श्रीगंगानगर में कचरा प्लांट विवाद में बेनीवाल ने किया नेशनल हाईवे जाम, चार घंटे बाद खुला

Jageshwar prasad | Oct 01, 2026, 10:32 IST
कचरा प्लांट को लेकर हाईवे जाम
नरसिंहपुरा-मांझूवास-बारानी क्षेत्र में कचरा प्रबंधन प्लांट के खिलाफ चल रहा आंदोलन अपने चरम पर पहुंच गया था। सांसद हनुमान बेनीवाल ने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए हाईवे को बंद कर दिया। चार घंटे के मशक्कत के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगें मानी जाएंगी। इसके चलते, प्रदर्शनकारियों ने हाईवे को खोलने का निर्णय लिया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • चार घंटे तक जाम रहा हाईवे, फिर बनी सहमति
  • कचरा प्लांट पर सांसद बेनीवाल का कलेक्ट्रेट कूच रोका
  • रात दो बजे प्रशासन पहुंचा, तब खुला नेशनल हाईवे
  • पांच महीने से चल रहा था ग्रामीणों का आंदोलन
  • दस साल में तीसरी बार बदली गई प्लांट की जगह

श्रीगंगानगर के नरसिंहपुरा-मांझूवास-बारानी क्षेत्र में प्रस्तावित ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट को लेकर लंबे समय से विरोध चल रहा था। बुधवार रात सांसद हनुमान बेनीवाल और प्रशासन के बीच आखिरकार सहमति बन गई। इससे पहले बेनीवाल के समर्थकों ने करीब चार घंटे तक नेशनल हाईवे-62 जाम रखा था। प्रशासन के आश्वासन के बाद ही हाईवे खुल सका।



कैसे शुरू हुई रात की घटना

प्रस्तावित कचरा प्रबंधन प्लांट के विरोध में ग्रामीण पिछले पांच महीने से आंदोलन कर रहे थे। प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सहमति नहीं बनने पर बुधवार को नरसिंहपुरा-बिरानी में महापंचायत आयोजित हुई। इस महापंचायत में सांसद हनुमान बेनीवाल भी शामिल हुए और उन्होंने मांगों को लेकर करीब 100 गाड़ियों के काफिले के साथ श्रीगंगानगर कलेक्ट्रेट की ओर कूच किया।




पुलिस ने महियावाली टोल नाके के पास चूनावढ़ थाना क्षेत्र में यह काफिला रोक दिया। कलेक्ट्रेट कूच रोके जाने से नाराज प्रदर्शनकारियों ने इसके बाद नेशनल हाईवे जाम कर दिया।



रात दो बजे पहुंचे अधिकारी

श्रीगंगानगर के उपखंड अधिकारी नयन गौतम रात करीब 2 बजे नेशनल हाईवे पर प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्लांट को लेकर गठित कमेटी एक बार फिर से इस मामले पर विचार करेगी। उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों की मांग जयपुर भेजी जाएगी।



इस आश्वासन के बाद हनुमान बेनीवाल और उनके सैकड़ों समर्थकों ने करीब चार घंटे से जाम नेशनल हाईवे को खोल दिया। इस तरह लंबे समय से चली आ रही गतिरोध की स्थिति फिलहाल टल गई है।



दस साल में तीन बार बदली प्लांट की जगह

यह पूरा विवाद प्लांट की जगह बार-बार बदलने से जुड़ा है। शुरुआत में श्रीगंगानगर के पास चक 6-जेड में यह प्लांट प्रस्तावित था, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया था। इसके बाद साल 2016 में जगह बदलकर शहर से करीब 7-8 किलोमीटर दूर नेतेवाला के चक 1 जी छोटी में की गई।



नेतेवाला में करीब 10 साल तक पूरी प्रक्रिया चलती रही। इस दौरान सरकारी स्वीकृतियां और एनओसी (NOC – No Objection Certificate) मिलीं। करीब 78 करोड़ रुपए का बजट भी स्वीकृत हुआ और निर्माण का ठेका तक दे दिया गया था।



इसके बावजूद नेतेवाला में भी ग्रामीणों का विरोध सामने आया। इस साल प्रशासन ने प्लांट को नरसिंहपुरा-मांझूवास-बिरानी में शिफ्ट करने का प्रस्ताव रखा। नई जगह पर भी ग्रामीणों ने तुरंत विरोध शुरू कर दिया, जो पिछले करीब पांच महीने से लगातार चल रहा था।



आंदोलन का पूरा घटनाक्रम



5 मार्च 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट ने नेतेवाला में ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट का काम शुरू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 14 अप्रैल को नेतेवाला से प्लांट को नरसिंहपुरा-मांझूवास-बारानी में शिफ्ट किया गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया।



10 जुलाई को प्रशासनिक अधिकारियों के दौरे के बाद ग्रामीणों ने क्षेत्र के पांच सरकारी स्कूलों में तालाबंदी कर दी थी। 20 जुलाई को ग्रामीणों ने अल्टीमेटम दिया कि अगर कचरा डालना बंद नहीं हुआ, तो अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।



30 सितंबर को महापंचायत हुई, जिसमें सांसद हनुमान बेनीवाल शामिल हुए और उन्होंने प्लांट वापस लेने की मांग रखी। मांग नहीं माने जाने पर उसी दिन प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट कूच किया, जिसके बाद करीब चार घंटे तक नेशनल हाईवे जाम रहा। 1 अक्टूबर को करीब 2 बजे वार्ता के बाद सहमति बनी और आंदोलन समाप्त करने का फैसला हुआ।

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