राजस्थान सरपंच चुनाव में न पैसा चला, न सियासी रसूख! सिलाई करने वाली शारदा ने करोड़पति को हराया, विधायकों के बेटे-भाभी भी हारे
शादी से बना नया चुनावी समीकरण
राजस्थान में पंचायत चुनाव के नतीजों के बीच कई दिलचस्प कहानियां सामने आ रही हैं। कहीं एक शादी ने गांव का चुनावी गणित बदल दिया, तो कहीं सिलाई का काम करने वाली महिला ने सरपंच की कुर्सी हासिल कर ली। दो गांवों की ये कहानियां इसलिए अलग हैं, क्योंकि जीत तक पहुंचने का रास्ता दोनों के लिए अलग रहा।
करौली जिले की सादौली ग्राम पंचायत के गुडला गांव में लंबे समय से गुर्जर समाज के लोग सरपंच बनते आए हैं। इस बार सरपंच की सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। इससे गांव का पुराना गणित बदल गया। अब सवाल था कि चुनाव किसे लड़ाया जाए।
इसी बीच राहुल गुर्जर की पत्नी नैना धानका का नाम चर्चा में आया। नैना धानका समाज से आती हैं और एसटी वर्ग में आती हैं। गांव में बैठक हुई और उन्हें मैदान में उतारने पर सहमति बनी। इसके बाद गुर्जर और धानका समाज के लोग एक साथ चुनाव प्रचार में जुट गए। समर्थकों ने लोगों से संपर्क किया और तैयारी शुरू हुई। इस तरह राहुल और नैना का वैवाहिक रिश्ता गांव के चुनावी समीकरण में अहम कड़ी बन गया।
11 उम्मीदवारों के बीच बड़ी जीत
गुडला में सरपंच पद के लिए कुल 11 उम्मीदवार मैदान में थे। नतीजा आया तो नैना धानका ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें 2107 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी हरिओम मीणा को 243 वोट मिले। नैना ने 1864 वोट के अंतर से चुनाव जीता।
जीत के बाद गांव में जुलूस निकाला गया और समर्थकों ने खुशी मनाई। चुनाव में जिन दो समाजों के लोग उनके साथ खड़े हुए थे, उनकी एकजुटता नतीजों में भी दिखी। अब गांव के विकास की जिम्मेदारी नैना के सामने है। जिस भरोसे से उन्हें जिताया गया है, उस पर खरा उतरना उनके लिए सबसे अहम होगा।
टीचर बनने का सपना, अब गांव की सरकार
अब दूसरी कहानी जालोर जिले की भैंसवाड़ा ग्राम पंचायत की है। यहां शारदा कुमारी राणा ने सरपंच का चुनाव जीतकर सबका ध्यान खींचा। उन्होंने बीए और बीएड की पढ़ाई की थी। उनका सपना सरकारी स्कूल में शिक्षक बनने का था। इसके लिए उन्होंने तैयारी भी की।
लेकिन तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती निरस्त होने के कारण यह सपना पूरा नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने सिलाई का काम शुरू किया। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष जारी रहा। फिर पंचायत चुनाव आया तो उन्होंने सरपंच पद के लिए लड़ने का फैसला किया। गांव के लोगों ने उनका साथ दिया और नतीजा उनके पक्ष में रहा। जिस महिला का सपना कभी बच्चों को पढ़ाने का था, अब वह गांव के विकास और लोगों की समस्याएं सुलझाने की जिम्मेदारी संभालेंगी।
करोड़ों की संपत्ति वाली प्रत्याशी हारीं
भैंसवाड़ा में सरपंच की सीट सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित थी। 13 महिलाओं ने नामांकन भरा था, लेकिन दो ने नाम वापस ले लिए। इसके बाद 11 महिलाएं मैदान में रहीं। इनमें शारदा कुमारी राणा भी शामिल थीं।
