सिरोही: भाजपा में क्रॉस वोटिंग पर बवाल; मंदिर में ली थी वफादारी की कसम, अब 3 पार्षद व्हाट्सऐप ग्रुप से बाहर

Saurabh Mishra | Oct 09, 2026, 15:05 IST
सिरोही में क्रॉस वोटिंग विवाद को लेकर भाजपा के तीन पार्षदों को पार्टी के व्हाट्सऐप ग्रुप से रिमूव किया।
सिरोही में नगर परिषद सभापति चुनाव के बाद से क्रॉस वोटिंग को लेकर चल रहे विवाद के बीच भाजपा के तीन पार्षदों को पार्टी के व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया गया। चुनाव में भाजपा के 10 पार्षद जीतकर आए थे, लेकिन सभापति चुनाव में पार्टी उम्मीदवार को सिर्फ 5 वोट मिले। इससे क्रॉस वोटिंग पर सवाल उठ रहे।

सिरोही नगर परिषद चुनाव (Sirohi Nagar Parishad Chunav) के बाद से भाजपा में विवाद जारी है। सभापति चुनाव में भाजपा के 10 पार्षद थे, लेकिन पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को सिर्फ 5 वोट मिले थे। इसके बाद से सवाल उठने थे कि आखिर किन भाजपा पार्षदों ने दूसरी पार्टी को वोट दिया। अब भाजपा नगर मंडल के व्हाट्सऐप ग्रुप से तीन पार्षदों और एक पार्षद पति को हटा दिया गया।



इनमें एक पार्षद का नाम भी है, जिसने सारणेश्वर महादेव मंदिर में पार्टी के लिए वफादार रहने की कसम खाई थी। इस बीच एक पार्षद ने संगठन के सभी पदों से इस्तीफा भेज दिया। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने अभी किसी पार्षद के खिलाफ क्रॉस वोटिंग की पुष्टि नहीं की।



सिरोही में सभापति चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोप पर विवाद

सिरोही नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं। सितंबर 2026 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने 23 सीटें जीती थीं जबकि भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) को 10 सीटें मिली थीं, जबकि दो वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे। इसके बाद 21 सितंबर को सभापति पद के लिए चुनाव हुआ था। कांग्रेस ने रितु जैन और भाजपा ने पूजा माली को उम्मीदवार बनाया था। कांग्रेस उम्मीदवार रितु जैन को 30 वोट मिले। वहीं, पूजा माली को सिर्फ 5 वोट मिले।



इस तरह कांग्रेस ने 25 वोटों के अंतर से सभापति का चुनाव जीत लिया था। इसके बाद उपसभापति पद पर कांग्रेस के ईश्वर सिंह निर्विरोध चुने गए थे। इस तरह नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बन गया।




भाजपा के 10 पार्षद थे, फिर सिर्फ 5 वोट कैसे मिले?

सिरोही नगर परिषद में सभापति चुनाव के नतीजे आते ही भाजपा में विवाद शुरू हो गया था। पार्टी के 10 पार्षद जीतकर आए थे लेकिन उसकी अधिकृत उम्मीदवार पूजा माली को सिर्फ 5 वोट मिले थे। दूसरी तरफ कांग्रेस के 23 पार्षद थे और उसके उम्मीदवार को 30 वोट मिले थे।



ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा के पांच पार्षदों ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि, सभापति चुनाव में वोटिंग गोपनीय होती है। इसलिए यह साफ नहीं है कि किस पार्षद ने किस उम्मीदवार को वोट दिया था। चुनाव के इन नतीजों के बाद से ही भाजपा के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर सवाल उठ रहे।




मंदिर में कसम खाने के बाद भी नहीं थमा विवाद

सिरोही में सभापति चुनाव के बाद भाजपा के पांच पार्षद सारणेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे थे। वहां उन्होंने हाथ में जल लेकर पार्टी के प्रति वफादार रहने और सभापति पद के लिए पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार का साथ देने की कसम खाई थी। इन पार्षदों में गौरव प्रजापत का नाम भी बताया गया था। इसके बावजूद पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर शक बना रहा।



अब गौरव प्रजापत को भी भाजपा के व्हाट्सऐप ग्रुप से निकाल दिया गया है। इसके बाद मंदिर में खाई गई कसम की फिर चर्चा होने लगी है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि गौरव प्रजापत ने पार्टी के खिलाफ वोट दिया था या नहीं।



