कृषि विज्ञान भर्ती परीक्षा 2022: पेपर लीक मामले में पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष को SOG का नोटिस

Jageshwar prasad | May 12, 2026, 12:33 IST
Photograph: (THE SOOTR)
राजस्थान में पेपर लीक मामले की आंच अब RPSC के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. शिव सिंह राठौड़ तक पहुंच गई है। SOG ने उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। बाबूलाल कटारा और शेर सिंह मीणा से आमने-सामने की पूछताछ के बाद यह कार्रवाई की गई है।

News In Short

  • RPSC के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. शिव सिंह राठौड़ को SOG ने नोटिस भेजा।
  • कृषि विज्ञान भर्ती परीक्षा 2022 के पेपर लीक मामले में उनसे पूछताछ होगी।
  • बाबूलाल कटारा ने 60 लाख रुपए और पेपर के बदले पेपर की डील की थी।
  • कटारा ने अपने भांजे के लिए भूगोल का पेपर माफिया शेर सिंह से मांगा था।
  • मेरिट में तीसरी रैंक लाने वाले छात्र ने 7 लाख में पेपर खरीदना स्वीकार किया।

News In Detail

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित कृषि विज्ञान भर्ती परीक्षा 2022 में पेपर लीक की जांच का दायरा अब बढ़ा दिया गया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने RPSC के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. शिव सिंह राठौड़ को नोटिस दिया है और उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया है।



यह पूरी कार्रवाई बाबूलाल कटारा और पेपर माफिया शेर सिंह मीणा के बयानों के बाद हुई है। SOG दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर रही है। इसमें आयोग के भीतर बैठे कई अन्य लोगों की मिलीभगत के संकेत मिले हैं।



पेपर के बदले पेपर की अनोखी डील

SOG की जांच में एक बहुत ही अजीबोगरीब समझौता सामने आया है। पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा के पास कृषि विज्ञान का पेपर था। उसने यह पेपर माफिया शेर सिंह को 60 लाख रुपये में बेच दिया। लेकिन कटारा ने केवल पैसा ही नहीं लिया। उसने शेर सिंह से अपने भांजे के लिए भूगोल का पेपर भी मांगा। उसका भांजा विजय डामोर भूगोल विषय का छात्र था।



सरकारी घर में लाया पेपर

जांच में खुलासा हुआ कि कटारा ने अपने पद का जमकर दुरुपयोग किया। उसने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र को अपने सरकारी घर मंगवा लिया। वहां उसके भांजे विजय ने पूरे पेपर को एक रजिस्टर में हाथ से लिखा।



यही रजिस्टर बाद में पेपर लीक का मुख्य जरिया बना। इस लिखित सामग्री को शेर सिंह मीणा के हवाले कर दिया गया। शेर सिंह ने इसे आगे भूपेंद्र सारण और सुरेश ढाका जैसे बड़े माफियाओं को सप्लाई किया। इन माफियाओं ने करोड़ों रुपए में यह पेपर आगे बेचा।



तीसरी रैंक वाले टॉपर ने खोली पोल

इस बड़े घोटाले का सच तब सामने आया जब तीसरी रैंक लाने वाले अशोक यादव को पकड़ा गया। अशोक का पुराना रिकॉर्ड बहुत ही साधारण था। लेकिन इस परीक्षा में उसने कमाल के अंक हासिल किए थे।



जांच में पता चला कि उसे कृषि विज्ञान में 300 में से 239 अंक मिले। जबकि सामान्य ज्ञान में वह बहुत पीछे रह गया। अशोक ने कबूल किया कि उसने 7 लाख रुपए में पेपर खरीदा था। उसे केवल विषय का पेपर ही मिल पाया था। सामान्य ज्ञान का नहीं।



फर्जी डिग्री का बैकडेट खेल

ADG विशाल बंसल के मुताबिक, जांच का एक सिरा ओपीजेएस विश्वविद्यालय से भी जुड़ा है। यहां से कई छात्रों को पुरानी तारीखों में फर्जी डिग्रियां दी गईं। इसमें बी.एड और एम.एससी. जैसी महत्वपूर्ण मार्कशीट शामिल थीं।



फागी में तैनात शिक्षिका अनिता चौधरी और सीकर का अशोक यादव इसी फर्जीवाड़े का हिस्सा रहे। इन लोगों ने जाली कागजों के दम पर सरकारी नौकरी हासिल कर ली थी। SOG अब इन सभी फर्जी डिग्रियों की गहराई से जांच कर रही है।



भांजे ने नहीं देखा पेपर

पूछताछ में शेर सिंह मीणा ने बताया कि उसने वादे के मुताबिक पेपर भेज दिया था। परीक्षा वाले दिन उसने विजय डामोर को मोबाइल पर पेपर भेजा। लेकिन विजय की किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया और वह मोबाइल नहीं देख सका।



विजय बिना पेपर देखे ही परीक्षा केंद्र के अंदर चला गया। इस कारण वह लीक पेपर का फायदा नहीं उठा पाया। SOG अब यह देख रही है कि कटारा के समय और कितनी परीक्षाएं प्रभावित हुईं।



अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

डॉ. शिव सिंह राठौड़ से SOG पूछताछ क्यों कर रही है?

डॉ. शिव सिंह राठौड़ RPSC के पूर्व सदस्य और कार्यवाहक अध्यक्ष रह चुके हैं। कृषि विज्ञान भर्ती परीक्षा 2022 के पेपर लीक मामले में मुख्य आरोपी बाबूलाल कटारा और शेर सिंह मीणा से हुई पूछताछ में कुछ नए तथ्य सामने आए हैं। इन्हीं तथ्यों की पुष्टि और आयोग की कार्यप्रणाली की जांच के लिए उन्हें नोटिस दिया गया है।



बाबूलाल कटारा और शेर सिंह के बीच पेपर के बदले पेपर की डील क्या थी?

यह एक अनोखा मामला था जिसमें आरोपी बाबूलाल कटारा ने शेर सिंह को कृषि विज्ञान का पेपर 60 लाख रुपए में दिया। इसके बदले में उसने अपने भांजे विजय डामोर के लिए भूगोल विषय का पेपर मांगा था। कटारा के पास भूगोल का पेपर नहीं था, इसलिए उसने माफिया के साथ यह अवैध अदला-बदली की कोशिश की।



तीसरी रैंक वाले अभ्यर्थी अशोक यादव पर शक कैसे हुआ?

अशोक यादव का शैक्षणिक रिकॉर्ड बहुत सामान्य था, लेकिन परीक्षा में उसके अंकों के बीच भारी अंतर देखा गया। उसे विषय (कृषि विज्ञान) में तो 300 में से 239 अंक मिले, लेकिन सामान्य ज्ञान में वह काफी पिछड़ गया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने 7 लाख रुपये में सॉल्व्ड पेपर खरीदा था, जिससे उसकी पोल खुल गई।



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