एसएमएस अस्पताल की आग को माना खतरनाक, केंद्र की रिपोर्ट में यह गिनाई खामियां
समझें क्या है पूरा मामला
- एसएमएस अस्पताल में पिछले साल लगी आग को देश के खतरनाक अग्नि हादसों में माना।
- अक्टूबर 2025 में एसएमएस अस्पताल में आग के कारण 8 मरीजों की मौत हो गई थी।
- केंद्र की रिपोर्ट में अग्निकांड के पीछे मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल विफलताओं को जिम्मेदार माना।
- केंद्र सरकार ने राजस्थान को अस्पताल अग्नि सुरक्षा उपायों की तत्काल समीक्षा करने को कहा।
- अस्पतालों में इलेक्ट्रिकल सुरक्षा ऑडिट, मॉक ड्रिल और आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण अनिवार्य होगा।
Jaipur: राजस्थान में जयपुर के एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में पिछले साल लगी भीषण आग
की गूंज अब केंद्र तक पहुंच गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट में इस हादसे को वर्ष 2016 के बाद से देश में हुए 14 खतरनाक अग्निकांडों में एक माना है।
यह रिपोर्ट स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा मानकों, इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस और आपातकालीन तैयारियों की पोल खोलती एक कड़वी सच्चाई भी है।
अक्टूबर 2025 का वो भयानक दिन
रिपोर्ट के अनुसार एसएमएस अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण अचानक आग भड़क उठी थी। इस भयावह घटना में 8 मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
आईसीयू में भर्ती ये मरीज गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। ये पूरी तरह से लाइफ-सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर थे। खुद से भागने या हिलने-डुलने में भी असमर्थ थे।
आग लगते ही फैले घने धुंए और अफरा-तफरी के बीच निकासी में हुई देरी ने एक मामूली बिजली खराबी को एक महा-विनाशकारी त्रासदी में बदल दिया।
2021 में सबसे ज्यादा हादसे
केंद्रीय मंत्रालय की इस रिपोर्ट में जयपुर के इस हादसे की तुलना देश के अन्य बड़े अस्पताल हादसों से की गई है।
जैसे झांसी का महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज, जबलपुर का न्यू लाइफ मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, विरार का विजय वल्लभ हॉस्पिटल और राजकोट का उदय शिवानंद हॉस्पिटल।
इन सभी घटनाओं में बिजली गड़बड़ी ही आग का मुख्य या सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आई।
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो दर्ज किए गए 14 प्रमुख हादसों में से 8 अकेले वर्ष 2021 में हुए थे।
महाराष्ट्र इस सूची में सबसे ऊपर रहा, जहां आग लगने की सबसे ज्यादा 6 घटनाएं हुईं।
गुजरात और उत्तर प्रदेश में 2-2 मामले दर्ज किए गए। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 1-1 घटना दर्ज हुई।
क्या हैं इस लापरवाही के मुख्य कारण?
रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि इन अग्निकांडों के पीछे मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल विफलताएं जिम्मेदार थीं। जनरेटर में खराबी, एसी यूनिट्स का खराब होना और मेडिकल उपकरणों के अत्यधिक गर्म होने को प्रमुख कारण माना गया।
खामियों में अपर्याप्त निकास द्वार, स्प्रिंकलर सिस्टम और वेंटिलेशन की कमी, फायर एनओसी न होना, खराब पड़े अग्निशमन उपकरण और कर्मचारियों को आपातकालीन स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण न होने को भी जिम्मेदार माना गया।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि हमारे अस्पताल अग्निकांडों के प्रति कितने संवेदनशील हैं। मंत्रालय ने आग की रोकथाम, तैयारियों और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को तुरंत मजबूत करने की जरूरत बताई है।
केंद्र की सख्ती, राज्य सरकार ने जारी किए कड़े आदेश
रिपोर्ट के आने के बाद केंद्र सरकार ने राजस्थान सरकार को अस्पताल अग्नि सुरक्षा उपायों की तत्काल समीक्षा करने के सख्त निर्देश जारी किए।
केंद्र ने हादसों के मूल कारणों को खोजने, अग्नि एनओसी का कड़ाई से पालन कराने, नियमित फायर ऑडिट कराने और कर्मचारियों के लिए मॉक ड्रिल आयोजित करने को कहा है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि केंद्रीय निर्देशों के पालन में सभी चिकित्सा संस्थानों को आदेश जारी किया है। यह कहा गया है कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को हर हाल में प्राथमिकता दी जाए।
अब सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में इलेक्ट्रिकल सुरक्षा ऑडिट, नियमित मॉक ड्रिल और आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।
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