MAA योजना 1.43 करोड़ परिवार तक पहुंची है। यह अंतर करीब 10 गुना है। फिर भी दोनों का सालाना बजट एक जैसा है। तो सवाल उठता है कि बजट बराबर है तो परिवार पर खर्च कितना अलग है?
प्रति परिवार खर्च RGHS MAA: कितना फर्क?
परिवारों के हिसाब से औसत देखें तो फर्क साफ दिखता है। MAA में प्रति परिवार करीब 2100 रुपए खर्च हो रहे हैं। आरजीएचएस में प्रति परिवार करीब 22 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं। यानी आरजीएचएस में एक परिवार पर करीब 10 गुना ज्यादा खर्च है। हालांकि दोनों योजनाओं का दायरा अलग है।
RGHS और MAA सालाना 3 हजार करोड़ बजट: क्लेम कितने?
RGHS और MAA सालाना 3 हजार करोड़ बजट के साथ चल रही हैं। दोनों को मिलाकर हर साल करीब 2 करोड़ क्लेम हो रहे हैं। योजनाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाती है। जरूरत के हिसाब से उचित बदलाव किए जाते हैं।
MAA योजना 2179 पैकेज: कितने अस्पताल जुड़े?
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में प्रदेश के 1.43 करोड़ परिवार रजिस्टर्ड हैं। सरकारी और प्राइवेट मिलाकर 1800 अस्पताल जुड़े हुए हैं। योजना में अलग-अलग बीमारियों के लिए MAA योजना 2179 पैकेज शामिल हैं। पैकेज यानी किसी बीमारी के इलाज के लिए तय किया गया खर्च।
दो साल में कितने मरीजों का इलाज हुआ?
2024 और 2025 में 34,71,638 मरीजों का इलाज हुआ। यानी एक साल में 17 लाख से ज्यादा मरीज इलाज करवा रहे हैं। इन दो सालों में 58 लाख मरीजों के क्लेम सबमिट हुए। सरकार ने 5645 करोड़ रुपए का भुगतान किया। अब नजर इस पर रहेगी कि दोनों योजनाओं की समीक्षा में क्या बदलाव होते हैं।
यह खबर क्यों जरूरी है:
सरकारी कर्मचारी और आम परिवार, दोनों इलाज के लिए इन योजनाओं पर निर्भर हैं। हर साल 6 हजार करोड़ रुपए का बजट जनता के पैसे से जुड़ा है। यह जानना जरूरी है कि पैसा किस योजना में कितना और किसके इलाज पर खर्च हो रहा है। परिवारों की संख्या और प्रति परिवार खर्च का अंतर नीतिगत चर्चा का विषय बन सकता है। योजनाओं की सुविधाएं और पात्रता समझने से लोग सही योजना का लाभ उठा सकते हैं।
FAQs :
- आरजीएचएस और MAA योजना में क्या अंतर है?
आरजीएचएस योजना सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों के लिए है, जिसमें ओपीडी और आईपीडी की सुविधा है। जबकि MAA योजना में परिवारों को कैशलेस उपचार मिलता है। - आरजीएचएस और MAA योजना के तहत प्रति परिवार खर्च कितना है?
आरजीएचएस में प्रति परिवार करीब 22 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं, जबकि MAA में यह खर्च लगभग 2100 रुपए है। - राजस्थान सरकार के आरजीएचएस और MAA योजनाओं का कुल वार्षिक बजट क्या है?
राजस्थान सरकार आरजीएचएस और MAA योजनाओं पर हर साल 3-3 हजार करोड़ रुपए का बजट खर्च करती है।