तीन पार्षदों को भाजपा के व्हाट्सऐप ग्रुप से निकाला

सिरोही भाजपा नगर मंडल के व्हाट्सऐप ग्रुप से बुधवार देर रात चार लोगों को हटा दिया गया। इनमें पार्षद गीता पुरोहित, प्रवीण राठौड़, गौरव प्रजापत और पार्षद पति धनपत सिंह शामिल हैं। धनपत सिंह नगर निकाय चुनाव में उम्मीदवार भी रह चुके हैं।



चारों को ग्रुप से हटाने का मामला सभापति चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग से जोड़कर देखा जा रहा। हालांकि, भाजपा ने अभी तक इसकी वजह नहीं बताई है। चारों को पार्टी से निकालने या किसी पद से हटाने का भी कोई आदेश सामने नहीं आया है। फिलहाल इन्हें सिर्फ व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाया गया है।



नाराज पार्षद प्रवीण राठौड़ ने दिया इस्तीफा

भाजपा के व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने के बाद पार्षद प्रवीण राठौड़ ने संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। राठौड़ का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक पूरी ईमानदारी से पार्टी के लिए काम किया। संगठन ने जो भी जिम्मेदारी दी, उसे निभाया। लेकिन नगर परिषद चुनाव के बाद पार्टी में जो कुछ हुआ, उससे उन्हें काफी दुख पहुंचा है। अब उनके लिए पहले की तरह सम्मान और भरोसे के साथ काम करना मुश्किल हो गया है।



राठौड़ के मुताबिक, उन्होंने अपना इस्तीफा व्हाट्सऐप के जरिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को भेज दिया है। उन्होंने पार्टी में अपने सभी पद और जिम्मेदारियां छोड़ दी हैं। हालांकि, पार्षद पद से इस्तीफा नहीं दिया है।




सभापति चुनाव से पहले भी हुआ था विवाद

सिरोही में सभापति चुनाव से पहले भी कांग्रेस और भाजपा के बीच विवाद हुआ था। भाजपा ने कांग्रेस उम्मीदवार रितु जैन के नामांकन पर आपत्ति जताई थी। इस मामले में दोनों दलों के नेताओं के बीच खींचतान हुई थी। नामांकन पर भाजपा की आपत्ति खारिज होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट में नारेबाजी भी की थी। इसके बाद दोनों उम्मीदवार चुनाव मैदान में बने रहे थे और बाद में कांग्रेस की रितु जैन सभापति का चुनाव जीती थीं।



सिरोही के दूसरे निकायों में भी क्रॉस वोटिंग की चर्चा

सिरोही के अलावा जिले के दूसरे नगर निकायों में भी क्रॉस वोटिंग की चर्चा है। पिंडवाड़ा में उपसभापति और शिवगंज में सभापति चुनाव के दौरान एक-एक वोट दूसरी पार्टी को मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, यह वोट भाजपा पार्षद ने दिया था या निर्दलीय ने, यह अभी साफ नहीं है।



आबूरोड में सभापति चुनाव के दौरान भाजपा को 27 और कांग्रेस को 13 वोट मिले थे। वहीं, उपसभापति चुनाव में भाजपा के वोट घटकर 22 रह गए, जबकि कांग्रेस को 18 वोट मिले। दोनों चुनावों में वोटों की संख्या बदलने से क्रॉस वोटिंग के सवाल उठ रहे हैं।



इसी तरह पिंडवाड़ा, माउंट आबू और आबूरोड में कांग्रेस के कुछ पार्षदों के भी दूसरी पार्टी को वोट देने की चर्चा है। हालांकि, किसने किसे वोट दिया, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।



भाजपा जिलाध्यक्ष बोलीं- शिकायत पर कार्रवाई करेंगे

सिरोही भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी ने कहा कि उन्हें पार्षदों को व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाने की जानकारी नहीं। उन्होंने बताया कि सभापति चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर कुछ पार्षदों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों के आधार पर संगठन कार्रवाई करेगा। रक्षा भंडारी ने यह भी कहा कि उन्हें किसी पार्षद का इस्तीफा नहीं मिला है।



फिलहाल भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि सिरोही नगर परिषद के सभापति चुनाव में उसके पांच वोट कम कैसे हो गए। पार्टी को मिली शिकायतों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर रहेगी।

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