सलमान खान की फिल्म को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, हिरण शिकार से जुड़ा है मामला
समझें क्या है पूरा मामला
- सलमान खान की फिल्म टीजर पर दिल्ली HC की रोक।
- 24 घंटे में हटेगा ‘काला हिरण’ फिल्म का कंटेंट।
- AI मॉर्फिंग पर सलमान खान ने उठाया सवाल।
- 1998 काला हिरण केस फिर पहुंचा कोर्ट।
- डिजिटल छवि बचाने के लिए सलमान की कानूनी लड़ाई।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सलमान खान से जुड़ी फिल्म का टीज़र हटाने का आदेश दिया। फिल्म का नाम "काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी" है। कोर्ट ने कहा कि यह सामग्री सलमान खान की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। 24 घंटे में सभी डिजिटल लिंक हटाने का निर्देश दिया गया है। मामला 1998 के जोधपुर काला हिरण शिकार विवाद से जुड़ा है।
दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश
राजस्थान के जोधपुर का 1998 का बहुचर्चित काला हिरण शिकार मामला फिर सुर्खियों में है। यह मामला अब वन्यजीव संरक्षण से आगे बढ़कर डिजिटल अधिकारों तक पहुंच गया है। इसमें अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग का सवाल भी जुड़ गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को सख्त आदेश जारी किया। अदालत ने अभिनेता सलमान खान के जीवन पर आधारित फिल्म के टीज़र पर रोक लगाई। यह फिल्म जोधपुर के उसी पुराने विवाद पर आधारित बताई जा रही है।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने मामले की गंभीरता को समझा। कोर्ट ने माना कि यह सामग्री जब तक इंटरनेट पर रहेगी, तब तक याचिकाकर्ता की साख को नुकसान होता रहेगा। हर बीतता पल नुकसान बढ़ा रहा है, ऐसा कोर्ट ने कहा।
24 घंटे में हटेगा कंटेंट
अदालत ने साफ समय सीमा तय की है। टीज़र सहित सभी संबंधित डिजिटल लिंक 24 घंटे में हटाने होंगे। यह आदेश संबंधित पक्षों और प्लेटफॉर्म्स दोनों पर लागू होगा।
अगर तय समय में कंटेंट नहीं हटाया गया तो अगला कदम भी तय है। कोर्ट डिजिटल इंटरमीडियरीज़ को सीधे आदेश जारी करेगी। इससे कंटेंट को जबरन ब्लॉक करवाया जाएगा।
वकील ने क्या कहा
सलमान खान की ओर से वकील रवि प्रकाश अदालत में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट में कड़ा तर्क रखा। उनका कहना था कि सलमान खान के नाम और पुरानी तस्वीरों का दुरुपयोग हो रहा है।
वकील के मुताबिक पुराने वीडियो के साथ-साथ AI से मॉर्फ की गई सामग्री भी इस्तेमाल हो रही है। यह सब बिना उनके मुवक्किल की सहमति के किया जा रहा है। आरोप है कि इसका मकसद सीधे व्यावसायिक लाभ कमाना है।
वीडियो की सच्चाई जांच
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता पक्ष से भी सवाल किए। कोर्ट ने फिल्म और असली घटना के बीच संबंध पर दलीलें सुनीं। अदालत ने सीधा सबूत मांगा जो यह साबित करे कि फिल्म सलमान खान की असली जिंदगी दिखा रही है।
इसके बाद कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं को एक अहम निर्देश दिया। निर्माताओं को पूरी वीडियो सामग्री सलमान खान के वकीलों को दिखानी होगी। इसका मकसद वीडियो की प्रामाणिकता की न्यायिक जांच करना है।
1998 का पुराना मामला
यह पूरा विवाद राजस्थान की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत से जुड़ा है। साल 1998 में जोधपुर में फिल्म "हम साथ-साथ हैं" की शूटिंग चल रही थी। इसी दौरान कांकाणी गांव के पास काले हिरणों के शिकार का मामला सामने आया था।
बिश्नोई समाज का विरोध
पर्यावरण और वन्यजीव प्रेमी बिश्नोई समाज ने घटना का कड़ा विरोध किया। समाज ने इस मुद्दे पर लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़ी। इसी विरोध के चलते यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना था।
इस मामले में सलमान खान की गिरफ्तारी हुई थी। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। करीब दो दशक तक चली सुनवाई के बाद निचली अदालत ने उन्हें 5 साल की सजा सुनाई थी। सत्र न्यायालय से बाद में उन्हें राहत मिली।
साल 2022 में राजस्थान हाई कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया था। कोर्ट ने स्थानांतरण याचिकाओं को स्वीकार कर सुनवाई प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी। अब यह मामला डिजिटल अधिकारों की नई लड़ाई बन चुका है।
ये खबर भी पढे़:-
पाकिस्तान में एक्टिव हुई बीकानेर की सिम, एटीएस ने घर पर दबिश देकर युवक को दबोचा
राइजिंग राजस्थान सिर्फ एमओयू तक, अब तक 83 प्रतिशत प्रोजेक्ट अधर में
चरमराया पुलिस मुख्यालय का एंटी-करप्शन नेटवर्क, नो-रिप्लाई मोड में सिस्टम
फर्जी सर्टिफिकेट से डॉक्टर ने की इंटर्नशिप, SOG ने किया गिरफ्तार