हाईकोर्ट ने रोटेशन रोस्टर के उल्लंघन पर तीन सरपंच सीट की रद्द, 7 दिन में नई लॉटरी के आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने भरतपुर जिले की ग्राम पंचायत बारिघा,करौली जिले की ग्राम पंचायत श्री महावीर जी और करौली जिले की ही ग्राम पंचायत अकबरपुर में सरपंच पद के लिए किए गए आरक्षण आवंटन को रोटेशन नियम का उल्लंघन होने के आधार पर रद्द कर दिया है।
कोर्ट ने सरकार को सात दिनों में रोटेशन नियमों के अनुसार नए सिरे से लॉटरी निकालने के आदेश दिए हैं। जस्टिस आनंद शर्मा ने यह आदेश रविंद्र सिंह,धीरज जाटव व महेंद्र सिंह की याचिकाओंं को मंजूर करते हुए दिए।
रोटेशन का उल्लंघन
हाईकोर्ट ने माना है कि निर्धारित रोटेशन साईकल को पूरा किए बिना किसी श्रेणी के आरक्षण को दोहराना भारतीय संविधान और राजस्थान पंचायती राज अधिनियम- 1994 की धारा 15 और राजस्थान पंचायती राज निर्वाचन नियम, 1994 के नियम 7 का उल्लंघन है।
पुनर्गठन से नहीं होता रोस्टर रिसेट
अदालत ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि नई पंचायत समिति के गठन या पुनर्गठन से नए सिरे से आरक्षण रोटेशन शुरू करने की अनुमति मिल जाती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जहाँ ग्राम पंचायत की भौगोलिक सीमाएँ अपरिवर्तित रहती हैं वहाँ पिछले चुनावों के आरक्षण रोटेशन का पालन किया जाना जरुरी है।
विभागीय परिपत्रों से ही है स्पष्ट
कोर्ट ने कहा कि 10 अगस्त 2026, 16 अगस्त 2026 और 19 सितंबर 2026 के प्रशासनिक परिपत्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि पुनर्गठित इकाइयों में भी पूर्व में आरक्षित श्रेणियों को तब तक दोहराया नहीं जाना चाहिए जब तक कि साईकल पूरी न हो जाए।
कोर्ट ने कहा है कि मशीनी अंदाज में गणितीय प्रक्रिया संविधान की जरुरत को पूरा नहीं करती। आरक्षण का लाभ किसी एक श्रेणी या सीट तक सीमित न रहे, इसके लिए रोटेशन की साईकल का पालन सभी मौका देने की मूल भावना के साथ किया जाना चाहिए।
कानून के विपरीत पुनरावृत्ति
संबंधित ग्राम पंचायतों के निवासी एवं याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट तनवीर अहमद ने कोर्ट केा बताया कि अधिकारियों ने रोटेशन लागू करने के बजाय सरपंच पद के लिए अनुसूचित जाति श्रेणी के आरक्षण को गैर-कानूनी तरीके से दोहराया है।
उन्होंने ग्राम पंचायत बारिघा का उदहारण देकर कोर्ट को बताया कि ग्राम पंचायत बारिघा में सरपंच पद 1995 में SC (महिला), 2000 में OBC (सामान्य), 2005 में अनारक्षित (सामान्य), 2010 में OBC (महिला), 2015 में SC (सामान्य) और 2020 में अनारक्षित (सामान्य) रहा था। पिछले छह चुनावों में से दो बार SC श्रेणी को आरक्षण मिलने के कारण, रोटेशन क्रम के अनुसार आगामी चुनाव में यह सीट अनारक्षित या ओबीसी श्रेणी के लिए नियत होनी चाहिए थी।
नियमों के विपरीत एससी श्रेणी को पुनः आरक्षित करने से अन्य योग्य गैर-एससी उम्मीदवारों के पंचायती राज चुनावों में चुनाव लड़ने के संविधानिक अधिकार का हनन हुआ है।