झूठा शपथ पत्र देकर बने प्रोफेसर, तीन नर्सिंग प्रोफेसर अयोग्य घोषित

Ashish Bhardwaj | Aug 02, 2026, 14:23 IST
झूठा शपथ पत्र देकर बने प्रोफेसर
RUHS ने राजस्थान के तीन नर्सिंग कॉलेजों के प्रोफेसरों पर बड़ा एक्शन लिया है। इन्होंने झूठा शपथ पत्र देकर नियुक्ति ली थी, जबकि पहले से दूसरे राज्यों में नौकरी कर रहे थे। यूनिवर्सिटी ने तीनों को 5 साल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • RUHS ने 3 नर्सिंग प्रोफेसरों पर की सख्त कार्रवाई
  • झूठे शपथ पत्र देकर ली थी नियुक्ति
  • अगले 5 साल के लिए तीनों प्रोफेसर अयोग्य
  • दूसरे राज्यों में नौकरी करते हुए मिली थी नियुक्ति
  • कॉलेजों को तुरंत हटाने के दिए निर्देश

राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय यानी RUHS ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के तीन अलग-अलग नर्सिंग कॉलेजों के प्रोफेसरों पर सख्त कार्रवाई हुई है। इन तीनों ने झूठा शपथ पत्र देकर नियुक्ति हासिल की थी। असल में वे पहले से दूसरे राज्यों के कॉलेजों में फुल टाइम प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहे थे।



यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आदेश जारी कर इन्हें अगले 5 साल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। सभी संबंधित नर्सिंग कॉलेजों को इन्हें तुरंत हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।



कैसे मिली शिकायत

यह पूरा मामला एक शिकायत से शुरू हुआ था। कुछ समय पहले RUHS प्रशासन को इन तीनों प्रोफेसरों के खिलाफ शिकायत मिली थी। शिकायत में बड़ा आरोप लगाया गया था।



आरोप था कि ये तीनों पहले से दूसरे राज्यों के नर्सिंग कॉलेजों में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने राजस्थान के कॉलेजों में भी नियुक्ति ले ली। इसके लिए उन्होंने झूठा शपथ पत्र दिया था। इसी शपथ पत्र के आधार पर उन्हें अलग-अलग शहरों में प्रोफेसर पद पर स्वीकृति मिल गई थी।



किस-किस पर हुई कार्रवाई

जांच में तीनों मामलों की अलग-अलग जानकारी सामने आई। पहला मामला कोटा के सर्वोदय कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल एंड नर्सिंग एजुकेशन का है। यहां हितेश चौधरी ने प्रोफेसर पद के लिए स्वीकृति ली थी। लेकिन वे पहले से रायपुर एम्स में फुल टाइम प्रोफेसर के तौर पर सेवाएं दे रहे थे।



दूसरा मामला उदयपुर के अरावली कॉलेज ऑफ नर्सिंग का है। यहां कल्पेश प्रोफेसर पद पर नियुक्त हुए थे। लेकिन वे गुजरात के भरूच स्थित सेवाश्रम नर्सिंग कॉलेज में नौकरी कर रहे थे।



तीसरा मामला दौसा के राजस्थान कॉलेज ऑफ बी.एससी. नर्सिंग कॉलेज से जुड़ा है। यहां दिनेश पाटीदार प्रोफेसर पद पर तैनात थे। लेकिन वे मध्य प्रदेश के नीमच स्थित ज्ञानोदय कॉलेज ऑफ नर्सिंग में फुल टाइम प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहे थे।



जांच में सही निकली शिकायत

RUHS प्रशासन ने शिकायत मिलने के बाद गहराई से जांच की। जांच में सभी शिकायतें सही पाई गईं। तीनों प्रोफेसरों पर एक साथ दो जगह नौकरी करने की पुष्टि हुई।



इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कड़ा फैसला लिया। तीनों प्रोफेसरों को अगले 5 साल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। अब ये तीनों RUHS से एफिलिएटेड किसी भी कॉलेज में प्रोफेसर, शिक्षक या किसी भी शैक्षणिक पद पर नियुक्ति नहीं ले सकेंगे।



दूसरे राज्यों को भी लिखा जाएगा पत्र

यूनिवर्सिटी प्रशासन यहीं नहीं रुका है। जिन दूसरे राज्यों के कॉलेजों में ये तीनों अभी सेवाएं दे रहे हैं, वहां भी पत्र भेजा जाएगा। इस पत्र में इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही का आग्रह किया जाएगा।



इसके साथ ही राजस्थान के जिन कॉलेजों में इन्होंने नियुक्ति ली थी, उन्हें भी निर्देश दिए गए हैं। इन कॉलेजों को तीनों प्रोफेसरों को तुरंत हटाने के लिए कहा गया है।



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