हल्दीघाटी युद्ध महाराणा प्रताप ने जीता, इतिहासकारों ने गलत लिखा, भागवत का दावा
समझें क्या है पूरा मामला
- मोहन भागवत बोले- हल्दीघाटी युद्ध महाराणा प्रताप ने जीता, इतिहासकारों ने गलत लिखा।
- भागवत ने कहा- मुगल इतिहासकारों ने भी लिखा है कि मुगलों को पीछे खिसकना पड़ा।
- उन्होंने कहा- अकबर की जयंती कहीं नहीं मनाई जाती, प्रताप की जयंती पूरे देश में मनाई जाती है।
- आगे कहा- हमारा इतिहास गुलामी का नहीं, गुलाम करने वालों के खिलाफ संघर्ष का है।
- निम्बार्क पीठ के पीठाधीश्वर ने कॉकरोच की बात करने पर भागवत मुस्कुराने लगे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में विजय केवल महाराणा प्रताप की हुई थी। इतिहासकारों ने गलत नैरेटिव बनाया। उन्होंने कहा कि मुगल इतिहासकारों ने खुद लिखा है कि मुगलों को पीछे हटना पड़ा था।
भागवत उदयपुर में महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। आज ही हल्दीघाटी युद्ध के 450 साल पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर तीन दिवसीय राष्ट्र चेतना संकल्प सभा का आयोजन किया जा रहा है। उदयपुर के गांधी ग्राउंड में हुई इस सभा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित भाजपा के कई बड़े नेता मौजूद रहे।
अकबर की जयंती नहीं मनती
भागवत ने सरल भाषा में इस पूरे विमर्श को सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज महाराणा प्रताप की जयंती मनाई जा रही है। क्या कोई अकबर की जयंती मनाता है? कहीं नहीं।
उनके अनुसार यही सबसे बड़ा प्रमाण है कि हल्दीघाटी का असली विजेता कौन था। लोगों के दिलों में जो स्थान है, वही सच्चा इतिहास बोलता है।
मुगल इतिहासकारों ने भी माना
भागवत ने कहा कि यह उनका नहीं, मुगल इतिहासकारों का ही कहना है कि उन्हें पीछे खिसकना पड़ा था। तीन हमलों के तथ्यों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि मुगल सेना के साथ क्या हुआ। उन्हें केवल एक हाथी मिला था।
सेना और शस्त्र में अकबर का पलड़ा भारी था, फिर भी प्रताप की सेना ने उन्हें वापस खदेड़ा। भागवत ने कहा कि धन और शस्त्र कम होने के बावजूद प्रताप की सेना ने जो किया, वह इतिहासकारों ने गलत तरीके से प्रस्तुत किया।
पूरा समाज लड़ा था प्रताप के साथ
भागवत ने एक और महत्वपूर्ण बात कही। हल्दीघाटी में केवल महाराणा प्रताप या उनकी सेना नहीं लड़ी बल्कि पूरा समाज लड़ा था।
उन्होंने कहा कि हम भारत के लोग कभी गुलाम नहीं होते। जब भी कोई आक्रांता भारत की भूमि पर पैर रखता है, उसी दिन से उसे हटाने के प्रयास शुरू हो जाते हैं।
उन्होंने बप्पा रावल और ललितादित्य का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके जैसे वीरों के कारण ही वह आंधी जो स्पेन से साइबेरिया तक फैली थी, भारत के भीतर नहीं घुस सकी।
हमारा इतिहास संघर्ष का है, गुलामी का नहीं
भागवत ने कहा कि हमारा इतिहास गुलामी का नहीं है। हमारा इतिहास गुलाम करने वालों के खिलाफ निरंतर संघर्ष का है। उन्होंने कहा कि हमने सब कुछ खोकर भी अपना धर्म और संस्कृति नहीं खोई। यही हमारी सबसे बड़ी विरासत है।
आज भी हम आपस में बहुत लड़ते हैं, लेकिन बाहरी शत्रु के खिलाफ एक हो जाते हैं। महाराणा प्रताप ने भी एकता के लिए हमेशा आवाज उठाई।
पीठाधीश्वर की बात पर मुस्कुराए भागवत
सभा में निम्बार्क पीठ के पीठाधीश्वर श्याम शरण देवाचार्य ने कहा कि निर्मल कीचड़ से कमल का जन्म होता है, जबकि मलयुक्त कीचड़ से केवल कॉकरोच। हमें निर्मल कमल की ओर बढ़ना होगा। उनकी इस बात पर मोहन भागवत भी मुस्कुराने लगे।
FAQ
- मोहन भागवत ने हल्दीघाटी के बारे में क्या कहा?
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने उदयपुर में कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में विजय महाराणा प्रताप की हुई थी। इतिहासकारों ने गलत नैरेटिव बनाया। उन्होंने कहा कि मुगल इतिहासकारों ने खुद माना कि वे पीछे हट गए थे और केवल एक हाथी ही उन्हें मिला था। - राष्ट्र चेतना संकल्प सभा क्यों आयोजित हुई?
महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती और हल्दीघाटी युद्ध के 450 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में उदयपुर में तीन दिवसीय राष्ट्र चेतना संकल्प सभा आयोजित की गई। गांधी ग्राउंड में आयोजित इस सभा में RSS प्रमुख, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और अन्य भाजपा नेता शामिल हुए। - मोहन भागवत के अनुसार हमारा इतिहास कैसा है?
भागवत ने कहा कि भारत का इतिहास गुलामी का नहीं बल्कि गुलाम करने वालों के खिलाफ निरंतर संघर्ष का इतिहास है। बप्पा रावल और ललितादित्य जैसे वीरों ने विदेशी आक्रमणकारियों को रोका। धर्म और संस्कृति हमारी सबसे बड़ी विरासत रही है।
ये भी पढ़ें:-
गुजरात में स्लीपर बस का हादसा, राजस्थान के 7 यात्रियों की मौत
बोगस फर्मों के खातों से उठाया भुगतान, 60 लाख रुपए का घोटाला उजागर
राहुल गांधी पहुंचे कोटा, शिक्षा पर देशव्यापी अभियान की करेंगे शुरुआत
राजस्थान के राज्य पक्षी की संख्या 94 हुई, 3 नए चूजों का जन्म