अचानक सचिन पायलट को क्यों याद आए चंद्रास्वामी, जिन्हें उनके पिता ने भेजा था जेल
Jaipur: राजस्थान कांग्रेस में इन दिनों बयानों के तीर चल रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बयानबाजी के बीच कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने बुधवार को करौली के सकरघटी में अपने पिता दिवंगत राजेश पायलट की प्रतिमा का अनावरण किया।
इस भावुक मौके पर सचिन पायलट ने सियासत के गलियारों से जुड़ा एक ऐसा किस्सा सुनाया, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। यह किस्सा था देश के सबसे रसूखदार तांत्रिक चंद्रास्वामी की गिरफ्तारी का, जिसे सलाखों के पीछे भेजने की हिम्मत राजेश पायलट ने दिखाई थी।
यह सुनाया किस्सा
सचिन पायलट ने कहा कि दिल्ली में एक तांत्रिक था, जिसने अनेक प्रभावशाली लोगों को अपने कब्जे में कर रखा था। लेकिन उसकी गतिविधियों राष्ट्र हित में नहीं थी।
उन्होंने कहा कि तांत्रिक पर हाथ डालने में बहुत लोग कतराते थे। लेकिन उनके पिता पायलट साहब को मौका मिला। गृह मंत्रालय में काम करने के दौरान सबूत व तथ्य उनके सामने आए तो उन्होंने बिना डरे और परवाह किए कि उनका क्या होगा। सच्चाई व देशहित को सर्वोपरि मानकर उसके गिरफ्तारी के आदेश दिए थे।
इसके बाद इतना प्रभावशाली जिसके देश-विदेश के बड़े-बड़े लोग ढोक देते थे। उसे हथकड़ी लगाकर अंदर कर दिया था। उन्होंने कभी भी दबाव या प्रभाव में आकर अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। आज यह जो मूर्ति यहां लगी है, यह उसी बात का प्रतीक है।
सचिन पायलट बोले, मैं अभी भी कहता हूं कि मेरा व्यक्तिगत झगड़ा किसे से नहीं है। आप जानते हैं मैं संभलकर बोलता हूं। मैं जानता हूं कि मुंह से निकल गई बात वापस नहीं आती। उन्होंने कहा कि जीवन में न केवल सच्चाई के साथ खड़ा होना जरूरी है, बल्कि अनुशासन, संयम, संतोष और सम्मान देना भी जरूरी है।
कौन था चंद्रास्वामी?
बता दें कि राजस्थान के बहरोड़ में जन्मे चंद्रास्वामी महज़ एक तांत्रिक नहीं, बल्कि दिल्ली के सबसे बड़े पावर ब्रोकर माने जाते थे। हथियार कारोबारियों से लेकर राजनीति की हर बड़ी हस्ती से उनके संबंध थे।
देश-विदेश के दिग्गज राजनेता और उद्योगपति चंद्रास्वामी के सामने सिर झुकाते थे। दिल्ली की सत्ता में उनका दखल ऐसा था कि बड़े-बड़े अधिकारी उनके खिलाफ जाने की सोच भी नहीं सकते थे।
लखूभाई पाठक ठगी का वो मामला
चंद्रास्वामी के पतन की शुरुआत ब्रिटेन में मशहूर भारतवंशी बिजनेसमैन लखूभाई पाठक की एक शिकायत से हुई। पाठक ने आरोप लगाया कि साल 1987 में न्यूयॉर्क के एक होटल में चंद्रास्वामी ने उनकी मुलाकात पीवी नरसिम्हा राव (जो बाद में प्रधानमंत्री बने) से कराई थी।
चंद्रास्वामी ने पाठक को भारत में न्यूजप्रिंट सप्लाई का बड़ा सरकारी कॉन्ट्रैक्ट दिलाने का वादा किया और इसके बदले दो चेकों के जरिए 1 लाख अमेरिकी डॉलर (आज के करीब 1 करोड़ रुपए) लिए। बाद में चंद्रास्वामी अपने वादे से मुकर गए। इस मामले में चंद्रास्वामी और उनके सहयोगी मामाजी के साथ-साथ पीवी नरसिम्हा राव का नाम भी सह-आरोपी के तौर पर सामने आया।
पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में राजेश पायलट केंद्रीय गृह राज्य मंत्री थे। जब जांच के तथ्य उनके सामने आए तो उन्होंने साफ कर दिया कि कानून के सामने कोई भी तांत्रिक या रसूखदार बड़ा नहीं है।
चेन्नई के होटल से चंद्रास्वामी की गिरफ्तारी
राजेश पायलट के इसी कड़े रुख और सीधे निर्देश के बाद सीबीआई एक्शन में आई। 2 मई 1996 को कुख्यात तांत्रिक चंद्रास्वामी को चेन्नई के एक आलीशान होटल से गिरफ्तार कर हथकड़ी लगा दी गई। गिरफ्तारी के बाद चंद्रास्वामी को कई दिन दिल्ली की तिहाड़ जेल में रहना पड़ा।
हालांकि, इस कार्रवाई की कीमत राजेश पायलट को भी चुकानी पड़ी। चंद्रस्वामी की गिरफ्तारी के ठीक दो दिन बाद उन्हें गृह मंत्रालय से हटा दिया गया।
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