झूठी शिकायतों से RTU स्टाफ को डराता था महंत देवानंद हत्याकांड का आरोपी
समझें क्या है पूरा मामला
- संत देवानंद के हत्यारे का RTU में भी था आतंक।
- झूठी शिकायतों से वीसी तक को डराता था संतोष।
- गिरफ्तारी के बाद RTU कर्मचारियों ने ली राहत की सांस।
- उसके कारण रिटायर्ड प्रोफेसर की ग्रेच्युटी अटकी।
- हत्यारे की मठ की रकम और जमीन पर थी नजर।
कोटा के चंद्रेसल मठ के युवा संत देवानंद हत्याकांड में वकील संतोष राय और सुपारी किलर पुष्पेंद्र को गिरफ्तार किया गया है। उसने मठ की करीब 700 बीघा जमीन और 4 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम हड़पने के लिए ही संत की हत्या की साजिश रची थी। अब उसकी और काली करतूतें बहार आ रही हैं।
संतोष की पत्नी राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय यानी RTU में कर्मचारी है। संतोष ने वर्षों तक RTU के अधिकारियों और प्रोफेसरों को झूठी शिकायतों और RTI के जरिए परेशान किया। संतोष की गिरफ्तारी से RTU के कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है।
गाजीपुर से कोटा आया और शुरू हुआ खेल
संतोष राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का रहने वाला है। साल 2012 में वह कोटा आया। उसकी पत्नी की RTU में नौकरी करती थी। संतोष ने यूनिवर्सिटी परिसर में ही रहना शुरू कर दिया।
यहीं से उसने विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को निशाना बनाना शुरू किया। अकादमिक से लेकर फाइनेंस तक हर विभाग में वह RTI डालता रहता था। झूठी शिकायतें कर अफसरों को डराना उसका हथियार बन गया।
वीसी तक को नहीं छोड़ा
RTU के पूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर एनपी कौशिक ने बताया कि संतोष उनके कार्यकाल में भी लगातार शिकायतें करता था। वह राजभवन तक शिकायतें भेज देता था। कोई भी उससे बच नहीं पाया।
RTU में प्रो-वीसी रहे प्रोफेसर सीडी प्रसाद के खिलाफ संतोष ने झूठा दावा किया कि उनके दस्तावेज फर्जी हैं। जब सभी दस्तावेजों की जांच हुई, तो सब सही निकले। लेकिन तब तक प्रोफेसर को पेंशन मिलने में देरी हो चुकी थी।
रिटायर्ड प्रोफेसर के 45 लाख 2 साल से अटके
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (RTU) से सेवानिवृत्त प्रोफेसर धीरेंद्र माथुर की ग्रेच्युटी और पीएल के करीब 45 लाख रुपए दो साल से रुके हुए हैं। संतोष ने उनके एक प्रोजेक्ट पर शिकायत कर दी थी। जबकि उस प्रोजेक्ट को फाइनेंस कमेटी और बोर्ड आफ मैनेजमेंट, दोनों की मंजूरी मिल चुकी थी।
प्रोफेसर माथुर का कहना है कि संतोष की शिकायत के डर से अधिकारी भी कोई कदम उठाने से बचते थे। उसकी झूठ पकड़े जाने के बाद भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती थी।
कोर्ट ने लगाई थी पेनल्टी
रिटायर्ड प्रोफेसर एके द्विवेदी के अनुसार, संतोष की शिकायतों से पूरा स्टाफ तंग आ चुका था। इसके बाद न्यायालय में उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए अर्जी दी गई। कोर्ट ने संतोष पर हजारों रुपए की पेनल्टी लगाई। इसके बाद भी उसने शिकायतें बंद नहीं कीं। ज्यादातर लोग उससे बचने लगे थे।
मठ की जमीन और करोड़ों रुपए पर थी नजर
उसका असल मकसद और भी बड़ा था। संतोष राय की नजर चन्द्रेसल मठ की करीब 700 बीघा जमीन पर थी। मठ के बैंक खातों में जमा 4 करोड़ से ज्यादा की रकम भी वह हड़पना चाहता था। इसके लिए उसने खुद ही मठ का अध्यक्ष बनने की कोशिश की। रास्ते में आए संत देवानंद को सुपारी देकर मरवा दिया।
और आरोपी भी पकड़े जाएंगे
मुख्य हत्यारे आदित्य वर्मा की पत्नी जैक्शन जॉर्ज को भी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। कोटा पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस की मदद से अन्य आरोपियों को भी दबोचा है। उन्हें कोटा लाने के बाद गिरफ्तार किया जाएगा। पूछताछ में और भी खुलासे होने की संभावना है।
FAQ
- संत देवानंद की हत्या किसने और क्यों की?
कोटा के चन्द्रेसल मठ के युवा संत देवानंद की हत्या वकील संतोष राय की साजिश से हुई। उसने सुपारी किलर पुष्पेंद्र को काम सौंपा था। मकसद मठ की 700 बीघा जमीन और 4 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम हड़पना था। - संत देवानंद की हत्या के मामले में अब तक कितने आरोपी पकड़े गए?
अब तक संतोष राय, सुपारी किलर पुष्पेंद्र और मुख्य हत्यारे आदित्य वर्मा की पत्नी जैक्शन जॉर्ज गिरफ्तार हो चुकी हैं। महाराष्ट्र पुलिस की मदद से अन्य आरोपियों को भी दबोचा गया है और उन्हें कोटा लाकर गिरफ्तार किया जाएगा।
ये भी पढ़ें:-
सफाई में लापरवाही पड़ी भारी, बूंदी के 12 अधिकारी निलंबित
चिकित्सा मंत्री फिर विवाद में आए, बोले-आप पता करो, महिलाएं चलते आईं या नाचते
पूर्व मंत्री महेश जोशी को झटका, गिरफ्तारी को अवैध बताने वाली याचिका खारिज
मुख्य सूचना आयुक्त का पद एक महीने से खाली, नियुक्ति प्रक्रिया का हो रहा इंतजार