सांगानेर की टेक्सटाइल यूनिट में 875 अभी CETP नेटवर्क से बाहर, प्रदूषण बढ़ने का संकट

Raghvendra Singh Rathore | Oct 02, 2026, 19:42 IST
​टेक्सटाइल प्रदूषण पर फिर सवाल ​
सांगानेर में टेक्सटाइल उद्योग के कारण उत्पन्न हो रहे गंदे पानी की समस्या को लेकर अब NGT में सुनवाई चल रही है। 2024 में 1,255 और 2026 में 1,767 टेक्सटाइल यूनिट्स की पहचान की गई है। इनमें से केवल 892 इकाइयां CETP नेटवर्क से जुड़ी हुई हैं, जबकि 875 यूनिट्स अभी भी नेटवर्क से बाहर हैं। कई यूनिट्स पर क्लोजर निर्देश और कार्रवाई की गई है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • दो साल बाद भी 875 यूनिट CETP से बाहर
  • सांगानेर में 1,767 यूनिट, फिर भी कनेक्शन अधूरे
  • NGT में मामला, जमीन पर प्रदूषण का सवाल
  • 11.75 करोड़ खर्च, फिर भी नेटवर्क अधूरा
  • 2024 में 1,255, अब 1,767 यूनिट

जयपुर। सांगानेर की टेक्सटाइल इंडस्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी और चंदलाई झील से जुड़े प्रदूषण का मामला करीब दो साल से NGT में चल रहा है। इस दौरान नोटिस, क्लोजर डायरेक्शन, सीलिंग और प्रॉसिक्यूशन जैसी कार्रवाई की गई, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में सामने आए आंकड़े अब भी कई सवाल खड़े कर रहे हैं।



2024 की जॉइंट कमेटी रिपोर्ट में सांगानेर और आसपास करीब 1,255 टेक्सटाइल यूनिट होने की जानकारी दी गई थी। वहीं 2026 में राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने 1,767 टेक्सटाइल प्रोसेसिंग यूनिट की पहचान होने की जानकारी दी है। यानी दो साल के दौरान रिकॉर्ड में 512 यूनिट का अंतर सामने आया है। सबसे अहम बात यह है कि 1,767 यूनिट में से सिर्फ 892 यूनिट ही CETP नेटवर्क से जुड़ी हैं, जबकि 875 यूनिट अभी भी CETP से बाहर हैं।



875 यूनिट अभी भी CETP नेटवर्क से बाहर

सरकार के मुताबिक सांगानेर में पहचानी गई 1,767 टेक्सटाइल प्रोसेसिंग यूनिट में से 892 यूनिट 12.3 MLD क्षमता वाले जीरो लिक्विड डिस्चार्ज आधारित CETP की सदस्य हैं। बाकी 875 यूनिट अभी CETP नेटवर्क से बाहर हैं।



सरकार ने बताया कि CETP फिलहाल अपनी पूरी डिजाइन क्षमता पर काम नहीं कर रहा है। इसके पीछे बाकी यूनिट की कनेक्टिविटी पूरी नहीं होना और RO रिजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम का पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं होना प्रमुख कारण बताए गए हैं।



सांगानेर की टेक्सटाइल यूनिट से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी लंबे समय से क्षेत्र के जल स्रोतों के लिए चिंता का विषय रहा है। चंदलाई झील और उससे जुड़े जल प्रवाह पर इसके असर को लेकर भी कार्रवाई होती रही है।



814 यूनिट को क्लोजर डायरेक्शन, 65 सील

सरकार ने कोर्ट के सामने कार्रवाई का ब्यौरा भी रखा है। इसके मुताबिक वाटर एक्ट की धारा 33A के तहत 814 इंडस्ट्रियल यूनिट के खिलाफ क्लोजर डायरेक्शन जारी किए गए हैं। इसके अलावा 65 यूनिट सील की जा चुकी हैं।



CETP के मैनेजमेंट और 37 ऐसी टेक्सटाइल प्रोसेसिंग यूनिट के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, जिनके संचालन को लेकर नियमों का उल्लंघन सामने आया। राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने हाल में 37 यूनिट को वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट सिस्टम नहीं लगाने के कारण बंद करने के आदेश भी जारी किए हैं।



2024 में 1,163 यूनिट को नोटिस

2024 की जॉइंट कमेटी रिपोर्ट में सांगानेर और आसपास करीब 1,255 टेक्सटाइल यूनिट का जिक्र था। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 1,163 ऑपरेशनल यूनिट को सितंबर 2024 में फाइनल शो-कॉज नोटिस जारी किए गए थे।



उस समय 29 यूनिट के खिलाफ क्लोजर डायरेक्शन भी जारी हुए थे। इन यूनिट पर ऐसे नालों में गंदा पानी छोड़ने का आरोप था, जो चंदलाई की तरफ जाते थे और CETP पाइपलाइन नेटवर्क से जुड़े नहीं थे। यानी प्रदूषण फैलाने वाली यूनिट की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया 2024 से ही सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद है।



