संयम लोढ़ा को ही क्यों मिल रही धमकी? शूटरों की रेकी से विदेशी कॉल तक, 3 एंगल पर जांच

Ashish Bhardwaj | Oct 22, 2026, 15:01 IST
संयम लोढ़ा और लॉरेंस गैंग
कांग्रेस पार्टी के नेता संयम लोढ़ा को हाल में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से धमकियाँ मिल रही हैं।
कांग्रेस पार्टी के नेता संयम लोढ़ा को हाल में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से धमकियाँ मिल रही हैं। इससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता उत्पन्न हो गई है। सितंबर में भी कुछ शूटरों को उनके फार्म हाउस की रेकी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अब उन्हें विदेशी नंबरों से जान से मारने की धमकी मिली है।

कांग्रेस नेता और सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा को लगातार मिल रही धमकियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सितंबर में उनके फार्म हाउस की रेकी करने के आरोप में दो शूटर गिरफ्तार हुए। इसके करीब तीन सप्ताह बाद 11 अक्टूबर को विदेशी नंबरों से तीन कॉल आए। कॉल रिसीव नहीं होने पर ऑडियो मैसेज भेजकर जान से मारने की धमकी दी गई। संदेश भेजने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया।



आखिर क्यों निशाने पर है संयम लोढ़ा

अब सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर संयम लोढ़ा को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? क्या यह गैंग के खिलाफ उनके बयानों का असर है या किसी स्थानीय नेटवर्क से टकराव है या फिर राजनीतिक अथवा निजी दुश्मनी का मामला? फिलहाल पुलिस के सामने इन सवालों के पक्के जवाब नहीं हैं। जांच एजेंसियां पुराने घटनाक्रम और नई धमकी के बीच संबंध जोड़ने में जुटी हैं।



सितंबर में फार्म हाउस की रेकी, फिर धमकी

20 सितंबर को एसओजी (SOG) और एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (Anti-Gangster Task Force) ने जोधपुर में पंजाब के दो आरोपियों जसकरण सिंह उर्फ करण और राजिंदर सिंह उर्फ बिल्ला को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, दोनों ने सिरोही में लोढ़ा के फार्म हाउस की कई दिनों तक रेकी की थी। उनके मोबाइल से लोढ़ा की तस्वीरें भी मिली थीं।



जांच में सामने आया कि दोनों ने फार्म हाउस के आसपास की गतिविधियों, सुरक्षा व्यवस्था और लोढ़ा की आवाजाही पर नजर रखी थी। निकाय चुनाव के दौरान वहां समर्थकों और दूसरे लोगों की आवाजाही अधिक थी। पुलिस के मुताबिक, इसी वजह से दोनों को कथित वारदात का मौका नहीं मिला। बाद में दोनों जोधपुर पहुंचे, जहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।



पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पाली जिले में ढोला गांव के पास झाड़ियों से हथियार और कारतूस भी बरामद किए थे। अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि आरोपियों को लोढ़ा के फार्म हाउस और उनकी दिनचर्या की जानकारी किसने दी। स्थानीय स्तर पर किसने मदद की, यह भी जांच का विषय है।



पहला एंगल: गैंग के खौफ पर लोढ़ा के बयान

सितंबर 2026 में लोढ़ा ने मीडिया से बातचीत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट और इनपुट्स का हवाला देते हुए दावा किया था कि कुछ प्रभावशाली लोग सुरक्षा पाने के लिए कथित तौर पर गैंगस्टरों से खुद को धमकी दिलवाते हैं। उन्होंने जेलों में बंद गैंगस्टरों के मोबाइल के इस्तेमाल और वहां से आपराधिक गतिविधियां चलाने पर भी सवाल उठाए थे।



इन बयानों को मौजूदा धमकी की संभावित वजह के तौर पर देखा जा रहा है। यदि किसी गैंग को लगता है कि उसके खौफ और कथित वसूली के नेटवर्क पर सवाल उठ रहे हैं, तो वह दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है। लेकिन लोढ़ा के बयानों और धमकी के बीच सीधा संबंध साबित करने वाला कोई सार्वजनिक सबूत अभी सामने नहीं आया है। इसलिए इसे जांच का एक संभावित एंगल ही माना जा रहा है।



दूसरा एंगल: स्थानीय अपराधियों की मदद किसने की?

पुलिस के लिए दूसरा अहम सवाल सिरोही, पाली और जोधपुर में सक्रिय स्थानीय नेटवर्क की भूमिका को लेकर है। फार्म हाउस की रेकी करने वाले आरोपियों को ठहरने की जगह किसने दी? उन्हें इलाके की जानकारी किसने उपलब्ध कराई? उनके आने-जाने और लोढ़ा की गतिविधियों की जानकारी उन तक कैसे पहुंची?



इन सवालों के जवाब मिलने पर कथित साजिश की कड़ियां खुल सकती हैं। पुलिस ने पहले भी स्थानीय मददगारों और दूसरे संदिग्धों की भूमिका की जांच की बात कही थी। हालांकि, इस मामले का अवैध शराब, हथियार या मादक पदार्थों की तस्करी के किसी खास रास्ते से संबंध होने का ठोस सार्वजनिक सबूत अभी उपलब्ध नहीं है। इसे स्थापित तथ्य की तरह पेश करना जल्दबाजी होगी।




तीसरा एंगल: राजनीतिक या निजी रंजिश?

जांच में राजनीतिक, कारोबारी या निजी दुश्मनी की संभावना भी खारिज नहीं की जा सकती। यह पता लगाना जरूरी है कि धमकी देने वाला वास्तव में लॉरेंस गैंग से जुड़ा है या किसी ने गैंग का नाम इस्तेमाल कर डर पैदा करने की कोशिश की है।



फिलहाल किसी स्थानीय नेता, कारोबारी या दूसरे व्यक्ति की भूमिका साबित नहीं हुई है। पुलिस को कॉल, ऑडियो मैसेज और पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से जुड़े साक्ष्यों को मिलाकर देखना होगा कि दोनों घटनाओं के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं।




विदेशी नंबरों और ऑडियो की तकनीकी जांच

11 अक्टूबर को लोढ़ा के मोबाइल पर तीन विदेशी नंबरों से कॉल आए थे। कॉल नहीं उठाने पर ऑडियो मैसेज भेजा गया। संदेश में घर में घुसकर स्टेनगन और AK-47 से हमला करने की धमकी देने का आरोप है। लोढ़ा की ओर से सुमेरपुर सदर थाने में FIR दर्ज कराई गई है। पुलिस ने उनकी सुरक्षा बढ़ाई और एस्कॉर्ट भी उपलब्ध कराया है।



अब पुलिस कॉल रिकॉर्ड, नंबरों और ऑडियो की तकनीकी जांच कर रही है। विदेशी नंबर दिखने भर से यह साबित नहीं होता कि कॉल विदेश से ही किया गया था। दुबई या कनाडा से नेटवर्क संचालित होने की बात की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।



संयम लोढ़ा ने कहा है कि वे धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और जनता के बीच सक्रिय रहेंगे। फिलहाल जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि सितंबर में सामने आई कथित साजिश और अक्टूबर की धमकी के पीछे एक ही नेटवर्क है या नहीं। इसका जवाब तकनीकी साक्ष्य, पूछताछ और पुलिस की आगे की जांच से ही मिल सकेगा।



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