सचिन पायलट का चुनाव आयोग पर हमला, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की मांग
समझें क्या है पूरा मामला
- पायलट ने चुनाव आयोग पर बोला हमला।
- पहले नोटबंदी, अब वोटबंदी, बोले पायलट।
- ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की मांग।
- 13 करोड़ नाम हटने का दावा।
- राजस्थान में अकाल प्रबंधन पर सवाल।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में पहले नोटबंदी की गई और अब वोटबंदी की जा रही है। देश कानून और संविधान से चलता है।
लेकिन चुनाव आयोग (Election Commission) जैसी लोकतंत्र की महत्वपूर्ण संस्था की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दोनों चुनाव आयुक्तों को किनारे करके अपने स्तर पर चुनावी प्रक्रिया संचालित करने का आरोप लगाया।
बहुमत के नियम का जिक्र
पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने रविवार को जयपुर में मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग में तीन सदस्य होते हैं। महत्वपूर्ण निर्णय नियमों के अनुसार बहुमत से लिए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि तीनों सदस्य किसी प्रस्ताव पर सहमत हों तो अलग बात है। लेकिन यदि मतभेद हो तो दो सदस्यों के बहुमत का निर्णय लागू होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में दोनों चुनाव आयुक्तों को किनारे करके कई मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई गईं।
ERO की शक्ति पर सवाल?
मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर पायलट ने कहा कि इलेक्ट्रोल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी ईआरओ (ERO – Electoral Registration Officer) के पास मतदाता का नाम जोड़ने या हटाने की महत्वपूर्ण शक्ति होती है। लेकिन ज्ञानेश कुमार ने पूरी प्रक्रिया अपने स्तर पर केंद्रीकृत कर दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि निजी कार्यालय से लोगों के नाम जोड़ने-काटने का काम किया गया। पायलट ने दावा किया कि देशभर में करीब 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। सामान्य तौर पर आबादी बढ़ने के साथ मतदाताओं की संख्या भी बढ़ती है।
लेकिन यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने बिहार, पश्चिम बंगाल और हरियाणा का उदाहरण भी दिया।
नोटबंदी और वोटबंदी की तुलना
सचिन पायलट ने कहा कि देश में पहले नोटबंदी हुई थी। अब वोटबंदी की जा रही है। वोट लोकतंत्र में जनता का सबसे बड़ा हथियार है। यदि मतदाता के इसी अधिकार को कमजोर किया जाएगा तो चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि यह केवल कांग्रेस या इंडिया गठबंधन की चिंता नहीं है। बल्कि देश के नौजवानों और आम मतदाताओं के बीच भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर आशंका पैदा हुई है। यह गंभीर मुद्दा है।
14 बार आपत्ति का दावा
पायलट ने दावा किया कि चुनाव आयोग के निर्वाचित दो सदस्यों ने 14 बार ऑन रिकॉर्ड इस प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। यदि चुनाव आयोग जैसी संस्था के भीतर ही गंभीर मतभेद सामने आ रहे हैं तो इसकी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर चर्चा होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि देशभर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ आंदोलन हो रहे हैं। लोगों की मांग है कि उन्हें न्याय मिले। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें इतनी ताकत देने का काम प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री की ओर से किया जा रहा है।
अकाल प्रबंधन पर सवाल
सचिन पायलट ने प्रदेश में अकाल प्रबंधन में सरकार के विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार अकाल राहत में ध्यान देने की बजाय चुनाव प्रबंधन में लगी रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि शहरी निकाय चुनाव में मतदान और मतगणना के बीच जानबूझकर अंतर बढ़ाया गया। पुलिस और प्रशासन का जमकर दुरुपयोग किया गया। सरकार ने पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाकर सत्तारूढ़ दल के पक्ष में पार्षदों को प्रभावित करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि चुनाव में जनता ने अपना जनादेश कांग्रेस के पक्ष में दिया। लेकिन चुनाव प्रक्रिया के दौरान जिस तरह की परिस्थितियां बनीं, उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
मानसून की तैयारी पर जोर
राजस्थान में सूखे और मानसून की कमी को लेकर पायलट ने कहा कि सरकार की प्लानिंग पूरी तरह विफल रही है। यदि सरकार दो महीने पहले मानसून को देखते हुए तैयारी करती और कंटिंजेंसी प्लान बनाकर काम करती तो मौजूदा संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
उन्होंने कहा कि मानसून की कमी के कारण प्रदेश के कई इलाकों में गंभीर संकट पैदा हुआ है। सरकार को अभी से राहत कार्यों की तैयारी करनी चाहिए। किसानों, पशुओं और आम लोगों को राहत पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
पंजाब में जीत का दावा
पायलट ने पंजाब विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से कांग्रेस की सरकार बनने का दावा किया। उन्होंने कहा कि पंजाब में कांग्रेस के पक्ष में माहौल है। लोग आम आदमी पार्टी की सरकार से त्रस्त हैं और चुनाव का इंतजार कर रहे हैं।
राज्य में नशे की समस्या लगातार गंभीर हो रही है। अब सामान्य ड्रग्स के बजाय केमिकल ड्रग्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जो बेहद घातक है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग नशे के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, उन्हें ही पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
आप पर तानाशाही का आरोप
उन्होंने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार तानाशाही कर रही है। आम आदमी पार्टी के विधायक ने शिक्षा के खिलाफ आवाज उठाई तो उसे ही सस्पेंड कर दिया गया। पंजाब में गैंगस्टर दिनदहाड़े लोगों को गोली मार रहे हैं।
पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है। ऐसी पुलिस किस काम की जो लोगों को सुरक्षा ही नहीं दे सकती। गैंगस्टर जेल में बैठकर फिरौती मांग रहे हैं। यह स्थिति चिंता की बात है।
बॉर्डर से तस्करी पर सवाल
पायलट ने कहा कि भाजपा पंजाब में नशा मुक्ति यात्रा निकाल रही है। लेकिन पंजाब बॉर्डर एरिया से सटा है। पाकिस्तान से ड्रग्स की तस्करी हो रही है। पूरा इलाका रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय के अधीन है।
तो फिर केंद्र सरकार उस पर लगाम क्यों नहीं लगा पा रही है। यह बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की भजनलाल सरकार तीन साल में ही जनता का विश्वास खो चुकी है। ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया। लोग तैयार बैठे हैं कि चुनाव कब आएं और कब राज्य में कांग्रेस की सरकार बने।