शहरी सेवा शिविर का कमाल, स्कूल, दफ्तर व अंबेडकर प्रतिमा वाली जमीन का दिया पट्टा
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में शहरी सेवा शिविरों में पट्टे जारी करने के नए-नए खेल उजागर।
- कोटा जिले में अधिकारियों ने एक रसूखदार को सरकारी जमीन का पट्टा दे दिया।
- इटावा कस्बे की इस भूमि पर 50 साल से स्कूल और सरकारी दफ्तर चल रहे हैं।
- इस मामले में पालिका के अधिशाषी अधिकारी राजूलाल मीणा की भूमिका सवालों में।
- मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद अब पट्टे को किया गया निरस्त।
Kota: राजस्थान में अफसरों की मिलीभगत से शहरी सेवा शिविर में सरकारी जमीन का पट्टा जारी करने का बड़ा खेल सामने आया है। मामला कोटा जिले में इटावा नगर पालिका का है।
रोचक बात यह है कि अधिकारियों ने ऐसी सरकारी जमीन का पट्टा रसूखदार व्यक्ति को दे दिया, जिस पर 50 साल से स्कूल और सरकारी दफ्तर चल रहे हैं।
इस मामले में पालिका के अधिशाषी अधिकारी राजूलाल मीणा की भूमिका सवालों में है। हालांकि,
मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद पट्टे को निरस्त कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
इटावा नगर पालिका ने 9 जुलाई को खसरा नंबर 2492 की बेशकीमती सरकारी भूमि का पट्टा पवन कुमार मीना को दिया। इसकी औपचारिकता शहरी सेवा शिविर के माध्यम से की गई।
यह भूमि कोई खाली या लावारिस प्लॉट नहीं थी, बल्कि इस पर पांच दशक से महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान और कार्यालय संचालित हो रहे हैं।
इस जमीन पर पीएमश्री स्कूल, पीडब्ल्यूडी और कमांड एरिया डेवलपमेंट (सीएडी) का कार्यालय और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित है।
ऐसे हुआ पट्टे का खुलासा
इस गंभीर मामले का खुलासा तब हुआ, जब कमांड एरिया डेवलपमेंट (CAD) के सहायक अभियंता को इस आवंटन की जानकारी मिली।
सीएडी अधिकारियों ने तुरंत हरकत में आते हुए इसे पूरी तरह से सरकारी भूमि बताया। उन्होंने इस संबंध में तहसीलदार, एसडीएम और उच्च अधिकारियों को लिखित आपत्ति दर्ज कराई।
ईओ की भूमिका पर उठे सवाल
करोड़ों रुपए की इस भूमि का फर्जी तरीके से पट्टा जारी होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। इस मामले में पालिका अधिशासी अधिकारी राजूलाल मीणा की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं।
लोगों का कहना है कि इतने सार्वजनिक महत्व की भूमि का आवंटन बिना सांठगांठ के संभव नहीं है। इस संबंध में सीएमओ, जिला कलेक्टर, संभागीय आयुक्त और स्वायत्त शासन विभाग को लिखित शिकायतें भेजी गईं।
शिकायत में पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ ही दोषी अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।
प्रशासन हरकत में आया, पट्टा किया गया निरस्त
शिकायत पहुंचने के बाद कोटा जिला कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच के निर्देश दिए। जांच में सामने आया कि नियमों को ताक पर रखकर यह पट्टा जारी किया गया था।
जांच रिपोर्ट के आधार पर अब नगर पालिका इटावा के अधिशासी अधिकारी राजूलाल मीना ने पवन कुमार मीना के नाम जारी पट्टा निरस्त कर दिया है।
यह कहना है अधिशासी अधिकारी का
नगर पालिका इटावा के अधिशासी अधिकारी राजूलाल मीना ने बताया कि शहरी सेवा शिविर-2026 में पवन कुमार मीना को पट्टा जारी किया गया था।
सीएडी विभाग की आपत्ति और जांच के बाद प्रशासनिक स्तर पर यह कार्रवाई की गई है। अब संबंधित पट्टे को पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है।
इस घटना ने फिर शहरी सेवा शिविरों में पट्टा आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर दिया है। अधिकारियों की मिलीभगत से इन शिविरों में पट्टे जारी करने का खेल चल रहा है।
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