सतीश पूनिया बने पंजाब के प्रभारी, 24 घंटे में मिली दूसरी बड़ी जिम्मेदारी
भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब चुनाव से पहले बड़ा संगठनात्मक कदम उठाया है। सांसद सतीश पूनिया को सोमवार को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया था। इसके अगले ही दिन उन्हें पंजाब भाजपा का प्रभारी नियुक्त कर दिया गया। विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश और तरुण चुग को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है। पूनिया ने इस जिम्मेदारी पर पार्टी नेतृत्व का आभार जताया है।
भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब चुनाव से पहले बड़ा कदम उठा लिया है। पार्टी ने सांसद सतीश पूनिया को सोमवार यानी 17 अगस्त को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में राष्ट्रीय महामंत्री बनाया था। इसके अगले ही दिन पार्टी ने उन्हें पंजाब भाजपा का प्रभारी भी नियुक्त कर दिया। इसके अलावा पार्टी ने विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है। वहीं तरुण चुग को गुजरात राज्य का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
हरियाणा में रहा शानदार अनुभव
2024 में सतीश पूनिया को हरियाणा का प्रभारी बनाया गया था। इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान भी वे हरियाणा के चुनाव प्रभारी की भूमिका निभा चुके थे। हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की लगातार तीसरी जीत के समय भी वे राज्य के प्रभारी के तौर पर मौजूद थे। इस जीत ने पूनिया के संगठनात्मक कौशल को पार्टी के भीतर और मजबूत किया।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में भी उन्हें 5 सीटों का चुनाव प्रबंधन दिया गया था। इन सभा सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी।
जून 2026 में बने राज्यसभा सांसद
सतीश पूनिया जून 2026 में राज्यसभा के लिए सांसद चुने गए थे। इसके बाद अब पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव के साथ-साथ पंजाब का प्रभारी भी बना दिया है। यह जिम्मेदारी उनके राजनीतिक करियर में एक और अहम पड़ाव मानी जा रही है।
पंजाब में भाजपा के लिए क्यों मुश्किल है राह
पूनिया के सामने पंजाब की चुनौती आसान नहीं होगी। इसकी बड़ी वजह यह है कि भाजपा ने पंजाब में अब तक कभी भी अकेले अपने दम पर चुनाव नहीं लड़ा है। पार्टी हमेशा किसी न किसी सहयोगी दल के साथ गठबंधन में ही मैदान में उतरी है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा की स्थिति बेहद कमजोर रही थी। पार्टी ने कुल 65 सीटों में से चुनाव लड़ा, लेकिन इनमें से सिर्फ 2 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी।
अकेले दम पर साख साबित करने की चुनौती
यह आंकड़ा साफ बताता है कि पंजाब में भाजपा का जनाधार अभी भी सीमित है। ऐसे में पूनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना होगी। उन्हें पार्टी के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी होगी, ताकि आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।
पूनिया को मिली दोहरी जिम्मेदारी
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में सांसद सतीश पूनिया को खास तौर पर अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सबसे पहले उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया। इसके ठीक अगले दिन उन्हें पंजाब जैसे अहम राज्य की चुनावी कमान भी सौंप दी गई। पंजाब में आगामी चुनाव को देखते हुए यह नियुक्ति काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्यों बनाया गया पंजाब का प्रभारी
पंजाब की राजनीति में किसानों को बड़ा महत्वपूर्ण माना जाता है। पंजाब राजस्थान से सटा हुआ राज्य है और दोनों ही राज्यों में ग्रामीण तथा किसान राजनीति का बड़ा प्रभाव है। ऐसे में पूनिया का ग्रामीण और कृषि क्षेत्र से जुड़ा अनुभव पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकता है।
वहीं राजस्थान में भी आने वाले समय में कई बड़े चुनाव होने हैं। अगले करीब ढाई साल में विधानसभा चुनाव होंगे और उससे पहले नगर निकाय व पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में केंद्रीय संगठन में पूनिया को मिली दोहरी जिम्मेदारी राजस्थान भाजपा के अंदर राजनीतिक संतुलन और क्षेत्रीय समीकरणों पर भी असर डाल सकती है।
अन्य राज्यों में भी नई नियुक्तियां
पूनिया के अलावा भाजपा ने दो और बड़े नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी है। विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य का प्रभारी बनाया गया है। वहीं तरुण चुग को गुजरात का प्रभारी नियुक्त किया गया है। यह सभी नियुक्तियां पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम के गठन के तुरंत बाद की गई हैं।
पंजाब चुनाव पर टिकीं निगाहें
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पूनिया को पंजाब भेजना पार्टी की चुनावी रणनीति का हिस्सा है। पूनिया का संगठनात्मक अनुभव पार्टी के लिए पंजाब में मददगार साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में पार्टी की पंजाब को लेकर आगे की रणनीति भी सामने आ सकती है।
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