डिलीट सवालों का अब नहीं होगा नेगेटिव असर, पूरे पेपर में बराबर बंटेंगे अंक

Ashish Bhardwaj | Mar 25, 2026, 16:24 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएसबी) ने डिलीट प्रश्नों के अंक वितरण और नेगेटिव मार्किंग में बदलाव किया है। अब डिलीट प्रश्न के अंक पूरे पेपर में समान रूप से बांटे जाएंगे। नेगेटिव मार्किंग मूल अंक पर आधारित होगी।

News In Short

  • आरएसएसबी ने डिलीट प्रश्नों के अंक वितरण और नेगेटिव मार्किंग में किया बदलाव।
  • अब डिलीट प्रश्नों का नेगेटिव असर नहीं, अंक पूरे पेपर में बराबर बांटे जाएंगे।
  • नेगेटिव मार्किंग में भी राहत, गलत उत्तर पर बढ़े हुए अंक का असर नहीं होगा।
  • इस नई व्यवस्था से प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले अभ्यर्थियों को मिलेगी राहत।
  • देशभर की भर्ती एजेंसियां की निगाह राजस्थान का इस मॉडल पर।

News In Detail

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएसबी) ने डिलीट होने वाले प्रश्नों के अंक वितरण और नेगेटिव मार्किंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब डिलीट हुए प्रश्नों के अंक पूरे पेपर में समान रूप से बांटे जाएंगे, जिससे उम्मीदवारों को एक समान लाभ मिलेगा। इसके साथ ही नेगेटिव मार्किंग में भी राहत मिलेगी।



अब तक की व्यवस्था में क्या था गलत?

अब तक यदि किसी विषय का प्रश्न डिलीट होता था तो उसके अंक उसी विषय के अन्य प्रश्नों में बांट दिए जाते थे। उदाहरण के तौर पर अगर प्रतियोगी परीक्षा के हिस्ट्री विषय के कुल 15 प्रश्न हैं, जबकि कुल अंक 45 हैं।



ऐसे में हिस्ट्री का 3 नंबर का एक प्रश्न डिलीट हो जाता था तो इन 3 अंकों को बाकी 14 प्रश्नों में बांट दिया जाता था। इससे कुछ अभ्यर्थियों को फायदा होता था, लेकिन गलत उत्तर देने वालों के लिए यह और ज्यादा कठिन हो जाता था, क्योंकि बढ़े हुए अंकों के आधार पर नेगेटिव मार्किंग का भार भी बढ़ जाता था।



नई व्यवस्था के फायदे

अब डिलीट प्रश्न के अंक पूरे पेपर में समान रूप से बांटे जाएंगे। इससे कैलकुलेशन आसान हो जाएगा और सभी उम्मीदवारों पर इसका समान प्रभाव पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर अगर 100 प्रश्नों में से 1 प्रश्न डिलीट होता है तो उसके अंक बाकी 99 प्रश्नों में समान रूप से जुड़ जाएंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा उन छात्रों को मिलेगा, जो परीक्षा पैटर्न में ज्यादा पारंगत नहीं हैं।



नेगेटिव मार्किंग में राहत

अब गलत उत्तर पर 1/3 नेगेटिव मार्किंग 'मूल अंक' के आधार पर होगी। यानी बढ़े हुए अंक का असर नेगेटिव मार्किंग पर नहीं पड़ेगा। इससे उन उम्मीदवारों को राहत मिलेगी, जिनके कई उत्तर गलत होते थे। यह बदलाव विशेष रूप से पहली बार प्रतियोगी परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के लिए फायदेमंद होगा।



इनके लिए बनेगा संजीवनी

मेजर जनरल आलोक राज ने स्पष्ट किया कि इस जटिल गणना के कारण सबसे ज्यादा नुकसान एससी, एसटी, टीएसपी क्षेत्र, खिलाड़ियों, पूर्व सैनिकों और विधवा/तलाकशुदा महिलाओं को होता था। कई बार वे बढ़ी हुई नेगेटिव मार्किंग के कारण न्यूनतम योग्यता अंक भी पार नहीं कर पाते थे। यह नया सिस्टम उनके लिए एक सुरक्षा कवच का काम करेगा।



बोर्ड अध्यक्ष के अनुसार, देश की कई अन्य भर्ती एजेंसियां जो वर्तमान में 'बोनस मार्क्स' जैसी पुरानी व्यवस्था अपना रही हैं, वे भी अब राजस्थान के इस 'इक्विटेबल डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल' को अपनाने पर विचार कर रही हैं।



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