SI भर्ती परीक्षा विवाद: आउट ऑफ पैटर्न पेपर पर भड़के अभ्यर्थी, शहीद स्मारक पर धरना

Jageshwar prasad | Sept 29, 2026, 17:51 IST
दोबारा परीक्षा की मांग
जयपुर के शहीद स्मारक पर दमदार प्रदर्शन करते हुए अभ्यर्थियों ने SI भर्ती परीक्षा के आउट ऑफ पैटर्न पेपर के खिलाफ धरना दिया। उन्होंने परीक्षा को पुनः आयोजित करने की मांग की और सरकार से जल्द ही निर्णय की अपील की। आरपीएससी ने स्वीकार किया कि 30 प्रतिशत प्रश्न पैटर्न से बाहर थे, जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ये आंकड़ा 80 प्रतिशत है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • SI भर्ती परीक्षा फिर विवादों में
  • शहीद स्मारक पर अभ्यर्थियों का धरना
  • आउट ऑफ पैटर्न पेपर पर भड़के अभ्यर्थी
  • दोबारा परीक्षा कराने की मांग
  • आरपीएससी और बोर्ड के पुनर्गठन की मांग

SI भर्ती परीक्षा को आउट ऑफ पैटर्न बताते हुए अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने मंगलवार को जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से परीक्षा दोबारा कराने की मांग की। धरने के दौरान नारेबाजी हुई। अभ्यर्थियों ने भविष्य बर्बाद करने के आरोप भी लगाए।



अभ्यर्थियों ने आरपीएससी और कर्मचारी चयन बोर्ड के पुनर्गठन की भी मांग उठाई। SI भर्ती परीक्षा संघर्ष समिति से जुड़े सत्येंद्र राव ने कहा कि आरपीएससी ने खुद माना है कि 20 सितंबर को हुए पेपर में 30 प्रतिशत प्रश्न आउट ऑफ पैटर्न थे। जबकि अभ्यर्थियों के अनुसार 80 प्रतिशत पेपर आउट ऑफ पैटर्न था।



उन्होंने कहा कि जब आरपीएससी ने अपनी गलती मान ली है, तो उसका खामियाजा अभ्यर्थियों को क्यों भुगतना पड़े। यह सवाल हर अभ्यर्थी के मन में है। इसलिए परीक्षा दोबारा कराना जरूरी है।



क्या है अभ्यर्थियों की मांग?

अभ्यर्थियों ने कहा कि उनकी मांग सरकार से केवल वार्ता की नहीं है। वे स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग कर रहे हैं। सरकार और आरपीएससी को परीक्षा निरस्त कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लेना चाहिए।



उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में जल्द फैसला करे। इससे भर्ती परीक्षा को लेकर लंबे समय से चल रहा असमंजस खत्म हो सके। अभ्यर्थियों ने आरपीएससी के पूर्व चेयरमैन यू. आर. साहू का भी जिक्र किया।



उनके मुताबिक साहू ने कहा था कि SI भर्ती का पेपर 2021 के पैटर्न पर होना चाहिए। लेकिन पेपर उस पैटर्न पर नहीं हुआ। इससे अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ है।



तैयारी के लिए मिले सिर्फ 4 महीने



सत्येंद्र राव ने कहा कि हाईकोर्ट ने जब भर्ती परीक्षा रद्द की थी, तो अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए सिर्फ 4 महीने का समय दिया गया था। अभ्यर्थी लगातार 5 साल से न्याय के लिए लड़ रहे हैं।



उनसे 4 महीने में तैयारी की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आरपीएससी को नैतिकता के आधार पर परीक्षा दोबारा करानी चाहिए। अभ्यर्थियों ने कहा कि अगर भर्ती परीक्षा में गलतियां सामने आती हैं, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।



भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं उत्पन्न होनी चाहिए। इसलिए आरपीएससी और कर्मचारी चयन बोर्ड का पुनर्गठन जरूरी है। इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।



बार-बार बदल रहा पैटर्न



अभ्यर्थियों का कहना है कि बार-बार भर्ती परीक्षाओं का पैटर्न बदला जा रहा है। इससे भर्ती में देरी हो रही है। साथ ही पद खाली रह जाते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।



उन्होंने कहा कि हाल ही में लेक्चरर भर्ती में भी ऐसा ही हुआ था। पैटर्न बदलने से अभ्यर्थियों को परेशानी होती है। उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। इसलिए पैटर्न पहले से तय होना चाहिए।



आंदोलन जारी रहेगा



संघर्ष समिति से जुड़े अभ्यर्थियों ने साफ किया है। मंगलवार को शहीद स्मारक पर धरना देकर आंदोलन की शुरुआत की गई है। आने वाले दिनों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भी धरने और प्रदर्शन किए जाएंगे।



अभ्यर्थियों ने कहा कि जब तक SI भर्ती परीक्षा दोबारा कराने को लेकर सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वे अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे।



क्यों अहम है यह मामला?



SI भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल होते हैं। परीक्षा का पैटर्न बदलने से उनकी तैयारी प्रभावित होती है। इससे भर्ती प्रक्रिया भी लंबी खिंचती है।



यह मामला पहले भी सुर्खियों में रहा है। हाईकोर्ट ने परीक्षा रद्द की थी। अब दोबारा परीक्षा हुई तो पेपर आउट ऑफ पैटर्न बताया जा रहा है। इससे अभ्यर्थियों में नाराजगी है। सरकार पर जल्द फैसला लेने का दबाव बढ़ रहा है।

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