कोटा में एक और प्रसूता की मौत, अक्टूबर में आंकड़ा 4 पर पहुंचा; परिजनों ने एंबुलेंसकर्मियों पर लगाए आरोप
Kota: कोटा में प्रसूता की इलाज के बाद मौत का मामला सामने आया है। प्रसूता का नाम रेशु बताया जा रहा है। रेशु के परिजनों ने हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप लगाए है। परिजनों का कहना है कि रेशु के प्रसव के बाद उनकी हालत लगातार खराब होने लगी थी। लेकिन कुछ समय के लिए उनकी तबीयत में सुधार भी हुआ था। वह बातचीत करती थीं और पैदल चलकर शौचालय तक जाती थीं। लेकिन बाद में उन्हें पेट में दर्द होने लगा और पेशाब आना बंद हो गया।
किडनी में खराबी की बात सामने आई
रेशु की बहन ने बताया कि बच्चे की मौत के बाद उनकी परेशानी बढ़ती गई। डॉक्टरों ने जांच के बाद किडनी में खराबी आने की बात कही थी। पेशाब नहीं होने के कारण भी उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
रेशु बारां जिले के शाहाबाद थाना क्षेत्र के हाड़ोता गांव की रहने वाली थीं। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। मामले की जांच की जा रही है। फिलहाल मौत के कारणों और इलाज में किसी तरह की लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
शव ले जाने के लिए पैसे मांगने का आरोप
रेशु की बहन ने शव को घर ले जाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि एंबुलेंसकर्मी शव ले जाने के लिए पैसे मांग रहे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और उनके पास पैसे नहीं हैं। परिजनों का कहना है कि सरकारी एंबुलेंस की सुविधा मुफ्त मिलनी चाहिए।
अक्टूबर में प्रसूताओं की मौत के मामले बढ़े
राजस्थान (Rajasthan) के कोटा में अक्टूबर के दौरान प्रसव के बाद महिलाओं की मौत के कई मामले सामने आए हैं। इससे पहले न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में रेशमा और रोशन बैरवा की मौत हुई थी। वहीं, जेके लोन हॉस्पिटल में बारां जिले के छबड़ा निवासी शबनम बानो की भी सीजेरियन प्रसव के बाद मौत हो गई थी। शबनम के परिजनों ने इलाज में देरी और लापरवाही के आरोप लगाए थे। हॉस्पिटल मैनेजमेंट का कहना था कि महिला गंभीर हालत में कोटा पहुंची थी।
रेशु की मौत के बाद अक्टूबर में प्रसूताओं की मौत का आंकड़ा चार हो गया है। इन घटनाओं ने गर्भवती महिलाओं के इलाज, समय पर रेफर करने और प्रसव के बाद निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, सभी मामलों में मौत के कारण एक जैसे होने की पुष्टि नहीं हुई है।
मई में किडनी खराब होने से पांच प्रसूताओं की मौत
कोटा में प्रसूताओं की मौत का मामला नया नहीं है। इसी साल मई में सीजेरियन ऑपरेशन के बाद 12 महिलाओं की किडनी खराब होने की बात सामने आई थी। इनमें से पांच महिलाओं की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मृतकों में पायल, ज्योति, प्रिया, पिंकी और शिरीन शामिल थीं।
बाकी सात महिलाओं का भी लंबे समय तक इलाज चला था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ महिलाओं को हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद भी नियमित अंतराल पर डायलिसिस की जरूरत रही।
लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच अब रेशु की मौत की वजह और इलाज के दौरान हुई घटनाओं की जांच अहम होगी। साथ ही, परिजनों की ओर से एंबुलेंस के पैसे मांगने के आरोपों की भी पड़ताल जरूरी है। मौत का वास्तविक कारण और किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, इसका निष्कर्ष जांच और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।