सीकर में साइबर ठगी के दो मामले, बुजुर्ग और महिला से लाखों ऐंठे
समझें क्या है पूरा मामला
- सीकर जिले में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं।
- सीनियर सिटीजन कार्ड बनाने का झांसा देकर बुजुर्ग से ठगी हुई।
- बुजुर्ग के बैंक खाते से 1.07 लाख रुपए निकाल लिए गए।
- एक महिला को क्रिप्टो में डबल प्रॉफिट का लालच दिया गया।
- महिला से प्रॉफिट निकालने के नाम पर 1.94 लाख रुपए लिए गए।
राजस्थान के सीकर जिले में साइबर ठगी से जुड़े दो मामले सामने आए हैं। दोनों मामलों में पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत की है। एक मामले में 69 वर्षीय बुजुर्ग को सीनियर सिटीजन कार्ड बनाने का झांसा दिया गया। दूसरे मामले में 26 वर्षीय महिला को क्रिप्टो निवेश में डबल प्रॉफिट का लालच दिया गया।
पुलिस ने दोनों मामलों में शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर हुई है। अब पुलिस बैंक अकाउंट की डिटेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
सीनियर सिटीजन कार्ड का झांसा
पहला मामला 69 वर्षीय नथमल से जुड़ा है। नथमल के अनुसार, उनके पास एक व्यक्ति का फोन आया था। कॉल करने वाले ने खुद को पंजाब नेशनल बैंक का कर्मचारी बताया।
कॉल करने वाले ने बुजुर्ग को सीनियर सिटीजन कार्ड के बारे में जानकारी दी। उसने बताया कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसके जरिए बैंकिंग से जुड़े कई फायदे मिलने का दावा किया गया।
बातचीत के दौरान आरोपी ने नथमल को अपने विश्वास में लेने की कोशिश की। इसके बाद उनसे ओटीपी की जानकारी पूछी गई। ओटीपी साझा किए जाने के बाद उनके बैंक खाते से 1.07 लाख रुपए निकल गए।
घटना के बाद नथमल ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस अब कॉल करने वाले व्यक्ति और रकम ट्रांसफर होने वाले खातों की जांच कर रही है।
ओटीपी साझा करने से निकले रुपए
इस मामले में ठगी का तरीका बैंकिंग सुविधा के नाम पर भरोसा बनाने से जुड़ा बताया गया है। आरोपी ने बैंक कर्मचारी बनकर बुजुर्ग से संपर्क किया। इसके बाद सीनियर सिटीजन कार्ड का लाभ दिलाने की बात कही।
ओटीपी बैंकिंग लेनदेन से जुड़ी संवेदनशील जानकारी होती है। इसे किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा करने पर खाते से रकम निकल सकती है। हालांकि, इस मामले में पुलिस की जांच के बाद ही पूरी प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
बुजुर्गों को बैंक से जुड़ी किसी भी सुविधा की जानकारी सीधे शाखा या आधिकारिक माध्यम से लेनी चाहिए। फोन पर बैंक कर्मचारी बताने वाले व्यक्ति की पहचान की पुष्टि जरूरी है।
क्रिप्टो में डबल प्रॉफिट का लालच
दूसरा मामला 26 वर्षीय महिला से जुड़ा है। महिला ने पुलिस को दी शिकायत में क्रिप्टो निवेश के नाम पर ठगी का आरोप लगाया है।
महिला के अनुसार, साइबर ठगों ने क्रिप्टो में निवेश कराने के लिए उसका वॉलेट बनाया। इसके बाद वॉलेट में प्रॉफिट बढ़ने की जानकारी दिखाई गई। महिला को निवेश पर डबल प्रॉफिट मिलने का लालच दिया गया।
जब महिला ने प्रॉफिट की रकम निकालने की कोशिश की, तो उससे पैसे ट्रांसफर करवाए गए। अलग-अलग चरणों में उससे कुल 1.94 लाख रुपए लिए गए। इसके बावजूद उसे प्रॉफिट की कोई रकम नहीं मिली।
महिला ने इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस अब लेनदेन से जुड़े बैंक खातों और अन्य जानकारी की जांच कर रही है।
प्रॉफिट निकालने के नाम पर रकम ली
क्रिप्टो ठगी के इस मामले में पहले निवेश और प्रॉफिट का भरोसा बनाया गया। इसके बाद रकम निकालने के नाम पर महिला से पैसे ट्रांसफर करवाए गए।
साइबर ठगी के मामलों में आरोपी कई बार प्रॉफिट, टैक्स या निकासी शुल्क का हवाला देते हैं। पीड़ित से अतिरिक्त रकम जमा कराने को कहा जा सकता है। इस मामले में भी प्रॉफिट निकालने के नाम पर पैसे लिए जाने की शिकायत है।
हालांकि, आरोपियों ने किस माध्यम से संपर्क किया और रकम कितने लेनदेन में भेजी गई, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस की जांच के बाद इस बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
बैंक खातों से आरोपियों तक पहुंचेगी पुलिस
दोनों मामलों में ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर होने की जानकारी है। पुलिस बैंक अकाउंट की डिटेल के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
जांच के दौरान लेनदेन की जानकारी और रकम प्राप्त करने वाले खातों की जांच की जा सकती है। इसके अलावा आरोपियों से जुड़े मोबाइल नंबर और अन्य डिजिटल जानकारी भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
पुलिस का अगला कदम बैंकिंग ट्रांजैक्शन की कड़ियों को जोड़ना होगा। इससे ठगी की रकम कहां गई और किन खातों में पहुंची, इसकी जानकारी मिल सकती है।
साइबर ठगी से बचने के लिए सावधानी
बैंक कर्मचारी बनकर फोन करने वाले अनजान व्यक्ति पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। बैंक से जुड़ी किसी सुविधा की पुष्टि आधिकारिक माध्यम से करनी चाहिए।
किसी भी व्यक्ति को ओटीपी, एटीएम पिन या बैंकिंग पासवर्ड नहीं बताना चाहिए। बैंक कर्मचारी आमतौर पर फोन पर संवेदनशील जानकारी मांगने की प्रक्रिया नहीं अपनाते।
क्रिप्टो निवेश में डबल प्रॉफिट का दावा भी सावधानी का संकेत हो सकता है। निवेश से पहले प्लेटफॉर्म और उसकी विश्वसनीयता की जांच जरूरी है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर रकम ट्रांसफर करने से बचना चाहिए।
अगर बैंक खाते से अनधिकृत रकम निकलती है, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। साइबर ठगी की शिकायत जल्द दर्ज कराने से कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
सीकर में सामने आए दोनों मामलों की पुलिस जांच जारी है। फिलहाल शिकायतों के आधार पर ठगी के तरीके और रकम की जानकारी सामने आई है।
आरोपियों की पहचान, बैंक खातों और रकम के अंतिम गंतव्य की पुष्टि जांच के बाद होगी। पुलिस की कार्रवाई और आगे की जानकारी के आधार पर मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
पीड़ितों की शिकायत के बाद अब जांच का मुख्य फोकस डिजिटल लेनदेन पर है। बैंकिंग रिकॉर्ड के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
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