RPSC बदलेगा पेपर पैटर्न, घट सकता है कठिन प्रश्नों का प्रतिशत
समझें क्या है पूरा मामला
- RPSC ने कम पास प्रतिशत वाली परीक्षाओं की समीक्षा शुरू की।
- आयोग अध्यक्ष केसरी सिंह ने स्पेशल कमेटी बनाई।
- कमेटी प्रश्नपत्रों को सरल, मध्यम और कठिन श्रेणी में बांटेगी।
- 27 अगस्त को अंतरिम और 31 अगस्त को फाइनल रिपोर्ट आएगी।
- रिपोर्ट के बाद RPSC परीक्षा पैटर्न में बदलाव कर सकता है।
RPSC भर्ती परीक्षाओं में कई अभ्यर्थी न्यूनतम अंक तक नहीं ला पाए। आयोग अध्यक्ष केसरी सिंह ने इस पर स्पेशल कमेटी बनाई है। कमेटी सभी प्रश्नपत्रों को सरल, मध्यम और कठिन श्रेणी में बांटेगी। पहली रिपोर्ट 27 अगस्त और फाइनल रिपोर्ट 31 अगस्त को आएगी। रिपोर्ट के बाद परीक्षा पैटर्न में बदलाव संभव है।
आयोग क्यों हुआ गम्भीर
भर्ती परीक्षाओं में कैंडिडेट्स के न्यूनतम नंबर नहीं आने पर राजस्थान लोक सेवा आयोग प्रबंधन गम्भीर है। आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह ने इसके लिए एक स्पेशल इंटरनल कमेटी बनाई है।
यह कमेटी विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की समीक्षा करेगी। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद भर्ती परीक्षाओं के पैटर्न में बदलाव किया जा सकता है। आयोग चाहता है कि पास प्रतिशत का स्तर बेहतर हो।
कैसे होगी पेपर की समीक्षा
सूत्रों के अनुसार कमेटी सभी प्रश्नपत्रों को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटेगी। ये श्रेणियां सरल, मध्यम और कठिन होंगी। इससे परीक्षाओं के कठिनाई स्तर का सटीक मूल्यांकन हो सकेगा।
कमेटी यह काम दो चरणों में पूरा करेगी। पहली अंतरिम रिपोर्ट 27 अगस्त को आयोग अध्यक्ष को सौंपी जाएगी। अंतिम यानी फाइनल रिपोर्ट 31 अगस्त को दी जाएगी।
फाइनल रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग प्रश्नपत्रों के विश्लेषण से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करेगा। परीक्षाओं के आयोजन से जुड़े तकनीकी बिंदु और नियम भी विस्तार से बताए जाएंगे। आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों के जवाब भी इसी दौरान दिए जाएंगे।
घट सकता है कठिन सवालों का हिस्सा
फिलहाल RPSC के पेपर पैटर्न में 30 प्रतिशत सरल, 30 प्रतिशत मध्यम और 40 प्रतिशत कठिन प्रश्न पूछे जाते हैं। अगर कमेटी बदलाव की सिफारिश करती है, तो यह अनुपात बदल सकता है।
ऐसी स्थिति में कठिन प्रश्नों का प्रतिशत घटाया जा सकता है। इसके बदले सरल या मध्यम प्रश्नों का हिस्सा बढ़ाया जा सकता है। इससे अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अंक हासिल करना आसान हो सकता है।
किन भर्तियों में आई दिक्कत
स्कूल लेक्चरर एवं कोच भर्ती में कई विषयों में पास प्रतिशत बेहद कम रहा। राजनीति विज्ञान के 225 पदों पर सिर्फ 6 कैंडिडेट्स पास हुए। गृह विज्ञान के 16 पदों पर केवल 2 अभ्यर्थी पास हो सके।
चित्रकला के 35 पदों पर सिर्फ 8 और पंजाबी के 11 पदों पर 7 कैंडिडेट्स पास हुए। समाजशास्त्र के 16 पदों पर 10 अभ्यर्थी सफल रहे। उर्दू विषय के 26 पदों पर 23 कैंडिडेट्स पास हुए। कॉमर्स के 340 पदों पर 284 कैंडिडेट्स ही पास हो पाए।
संस्कृत शिक्षा भर्ती में बड़ा झटका
सहायक आचार्य संस्कृत शिक्षा विभाग परीक्षा 2024 का परिणाम भी चौंकाने वाला रहा। धर्मशास्त्र, ज्योतिष फलित और यजुर्वेद विषय में एक भी कैंडिडेट पास नहीं हो सका।
इंटरव्यू तक पहुंचने के लिए अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक लाने थे। लेकिन तीनों विषयों में किसी भी कैंडिडेट के इतने अंक नहीं आए।
साइंस विषय में भी कम चयन
सीनियर टीचर माध्यमिक शिक्षा विभाग परीक्षा 2024 के विज्ञान विषय में भी असर दिखा। इस विषय के लिए 350 पद थे, लेकिन पात्रता जांच के लिए केवल 296 कैंडिडेट्स सिलेक्ट हुए।
न्यूनतम अंक हासिल नहीं करने के कारण पदों के मुकाबले कम कैंडिडेट्स चुने गए। यह स्थिति भी आयोग की चिंता की एक बड़ी वजह बनी।
डिप्टी जेलर और SI भर्ती पर भी फोकस
आयोग अध्यक्ष केसरी सिंह ने पुरानी परीक्षाओं की समीक्षा के साथ लंबित भर्तियों की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं। डिप्टी जेलर भर्ती 2024 को इसमें विशेष प्राथमिकता दी गई है।
इसी महीने डिप्टी जेलर भर्ती के साक्षात्कार के लिए सफल अभ्यर्थियों की सूची जारी होगी। इसके बाद साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सब इंस्पेक्टर भर्ती 2025 के साक्षात्कार की रूपरेखा तैयार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
FAQ
- RPSC ने न्यूनतम अंक को लेकर कमेटी क्यों बनाई है?
कई भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थी न्यूनतम अंक नहीं ला पाए थे। इसी वजह से आयोग अध्यक्ष ने कमेटी बनाई है। कमेटी पेपर पैटर्न की समीक्षा करेगी। - न्यूनतम अंक को लेकर RPSC कमेटी की रिपोर्ट कब आएगी?
कमेटी की पहली अंतरिम रिपोर्ट 27 अगस्त को आएगी। फाइनल रिपोर्ट 31 अगस्त को सौंपी जाएगी। इसके बाद पैटर्न में बदलाव संभव है। - RPSC के मौजूदा पेपर पैटर्न में कठिन सवालों का प्रतिशत कितना है?
फिलहाल पेपर में 40 प्रतिशत कठिन प्रश्न पूछे जाते हैं। 30 प्रतिशत सरल और 30 प्रतिशत मध्यम स्तर के होते हैं। कमेटी की सिफारिश पर यह अनुपात बदल सकता है।
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