श्वेतांबरी और विक्रम भट्ट के बैंक खाते फिर होंगे चालू, कोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में ये दिए आदेश
News In Short
- हाई कोर्ट ने श्वेतांबरी भट्ट के सभी बैंक खाता फ्रीज करने को बताया अनुचित।
- कोर्ट ने केवल विवादित राशि पर ही रोक लगाने का दिया आदेश।
- भट्ट दंपती पर है फिल्म बनाने के नाम पर 30 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप।
- कोर्ट ने बैंकों को भट्ट दंपती के अन्य खातों को दोबारा चालू करने के दिए आदेश।
- धोखाखड़ी मामले में पुलिस के निर्देश पर सभी खाते हो गए थे फ्रीज।
News In Detail
राजस्थान हाई कोर्ट फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट को राहत दी है। कोर्ट ने उनके सभी बैंक अकाउंट को फ्रीज करना गलत बताया है। कोर्ट ने सिर्फ विवादित राशि पर रोक लगाने का आदेश दिया है। साथ ही सभी बैंको को अकाउंट दोबारा चालू करने का भी आदेश दिया है। पुलिस के निर्देश पर बैंक के अकाउंट को फ्रीज़ कर दिया गया था।
30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला
फिल्म निर्माता श्वेतांबरी भट्ट और विक्रम भट्ट के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। भट्ट दंपती ने डॉ. अजय मुरडिया से मिलकर एक फिल्म निर्माण के लिए समझौता किया था। शुरू में 40 करोड़ रुपये का बजट तय हुआ। इसमें बायोपिक और अन्य फिल्मों के लिए रकम निर्धारित की गई थी।
बाद में चार फिल्मों के निर्माण के नाम पर लगभग 47 करोड़ रुपये का बजट बढ़ाकर 7 करोड़ रुपये अतिरिक्त मांगे गए। आरोप है कि भट्ट दंपती और उनके साथियों ने फर्जी बिल दिखाकर लगभग 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
पुलिस के निर्देश पर बैंक खाते फ्रीज
उदयपुर पुलिस के निर्देश पर श्वेतांबरी और विक्रम भट्ट के सभी बैंक खातों को पूरी तरह से फ्रीज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि ये पैसे वैध पेशेवर फीस के रूप में थे और पुलिस ने बिना उचित प्रक्रिया के खातों को फ्रीज किया। इससे भट्ट दंपती का आर्थिक संकट और भी गहरा गया, क्योंकि वे अपने दैनिक खर्च और अन्य जरूरी कामों को पूरा नहीं कर पा रहे थे।
हाई कोर्ट का दिया आदेश
हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के बाद अपना आदेश जारी किया। कोर्ट ने पाया कि बैंक खातों को पूरी तरह से फ्रीज करना संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(g) के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि केवल विवादित राशि पर ही रोक लगाई जाए और बाकी सभी वैध लेनदेन को बिना किसी रुकावट के जारी रखा जाए।
कोर्ट ने बैंकों को आदेश दिया कि वे 30 करोड़ रुपये की विवादित राशि के अलावा बाकी राशि को किसी भी तरह की रोक के बिना पूरी तरह से चालू रखें। साथ ही, बैंकों को ये निर्देश भी दिए गए कि याचिकाकर्ताओं के खातों को तुरंत डी-फ्रीज किया जाए।
ये भी पढे़:-
उदयपुर फाइल्स: एआई वीडियो के आरोपों पर चार्जशीट ने बढ़ाई उलझन, नहीं मिला कोई जिक्र
सरकारी स्कूल में पढ़े, सरकारी शिक्षक बने, फिर पहले ही प्रयास में बन गए आईएएस डॉ. जितेंद्र कुमार
सांसद से मांगे विधायकों के नंबर, मंत्री बनाने के नाम पर ठगने की कोशिश, फर्जी गृह सचिव गिरफ्तार