₹11.75 करोड़ खर्च, फिर भी कनेक्टिविटी अधूरी

टेक्सटाइल यूनिट का गंदा पानी CETP तक पहुंचाने के लिए पंपिंग स्टेशन और पाइपलाइन तैयार करने की जिम्मेदारी जेडीए को दी गई थी। इसके लिए राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से 11.75 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गए थे। जेडीए ने 16 मार्च 2024 को इस काम का वर्क ऑर्डर भी जारी किया था।



उद्देश्य था कि टेक्सटाइल यूनिट से निकलने वाला गंदा पानी CETP तक पहुंचे और बिना ट्रीटमेंट के जल स्रोतों में न जाए। लेकिन 2026 में सामने आए सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक अभी भी 875 यूनिट CETP नेटवर्क से बाहर हैं। अब सवाल यही है कि मार्च 2024 में वर्क ऑर्डर जारी होने और फंड उपलब्ध होने के बावजूद ढाई साल से ज्यादा समय बाद भी पूरा नेटवर्क क्यों तैयार नहीं हो पाया।



NGT ने कार्रवाई में देरी पर उठाए सवाल

सांगानेर प्रदूषण मामले में NGT की सुनवाई के दौरान सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे हैं। ट्रिब्यूनल के सामने रखी गई रिपोर्ट में करीब 1,255 यूनिट के संचालन और जरूरी अनुमति से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया गया था। इसके बाद NGT ने संबंधित विभागों से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी।



बाद की सुनवाई में भी ट्रिब्यूनल के सामने करीब 1,300 यूनिट संचालित होने की जानकारी रखी गई। इस दौरान जेडीए की ओर से सिर्फ 41 शो-कॉज नोटिस जारी किए जाने का रिकॉर्ड सामने आया। NGT ने अधिकारियों को नियमों के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने और बिना ट्रीट किया हुआ पानी जल स्रोतों में जाने से रोकने के निर्देश दिए।



2025 में क्लोजर डायरेक्शन वापस भी हुए

मामले की टाइमलाइन में 2025 का एक रिकॉर्ड भी अहम है। राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से अगस्त 2025 में सांगानेर क्षेत्र की कुछ टेक्सटाइल यूनिट के क्लोजर डायरेक्शन वापस लेने से जुड़ा आदेश जारी किया गया था। अब यह भी महत्वपूर्ण है कि किन यूनिट को किस आधार पर राहत दी गई थी और क्या उन पर कोई शर्त लागू की गई थी।



क्योंकि एक तरफ 2024 से प्रदूषण को लेकर कार्रवाई चल रही थी, वहीं 2025 में कुछ क्लोजर डायरेक्शन वापस लिए गए और 2026 में फिर बड़े स्तर पर क्लोजर, सीलिंग और प्रॉसिक्यूशन की कार्रवाई सामने आई।



अब 37 यूनिट पर कार्रवाई, लेकिन असली सवाल 1,767 का

सांगानेर में 37 यूनिट के खिलाफ हालिया क्लोजर कार्रवाई के बावजूद मामला सिर्फ इन यूनिट तक सीमित नहीं है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक कुल 1,767 टेक्सटाइल प्रोसेसिंग यूनिट की पहचान हुई है। इनमें से 875 CETP नेटवर्क से बाहर हैं। वहीं 814 यूनिट के खिलाफ क्लोजर डायरेक्शन और 65 यूनिट की सीलिंग की जानकारी दी गई है।



ऐसे में सबसे बड़ा सवाल 2024 और 2026 के आंकड़ों के बीच का है। 2024 में 1,255 यूनिट का रिकॉर्ड था, जबकि 2026 में संख्या 1,767 बताई गई। 512 यूनिट का यह अंतर क्यों आया, इसका स्पष्ट कारण सामने आना बाकी है। दूसरा बड़ा सवाल CETP कनेक्टिविटी का है। मार्च 2024 में वर्क ऑर्डर और 11.75 करोड़ रुपए की फंडिंग के बावजूद 875 यूनिट अब भी नेटवर्क से बाहर हैं। अब आने वाली कार्रवाई और रिपोर्ट से यह साफ होगा कि सांगानेर की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के गंदे पानी को नियंत्रित करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी हो पाती है और CETP से बाहर चल रही यूनिट को कब तक सिस्टम से जोड़ा जाता है।

Tags:
  • सांगानेर टेक्सटाइल यूनिट
  • चंदलाई झील प्रदूषण
  • CETP नेटवर्क
  • NGT मामला
  • राजस्थान प्रदूषण
  • टेक्सटाइल प्रदूषण
  • गंदा पानी
  • पर्यावरण कार्रवाई
  • Jaipur Pollution
  • Textile Units