30 अक्टूबर को हुए मतदान में पंचायत के 4159 मतदाताओं में से 2671 ने वोट डाला। इनमें 107 वोट खारिज हुए और 13 वोट नोटा के खाते में गए। 2564 वैध वोटों में शारदा को 650 वोट मिले। उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी उमाकुमारी को 461 वोट मिले। इस तरह शारदा ने 189 वोट से जीत दर्ज की।
उमाकुमारी की चर्चा उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ उनकी संपत्ति को लेकर भी रही। वे आहोर विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे माधोसिंह के पौत्र शिवप्रताप सिंह की पत्नी हैं। उनके पति 2015 में भैंसवाड़ा के सरपंच रह चुके हैं। उमाकुमारी के चुनावी शपथ पत्र में 6 करोड़ 56 लाख 34 हजार 596 रुपए की संपत्ति घोषित की गई थी। इसके बावजूद शारदा ने उन्हें हराया।
परिवार की खुशी और आगे की चुनौती
शारदा की जीत के बाद उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनके पति अचलेश्वर राणा ने कहा कि गांव के लोगों ने जो भरोसा जताया है, उसे बनाए रखने की कोशिश होगी। सभी को साथ लेकर गांव के विकास के काम किए जाएंगे।
दोनों महिलाओं की जीत की कहानी अलग है। नैना के लिए गांव के दो समाज एक साथ आए, जबकि शारदा ने अपने संघर्ष और चुनावी मैदान की मेहनत से जीत हासिल की। अब दोनों पर गांव की जिम्मेदारी है। देखना होगा कि चुनाव में मिले इस भरोसे को वे विकास के कामों में कैसे बदलती हैं।
उदयपुर में विधायक की भाभी और बेटे सरपंच चुनाव हारे
उदयपुर जिले की चार पंचायत समितियां नयागांव, खेरवाड़ा, ऋषभदेव और कल्याणपुर सरपंच चुनाव के नतीजों से गुलजार रहीं। गुरुवार रात देर तक नतीजे घोषित होते रहे। इनमें कई राजनीतिक परिवारों के नाम हार गए। कांग्रेस विधायक की भाभी, जो पहले प्रधान रह चुकी हैं, चुनाव हार गईं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एक मंडल अध्यक्ष को भी करारी हार का सामना करना पड़ा।
खेरवाड़ा के कांग्रेस विधायक दयाराम परमार के भाई की पत्नी कमला परमार नयागांव पंचायत समिति की पूर्व प्रधान हैं। उन्होंने नयागांव पंचायत समिति की ग्राम पंचायत महुवाल से सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ा। यहां उन्हें जमना देवी ने हराया। कमला के पति पन्नालाल नयागांव पंचायत समिति के वार्ड 6 से कांग्रेस के बैनर तले चुनाव लड़े हैं। वे प्रधान पद की दावेदारी में हैं। पंचायत समिति का नतीजा 20 नवंबर को आएगा।
नयागांव पंचायत समिति की सरेरा पंचायत में दुर्गा देवी भगोरा चार बार लगातार सरपंच रहीं। इस बार वे चुनाव हार गईं। दुर्गा भाजपा नयागांव मंडल की अध्यक्ष भी हैं। यहां कांतिलाल भगोरा ने जीत दर्ज की। एक ही पंचायत समिति में पूर्व सरपंच और पार्टी पदाधिकारी की हार ने स्थानीय राजनीति की चर्चा तेज कर दी है।
विधायक का बेटा भी हारा
सलूबर की भाजपा विधायक शांता मीणा के बेटे कपिल मीणा सेमारी ग्राम पंचायत का चुनाव हार गए। यहां पंकज जीते, जबकि कपिल पहले तीन उम्मीदवारों में भी नहीं रहे। लेख के अनुसार शांता मीणा के पति दिवंगत अमृतलाल मीणा के विधायक रहते हुए वे इसी ग्राम पंचायत की सरपंच रह चुकी थीं।